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The Unforgiving Monkey King Panchatantra

The Unforgiving Monkey King Panchatantra हेलो दोस्तों आशा है आप सभी स्वस्थ होंगे। आज का हमारा पोस्ट The Unforgiving Monkey King Panchatantra बहुत ही महत्वपूर्ण है।

The Unforgiving Monkey King

वानरराज का बदला ~ पंचतंत्र

Sangat Ka Asar Story

Inspirational Short Stories About Life

Panchatantra Short Stories का सम्पूर्ण इतिहास।

एक समय की बात है एक नगर जिसका राजा का नाम चन्द्र था उनके दो पुत्र थे। और दोनों को ही बंदरों के साथ खेलने का शोक था।

वो दोनों अधिकतर समय बंदरों के साथ ही बिताते और बंदरों को बिभिन्न प्रकार के फल खिलते तो बन्दर बहुत प्रसन्न होते और राजकुमारों को करतब करके दिखते थे।

उन तमाम बंदरों का एक सरदार वानरराज बाहर चतुर और दूरदर्शी था। तमाम बन्दर अपने सरदार बानरराज का बहुत आदर करते थे और बानरराज उन्हें नीतिशास्त्र पढ़ाता था।

राजपुत्र भी बानरराज का बहुत आदर किया करते थे। वो अधिकतर समय उसी के साथ बितारे और सबसे मीठे फल अपने हाथों से उसे खिलते थे।

बानरराज की दूरदर्शिता।

राजगृह में छो़टे राजपुत्र को वन मैं घूमना और वाहन पर सफर करना बहुत पसंद था। अतः उसके वाहन के लिये कई मेढे भी थे पर उन में से एक मेढा बहुत लोभी था। वह जब जी चाहे तब रसोई में घुस कर सब कुछ खा लेता था।

रसोइये उससे बहुत परेशां रहते थे और उसे लकड़ी से मार कर बाहिर निकाल देते थे।

बानरराज महल की इस कलह को देख कर बहुत चिंन्तित रहने लगा। उसे अपने कुल का नाश नज़र आने लगा। उसने तमाम बंदरों को बुलाया और कहा।

“रसोईघर मैं अब लगभग रोज़ ही कलह होने लगी है उस मेढे की वजह से, इससे हमारा अस्तित्व बहुत खतरे मैं है अब समय आ गया है हमें राजमहल छोड़ कर जंगल को चले जाना चाइए।”

एक वानर ने पूछा “उस मेढे की वजह से हमारे अस्तित्व को कैसे खतरा हो सकता है?”

वानरराज ने जवाब दिया “जल्द ही एक दिन आएगा जब रसोइया उसे जलती हुई लकड़ी से मारेगा और मेढे मैं आग लग जाएगी, वो भागता हुआ अस्तबल जाएगा जिसके कारण अस्तबल मैं भी आज लग जाएगी और बहुत सारे घोड़े जल जाएंगे।”

वानरराज ने आगे कहा “घायल घोड़ों के उपचार के लिए बंदरों की चर्बी की आवश्यकता होगी तो हमें मार दिया जाएगा और हमारे कुल का नाश हो जाएगा, इसलिए हमें तुरंत ये जगह छोड़ देनी चाहिए।”

लगभग सभी मन्दरों ने कहा “लगता है अब आप बूढ़े हो गए हो। इसी कारण खुद की बनाई हुई कहानी सुना रहे हो हम अपने सम्मान, खेल और मीठे फलों को छोड़ कर जंगल में कैसे चले जाएं?”

सारे बंदरों ने वानरराज की बात को नहीं सुना और जंगल न जाने का फ़सला किया। वानरराज दुखी मन से सबका साथ छोड़ कर चला गया।

वानरराज की भविष्यवाणी सही साबित हुई।

कुछ दिन तो सबकुछ सही चलता रहा किन्तु वो भयानक दिन आ ही गया जिसकी चेताबनी वानरराज ने दी थी।

एक दिन वो दुष्ट मेढ़ा रसोई मैं घुस गया रसोइए राजा का पसंदीदा पकवान बना रहे थे के मेढे ने सब ख़राब कर दिया तो क्रोध में एक रसोइए ने जलती हुई लकड़ी उसे मार दी और मेढे मैं आग लग गई।

मेढ़ा आग से भयभीत हो गया और भाग कर अस्तबल आ गता और अस्तबल की सुखी घाँस ने आग पकड़ ली जिससे पूरा अस्तबल धु धु कर जलने लगा।

कई घोड़े आग मैं जल कर मर गए और बहुत से घोड़े आग की वजह से घायल हो गए। राजा ने अपने घोड़ों के इलाज के लिए बैध को बुलाया तो बैध ने बंदरों की चर्बी का लेप लगाने को कहा।

राजा ने तुरंत आदेश दिया के तमाम बंदरों को तुरंत मार कर उनकी चर्बी बैध को घोड़ों के इलाज के लिए दी जाए।

सैनिकों ने तीर, तलवार, भाला और पत्थर से सारे बंदरों को मार दिया और उनकी चर्बी निकाल कर बैध को दी तो घोड़ों का इलाज हो सका। किन्तु बंदरों के कुल का नाश हो गया।

