Vikram Betal Story in Hindi विक्रम बेताल की रहस्यमयी कहानियां-2021

Vikram Betal Story in Hindi

Vikram Betal Story in Hindi विक्रम बेताल की रहस्यमयी कहानियां

Vikram Betal Story in Hindi

Vikram Betal Story in Hindi के इस लेख मै हम मशहूर विक्रम बेताल की अनोखी कहानिया का संग्रह इकठ्ठा करेंगे और Vikram Betal Story in Hindi की रोचक कहानियों से आपको अवगत कराएंगे।

Vikram Betal Story in Hindi जितनी रोचक और रहस्मई हैं उतनी ही नैतिक ज्ञान से भरी हुई है। Vikram Betal Story in Hindi के इस पहले पोस्ट मै हम जानेंगे इसके लेखक कौन थे और महाराजा विक्रम कौन थे। और किन परिस्तिथि मै ये स्टोरी लिखी गईं। तो चलिए शुरू करते है।

Vikram Betal Story in Hindi

Vikram Betal Story in Hindi ईसा पूर्व 495 मै संस्कृत मै बृहत्कथा नाम से लिखी गई थे। जिसके लेखक शायद बेतालभट्ट बताए जाते हैं जो राजा विक्रमादित्य के नौ रत्नों में से एक थे।

जैसा के उनकी किताब के नाम (बेताल पच्चीसा) से पता चलता है के ये पूरी 25 कहानियां है।

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गंधर्वसेन नामक एक राजा धारा नगरी मै राज करते थे। उनके राज्य मै सभी बड़े ही प्रसन्य थे गंधर्वसेन भी बहुत उदार और दयालु राजा थे उनकी उदारता के बड़े चर्चे थे। राजा गंधर्वसेन की चार रानियाँ थीं। और उन रानियों से उन्हें छ: लड़के प्राप्त हुए थे।

उनके सारे बेटे बड़े ही चतुर और बलवान थे। एक दिन राजा की मृत्यु हो गई और उनकी जगह उनका बड़ा बेटा शंख उनके छोड़ी हुई गद्दी पर बैठा। उसने कुछ दिनों तक राज किया, किन्तु शंख के छोटे भाई विक्रम ने उसे मार डाला और खुद धारा नगरी का राजा बन बैठा।

विक्रम भी अपने पिता की तरह बहुत उदार और साहसी था जिसकी वजह से उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और उसका राज्य सारे जम्बूद्वीप तक फेल गया। एक दिन उसके मन में अपने व नज़दीकी राज्यों की सेर करने का ख्याल आया।

विक्रम ने अपने दरवार मै घोषणा की के वो अपना राज्य अपनी अनुपस्तिथि मै अपने छोटे भाई भर्तृहरि को सौंपकर एक योगी बन कर अपने व अन्य राज्यों की सेर करने अकेला जाएगा। उनके नगर मै एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। वो भगवन विष्णु की तपस्या करता और उसकी पत्नी भिक्छा मांग कर लाती और इस तरह दोनों का गुज़ारा चलता।

ब्राह्मण की तपस्या से विष्णु खुश होकर प्रकट हुए और उन्हें एक फल दिया और कहा जो भी इसे खाएगा वो अमर हो जाएगा। ब्राह्मण वो फल ला कर अपनी पत्नी को देता है। और सारा हाल बताता है। पत्नी कहती है “हम अमर होकर क्या करेंगे सारा जीवन भिक्छा मांगनी पड़ेगी।

आप इसे राजा भर्तृहरि को दे आओ वो इसे खा कर हमेशा राज करेंगे। ब्राह्मण वो फल ले कर राजा भर्तृहरि के पास आ गया। राजा भर्तृहरि अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था और उसे खोने का डर था अतः वो फल उसने अपनी पत्नी को दे दिया।

राजा की पत्नी एक मंत्री के संपर्क मै थी उसने सोचा अगर हमारा राज़ खुल गया तो मंत्री को मिर्त्यु दंड मिल सकता है। इसलिए रानी ने वो फल मंत्री को दे दिया। मंत्री आचरण का अच्छा नहीं था वो एक बेश्या के पास जाता था और बेश्या को बहुत चाहता था अतः उसने वो फल उसे दे दिया।

बेश्या ने सोचा अगर मेने ये फल खा लिया और अमर हो गई तो मुझे सारा जीवन वेश्यावर्ती करनी पड़ेगी जो बहुत कष्टदायक है। उसने वो फल ला कर राजा को दे दिया।

