Vikram Betal Stories Second Story, Who is Husband 2021

    Vikram Betal Stories Second Story

    Vikram Betal Stories Second Story, Who is Husband

    Vikram Betal Stories Second Story

    Vikram Betal Stories Second Story

    यमुना के किनारे एक केशव नाम का ब्राह्मण रहता था। जिसके घर मै उसके साथ उसकी एक पुत्री, पुत्र और पत्नी रहती थी। उसकी पुत्री बहुत गुणवान व सुन्दर थी।

    जिसकी विवाह की उम्र भी हो चुकी थी। केशव उसका पुत्र व उसकी पत्नी विवाह के योग्य उसकी बेटी जिसका नाम मालती था के विवाह योग्य एक वर की तलाश कर रहे थे।

    केशव का बेटा शहर से बहार पड़ता था। एक बार केशव किसी के विवाह के लिए पूजा पाठ कराने गया हुआ था। जहाँ उसे एक गुडवान लड़का दिखा जो ब्राह्मण ही था अतः केशव ने उसके साथ अपनी बेटी के विवाह का वचन उसे दे दिया।

    इधर केशव के बेटे ने भी अपने सहपाठी मित्र के साथ उसके विवाह का वचन दे दिया।

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    और संयोग से उनकी पत्नी ने भी एक ब्राह्मण लड़का जो उसके घर केशव की अनुपस्तिथि मै आया था। से अपनी बेटी के विवाह का वचन दे दिया। तीनो ने जब मालती के गुणवान सुने तो मन ही मन उसे अपनी पत्नी स्वीकार कर लिया।

    अगले ही दिन तीनो उसके घर मालती से विवाह करने के लिए आ गए। केशव के लिए ये विकट समस्या थी एक ब्राह्मण का वचन, बेटी भी एक, वर तीन क्या करे किस्से विवाह कराए? अभी ये सोच ही रहे थे और किसी नतीजे को नहीं पहुंचे थे तभी एक तेज़ चीख की आवाज़ ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    सभी आवाज़ के ओर भागे और देखा के मालती को एक ज़हरीले सांप ने डस लिया हे और ज़हर शरीर मै फेल रहा है। मालती के मुँह से झाग भी निकलने लगा तो सभी घबरा गए। तुरंत ज़हर का काट करने वाले तांत्रिक को बुलाया गया पर कोई भी कुछ न कर सका। कुछ ही देर मै मालती मर गई।

    केशव ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। तीनो लड़कों ने केशव से कहा हमने मालती को अपनी पत्नी स्वीकार किया था। अब वो मर गई तो हम विधुर हो गए अब हम कभी विवाह नहीं करेंगे और सन्यासी बन कर जीवन बिताएंगे।

    तीनों लड़कों में से एक ने तो उसकी हड्डियाँ चुन लीं और फकीर बनकर जंगल में चला गया। दूसरे ने राख की गठरी बाँधी और वहीं शमशान में ही झोपड़ी डालकर रहने लगा। तीसरा योगी होकर देश-देश घुमने लगा। एक बार तीसरा लड़का जो योगी बना था किसी राज्य मै भिक्षा मांग रहा था। एक परिवार ने उसे घर पर भोजन का आमंत्रण दिया। योगी समय पर पहुंच गया।

    भोजन लगाया गया योगी ने पहले हाथ धोने के लिए पानी माँगा तो घर की मालकिन पानी ले कर आई और योगी के हाथ धुलने लगी। तभी मालकिन का छोटा बच्चा आया और किसी बात के लिए ज़िद करने लगा। महिला ने बेटे को चाटा मारा और अलग कर दिया किन्तु बच्चा नहीं माना और उसने अपनी माँ की साड़ी का कोना पकड़ कर खींच किया जिससे उसकी साड़ी का पल्लू खुल गया और नीचे गिर गया।

    महिला को बहुत गुस्सा आया उसने लड़के को उठा कर जलते हुए चूल्हे में दाल दिया। और लड़का जल कर मर गया। ये देख कर योगी क्रोधित हुआ और भोजन करने से इंकार कर दिया और कहा “जिस घर मै ऐसी डायन माँ हो मै वहां भोजन नहीं कर सकता”।

    इतना सुनकर महिला का पति भीतर गया और संजीवनी विद्या की पोथी लाकर एक मन्त्र पढ़ा। जलकर राख हो चुका लड़का फिर से जीवित हो गया। ये देख योगी बहुत अचंभित हुआ उसने सोचा अगर ये पोथी मेरे हाथ लग जाए तो मै भी अपनी होने वाली पत्नी को जीवित कर सकता हूँ। ये सोच उसने भोजन किया और रात वहीँ रुक गया। जैसे ही सब सो गए योगी अंदर गया और पोथी उठा लाया।

    पोथी के साथ योगी कई दिन का सफर करके वहीँ पहुंच गया जहाँ मालती का अंतिम संस्कार किया गया था। वहां दोनों लड़के बैठे हुए थे। योगी ने पूछा तुम यहाँ क्या कर रहे हो? पहले ने जवाब दिया मै मालती की राख के साथ अब इसी शमशान मै रहता हूँ ये अक्सर मालती की हडियों के साथ यहाँ आते रहते है।

    तुम आज पहली बार आए हो। योगी ने पोथी निकाल कर उन्हें सारी बात बता दी। सुन कर दोनों बड़े खुश हुए। दोनों ने जल्दी से मालती की राख और जली हुई हड्डियां निकाल कर उसके सामने राख दीं। और योगी ने मंत्र पड़ा तो मालती ज़िंदा हो गई।

    इतनी कहानी सुना कर बेताल बोला “राजन, बताओ मालती इनमेसे किसकी पत्नी हुई और उसे किसके साथ विवाह करना चाहिए।” विक्रम ने जवाव दिया “मालती को शमशान मै कुटिया बना कर बैठे वियक्ति से विवाह करना चाहिए और वो उसकी पत्नी हुई। बेताल ने विक्रम से पूछा “कैसे? विक्रम ने जवाब दिया, “जिसने हड्डियाँ रखीं, वह तो उसके बेटे के बराबर हुआ। जिसने विद्या सीखकर जीवन-दान दिया, वह बाप के बराबर हुआ। जो राख लेकर जमा रहा, वही उसका हक़दार है।”

    विक्रम का यह जवाब सुनकर बेताल बोला “राजन, तूने बिलकुल सही कहा तू बहुत पराक्रमी है, किन्तु हमारी शर्त के अनुसार तुझे बोलना नहीं था। तू बोला तो मै चला,” बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा को फिर लौटना पड़ा और जब वह उसे लेकर चला तो बेताल ने तीसरी कहानी सुनायी।

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