वानरराज का बदला

जब वानरराज को ये खबर मिली तो वो बहुत दुखी हुआ। उसने प्रण लिया के जिस तरह राजा ने उसके कुल का नाश किया है वो भी राजा के कुल का नाश कर देगा।

वानरराज दिन रात यही सोचता के कैसे बदला किया जाए किन्तु कोई युक्ति उसे नहीं सूझती।

एक दिन जंगल मैं घूमते हुए उसे एक बड़ा सा तालाब मिला। वानरराज बहुत प्यासा था किन्तु चतुर भी था। उसने देखा के तालाब की तरफ इंसानो और जानवरों के पैरों के निशान तो है किन्तु वापसी के कोई निशान नहीं हैं।

वो तुरंत समझ गया इस तालाब मैं अवश्य कोई राछस मगर रहता है जो सबको खा लेता है।

वानरराज ने तालाब से पानी पीने के लिए कमल की एक नाल जो अंदर से खोकली होती है ली और तालाब मैं डाल कर पानी पी लिए।

तभी पानी मैं कुछ हलचल के बाद नरभक्छी मगरमच्छ नज़र आया और उसने कहा।

“हे वानर तुम बहुत चतुर हो आज तक कोई इस तालाब का पानी पी कर जीवित नहीं गया। मैं तुम्हारी चतुराई से बहुत प्रसन्न हुआ मागो कोई भी एक वर मैं तुम्हे दूंगा।”

वानरराज ने पूछा —-“मगरराज ! तुम्हारी भक्षण-शक्ति कितनी है ?”

मगरराज ने कहा “जल में मैं सैंकड़ों, सहस्त्रों पशु या मनुष्यों को खा सकता हूँ; भूमि पर एक गीडड़ भी नहीं।”

उसने कहा “एक राजा से मेरा बहुत वैर है। यदि तुम एक चमकता हुआ कंठहार मुझे दे दो तो मैं उसके सारे परिवार को तालाब में लाकर तुम्हारा भोजन बना सकता हूँ।”

मगरराज ने चमकता हुआ कंठहार उसे दे दिया। वानरराज वो कंठहार पहिनकर तुरत राजा के महल को चला गया।

उस कंठहार की चमक-दमक से सारा राजमहल जगमगा उठा। राजा ने जब वह कंठहार देखा तो पूछा “वानरराज ! यह कंठहार तुम्हें कहाँ मिला?”

राजा को उसने जवाब दिया “राजन्! यहाँ से दूर वन में एक तालाब है वहाँ रविवार के दिन सुबह के समय जो गोता लगायगा उसे वह कंठहार मिल जायगा।”

राजा के दिल मैं लालच आ गया और उसने इच्छा प्रकट की कि वह भी समस्त परिवार तथा दरबारियों समेत उस तालाब में जाकर स्नान करेगा, जिस से सब को एक-एक कंठहार की प्राप्ति हो जायगी।”

लालच सबको अन्धा बना देता है। सैंकड़ों वाला हजा़रों चाहता है; हजा़रों वाला लाखों; लक्षपति करोड़पति बनने की धुन में लगा रहता है। मनुष्य का शरीर जराजीर्ण हो जाता है, लेकिन लालच सदा जवान रहती है।

राजा की लालच भी उसे उसके काल के मुख तक ले आई। वानरराज के बताए हुए दिन राजा समस्त परिवार और दरवारियों संग तालाब के करीब पहुंच गया।

मौका देख वानरराज ने कहा “राजन! आप समस्त परिवार और दरवारिओं को पहले स्नान करने दें आप मेरे साथ बाद मैं स्नान करना ताकि आपको अधिक चमकीला कण्ठधार मिल सके।”

राजा तुरंत सहमत हो गया और सारे लोग तालाब मैं डुबकी लगाने लगे किन्तु पानी से बाहर आ आए।

जब अधिक समय हुए तो राजा चिंतित होने लगा और उसने कहा “सारे लोग पानी मैं डुबकी लगाने के बाद पानी से बाहर क्यों नहीं आते?”

ठीक तभी वानरराज एक पेड पर चढ़ गया और कहने लगा। “हे लालची राजा अब वो कभी बाहर न आ सकेंगे तालाब के नरभक्छी मगरराज ने अब तक सबको खा लिए होगा।”

“जिस तरह तूने मेरे कुल का नाश किया आज तेरे कुल का भी नाश हो गया। तूने जैसा किया तेरे साथ भी बिलकुल वैसा ही हुआ।”

राजा चीखता चिल्लाता और रोता ही रह गया।

राजा के वापिस जाने के बाद मगरराज तालाब से निकला । उसने वानरराज की बुद्धिमत्ता की बहुत प्रशंसा की।

निष्कर्ष।

वानरराज ने सामान्य नीति का पालन किया था । हिंसा का उत्तर प्रतिहिंसा से और दुष्टता का उत्तर दुष्टता से देना ही व्यावहारिक नीति है।

The Unforgiving Monkey King Panchatantra स्टोरी आपको कैसी लगी अपने सुघाव हमें अवश्य लिखना धन्यबाद!

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