राजा वो फल देख कर बहुत दुखी हुआ और अपनी पत्नी के पास पंहुचा और कहा “तुमने उस खाल का क्या किया” पत्नी ने जवाब दिया वो तो मेने खा लिया।

भर्तृहरि का दुःख उसके झूंठ से और बढ़ गया। भर्तृहरि ने उसे वो फल निकाल कर दिखाया तो रानी ने सब कुछ सच सच बता दिया। राजा की समझ में आया के ये दुनिया एक माया जाल है यहाँ कोई भी किसी का नहीं है। राजा ने वो फल खा लिया और राज पाठ छोड़ कर बैरागी साधु बन कर जंगल को चला गया।

विक्रम की अनुपस्तिथि मै भर्तृहरि का राज पाठ छोड़ने से उनके राज्य मै संकट के बादल मंडराने लगे। शत्रु द्वारा किसी भी समय आक्रमण का खतरा बढ़ गया। जब इस बात की खबर भगवन इंद्रा को हुई तो इंद्रा ने एक देव को राज्य की सुरक्षा के लिए भेज दिया।

वो देव राज्य की सीमाओं पर पहरा देता और सुरक्षा करता। इधर विक्रम को भी अपने भाई द्वारा राज्य छोडे जाने की खबर मिल गई। विक्रम तुरंत राज्य की तरफ वापस हुए। जैसे ही सीमा के करीब पहुंचे देव ने उन्हें रोक लिया।

विक्रम ने कहा में इस राज्य का राजा हूँ। मुझे अंदर जाने दो। “अगर तुम विक्रम हो तो मुझसे युद्ध करो ताकि मुझे यकीन हो जाए” देव ने कहा। विक्रम ने देव हो हरा दिया तो देव ने कहा “विक्रम अब तुम अपने राज्य मै जा सकते हो मुझे स्वयम इंद्र ने राज्य की सुरक्छा के लिए नियुक्त किया था।” देव ने विक्रम को आगे बताया “जिस नक्छत्र मै तुम पैदा हुए उसी मै दो और लोग पैदा हुए थे।

तुम धरती के राजा बने, एक पाताल लोक का राजा बना और एक बहुत बड़ा योगी बन गया है। जो निरंतर अपनी क्शाक्तियों को बड़ा रहा है। उसने पाताल लोक के राजा को मार कर एक पिशाच बना दूर शमशाम मै सिरस के पेड़ पर लटका दिया है और वो अब तुम्हें मारना चाहता है।”

ये बोल देव अदृश्य हो गए। एक दिन शक्तिशील नाम का एक योगी राजा विक्रम से मिलने आया और उसने एक सेब विक्रम को दे दिया और चला गया। विक्रम को देव की बताई हुई बात याद आ गई के एक योगी उसे मारना चाहता है।

विक्रम ने वो सेब एक भंडारी को दिया और कहा इस सेब की सुरक्छा करना कोई भी इसे ना खाए। फिर वो योगी लगभग हर दिन आया और विक्रम को एक सेब दे जाता और विक्रम उस सेब को भंडारी को दे देते इस तरह कई सेब इकट्ठे हो गए।

एक दिन राजा विक्रम अपने घोड़ों को देखने अपने अस्तबल मै गए थे के अचानक वो योगी सामने आ गया और एक सेब राजा को दे कर चलने लगा। विक्रम ने उस योगी को रोका और कहा “आप कौन है और मुझे एक सेब ही क्यों देते है।” योगी ने कहा “मेरा नाम शान्तिशील है और मै एक सेब रोज़ इसलिए देता हूँ क्यों की आपने आज तक एक भी सेब खाया ही नहीं।”

राजा विक्रम और योगी बात कर ही रहे थे के अचानक एक बन्दर करीब के पेड़ से छलांग लगा कर विक्रम के हाथ से वो सेब ले कर वापस पेड़ पर चढ़ गया और सेब को खाने लगा।

जैसे ही उसने सेब को काटा सेब से एक तेज़ रौशनी निकली बन्दर ने सेब फेक दिया। विक्रम ने काटा हुआ सेब उठा लिया सेब के अंदर एक लाल जवाहर चमक रहा था। विक्रम ने तुरंत भंडारी से सारे देब लाने को कहा सारे ही सेब मै एक लाल जवाहर था जो चमक रहा था।

एक जोहरी को बुलाया गया। जोहरी ने बताया ये लाल जवाहर तो बहुत कीमती है एक एक जवार एक एक राज्य के बराबर है। ये सुन कर विक्रम उसे अलग अकेले मै ले गया और कहा “आप मुझे ये लाल क्यों देते हो।” योगी जे जवाब दिया “महाराज! राजा, गुरु, ज्योतिषी, वैद्य और बेटी, इनके घर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।”

योगी ने आगे कहा, “महाराज, बात यह है कि गोदावरी नदी के किनारे मसान में मैं एक मंत्र सिद्ध कर रहा हूँ। उसके सिद्ध हो जाने पर मेरा मनोरथ पूरा हो जायेगा। और मै आपको पुरे बिश्व का राजा बना दूंगा, तुम एक रात मेरे पास रहोगे तो मंत्र सिद्ध हो जायेगा।

एक रात को हथियार बाँधकर तुम अकेले मेरे पास आ जाना।” ये कह कर योगी चला गया। योगी द्वारा बताए दिन व समय पर राजा विक्रम उसकी कुटिया मै पहुंच गए। “महाराज, मेरे लिए क्या आज्ञा है?”

राजा ने योगी से पूछा। “यहाँ से दक्षिण दिशा में दो कोस की दूरी पर शमशान में एक सिरस के पेड़ पर एक मुर्दा लटका है। उसे मेरे पास ले आओ, तब तक मैं यहाँ अपनी सिद्धि करता हूँ।” योगी ने राजा से कहा। ये सुन विक्रम उस शमशान की दिशा मै चल दिया।

रात बहुत ही भयानक थी काली रात जिसमे बारिश भी हो रहे थी शमशान मै जैसे भूतों ने प्रलय ला दी हो। चरों तरफ से भयालनक आवाज़ें आ रहीं थी। विक्रम उनपर ध्यान दिए बिना सिरस के पेड़ के करीब पहुंचे। ये वही पेड़ था जिसके बारे मै योगी ने बताया था।

ये एक बहुत ही भयानक सूखा हुआ पेड़ था जिस पर एक पिशाच रस्सी से लटका हुआ था। विक्रम ने अपनी तलवार से रस्सी को काट दिया और जैसे ही पेड़ से उतरे वो पिशाच वापस पेड़ पर जा कर रस्सी से लटक गया। विक्रम ने दोबारा रस्सी को काटा और पिशाच पर कूद कर उसे पकड़ लिया और एक चादर की सहायता से उस पिशाच को अपने कंधे पर बांध लिया। पिशाच दहाड़ मार कर रोने लगा विक्रम ने पूंछा “तू कौन है।” जवाब मै वो पिशाच ठहाका मार कर हसने लगा।

विक्रम ने फिर पूछा “तू कौन है।” कोई भी जवाब नहीं आया। राजा उस पिसाच को ले कर योगी की कुटिया की ओर चल दिया। ये देख कर पिशाच ने उससे पूछा “राजन तुम बहुत बहादुर हो, तुम कौन हो और मुझे कहाँ ले जारहे हो?” राजा विक्रम ने जवाब दिया, “मेरा नाम विक्रम है। मैं धारा नगरी का राजा हूँ। मैं तुझे योगी के पास ले जा रहा हूँ।”

“एक शर्त पर तेरे साथ चलूँगा” पिशाच ने कहा तो राजा ने पूछा “और वो शर्त क्या है?” फिर पिशाच बोला, “ पण्डित, चतुर और ज्ञानी, इनके दिन अच्छी-अच्छी बातों में बीतते हैं, जबकि मूर्खों के दिन कलह और नींद में गुज़रते है। अच्छा होगा कि हमारी राह भली बातों की चर्चा में बीत जाये। मैं तुझे एक कहानी सुनाऊंगा और एक सवाल करूँगा अगर तूने जवाब दिया तो मै वापस उसी पेड़ पर चला जाऊंगा और अगर चुप रहा तो मै तुझे मार दूंगा।”

विक्रम ने उसकी बात मान ली और पूछा अपना नाम तो बताओ। “मेरा नाम बेताल है अब मै तुझे एक कहानी सुनाता हूँ मेरी शर्त याद रखना।” और इस तरह Vikram Betal Story in Hindi शुरू हुई, बेताल उसे कहानी सुनाता फिर एक सवाल उस कहानी से सम्बंधित पूछता विक्रम अपना राजा धर्म निभाते हुए उसके सवाल का जवाब देते और बेताल उड़ कर वापस उसी पेड़ पर लटक जाता। बेताल पच्चीसी की आगे आने बाली सारि कहानियों की लिंक नीचे मिलेंगे, जैसे जैसे ये पोस्ट लिखे जाते रहेंगे लिंक जोड़ते जाएंगे।

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