The Cobra and the Crows Panchatantra Story In Hindi-2021

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The Cobra and the Crows Panchatantra Story In Hindi

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The Cobra and the Crows Panchatantra Story

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एक समय की बात है एक घने जंगल मै एक बहुत पुराना और बहुत बड़ा बरगत का पेड़ था। उस पेड़ पर एक कौवे का जोड़ा रहता था। कौवे के इस जोड़े ने बरगत के पेड़ के ठीक बीच मै अपना घोसला ये सोच कर बनाया था। के यहाँ वर्षा, धुप और तेज़ हवाओं से उनके घोसले व उनके बच्चों की सुरक्षा हो सकती है।

अतः कौवे की मादा ने अपने घोसले मै अंडे रखे। वो अपने अण्डों का बहुत ख्याल रखती थी। दोनों मिल कर अण्डों पर वारी वारी बैठते। और जल्द ही भोजन की तलाश करके वापस आ जाते।

एक दिन उन्हें आने मै थोड़ी देर हो गई पर जब वो वापस आए तो उनके अंडे वहां नहीं थे। ये देख कर वो बहुत घबरा गए उन्होंने सोचा शायद तेज़ हवा से उनके अंडे नीचे गिर गए होंगे।

पर उनके अंडे नीचे भी नहीं मिले। कौवे की मादा बहुत उदास हुई। दोनों की समझ में नहीं आया के उनके उंडे कहाँ चले गए। अंत मै दोनों ने मान लिया के उनके अंडे खो गए है।

कुछ समय गुजरने के बाद मादा ने फिर से अंडे रख दिए। और इस बार वो अधिक सावधानी से उनकी देखभाल करने लगी। कोवा अकेला दूर खाने की तलाश मै जाता। और उसकी मादा आस पास ही रहती और खाने की तलाश करती। The Cobra and the Crows

एक दिन जब दोनों ही अपने घोसले मै नहीं थे। तो एक कला cobra सांप उनके घोसले के पास आया और उनके अण्डों को खाने लगा। कुछ ही देर मै मादा भी आ गई उसने देखा एक कला cobra सांप उसके अण्डों को चट कर रहा है।

तो वो ये देख कर घबरा गई और शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुन कर कोवा भी वापस आ गया। दोनों ने मिल कर खूब शोर मचाया पर वो अपने अण्डों को cobra साप से नहीं बचा पाए। सांप उनके अण्डों को खा कर नीचे उतर गया। पेड़ के निचले भाग मै एक खोखला तना था जहाँ सांप रहता था अतः वो बरगद के पेड़ पर खोखले तने मै अंदर चला गया।

दोनों समझ गए पिछली बार भी उनके अंडे उसी ने खाए थे। अपना खाली घोसला देख कर मादा बहुत रोई। कौवे ने समझाया “प्रिय तुम न रो हम अपना घोसला इस बरगद के पेड़ के ऊपरी हिस्से मै बनाएँगे एक दम खुले आसमान के नीचे।

अगर ये cobra दोबारा हमारे अंडे खाने आएगा तो चील या बाज़ उसे मार देंगे उनका सांप से बेर है और हमारे अंडे सलामत रहेंगे।” इस सुझाव की सहमति के बाद दोनों ने एक नया झोसले का निर्माण पेड़ के ऊपरी सतह पर किया।

कुछ दिनों के बाद मादा ने फिर से अंडे रख दिए। और पहले की ही तरह दोनों मिल कर देख भल करने लगे। सांप उनके जाते ही उनके पुराने खोसले पर आता और देखता अंडे तो है नहीं। और वापस चला जाता। एक दिन सांप ने देखा के दोनों पेड़ की ऊपरी सतह पर ही बैठते है और अपने घोसले मै आते ही नहीं है।

और ऊपर से उनके चूज़ों की आवाज़ भी आ रही है। सांप समझ गया उन्होंने उसे मुर्ख बनाया है एक दूसरा घोसला बना है जिसमे अब बच्चे भी निकल आए है। सांप ये देख बहुत खुश हुआ उसने सोचा अगले दिन जब ये दोनों खाने की तलाश मै जाएंगे तो मै इन्हें भी खा लूंगा।

अगला दिन आया दोनों अपने बच्चों के लिए खाने की तलाश मै उड़ गए ये देख सांप तुरंत ऊपर आया। सांप को अपने घोसले के करीब देख मादा डर गई और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाती हुई घोसले के करीब पहुंची। कोवा भी आ गया। दोनों ने आकाश की ओर देखा।

वहां कोई भी चील या बाज़ नहीं था। सांप ने बड़े चाव से उनके बच्चों को खाया और वापस पेड़ के तने मै चला गया। मादा बहुत रोइ और कहा “क्या ऐसे ही ये दुस्ट सांप हमारे बच्चों को खता रहेगा और हम कुछ भी नहीं कर सकेंगे”

कोव ने कहा “हम उस सांप से लड़ नहीं सकते हमें कहीं ओर अपना घोसला बनाना पड़ेगा।” मादा रोते हुए बोली “ये दुस्ट सांप वहां भी आ कर हमारे बच्चों को खा जाएगा। इसका कोई उपाए कीजिए अपने मित्रों से सहायता मांगिये।” मादा के इस सुझाव पर दोनों अपने मित्र लोमड़ी के पास गए और उसे सारा हाल बताया। लोमड़ी ने इसका हल उन्हें बता दिया।

दोनों ख़ुशी से वापस आ गए। अगले दिन लोमड़ी द्वारा बताए गए हल पर काम करने का समय था। बरगद के पेड़ के करीब एक झील थी जहाँ सप्ताह में एक बार राजकुमारी स्नान करने आती थी। कोवा उस जगह पहुंच गया जहाँ राजकुमारी ने अपने वस्त्र व आभूषण उतारे थे और ज़ोर ज़ोर से आवाज़ निकलने लगा।

आवाज़ की दिशा की तरफ राजकुमारी व उनकी सखियों का ध्यान गया तो कोवा राजकुमारी का सबसे प्रिय नौलखा हार अपनी चोंच मै दवा कर उड़ गया। सभी ने शोर मचाया “राजकुमारी का हार कोवा ले गया” तो सिपाही कोवे की तरफ दौड़ने लगे।

कोवा धीमी गति से उड़ता रहा सैनिक उसके पीछे दौड़ते रहे। कोवा बरगद के पेड़ के पास पंहुचा और उसने वो हार cobra सांप के बिल मै फेक दिया और उड़ कर पेड़ पर बेथ गया। सैनिकों ने जैसे ही पेड़ के उस खोखले तने की ओर देखा तो वो चौक गए और पीछे हैट गए कोबरा उसमे कुंडली मारे बैठा था।

सैनिकों ने भाले से एक वार किया तो सांप घायल हो गया और बहार आ गया। सैनिकों ने उस सांप के टुकड़े टुकड़े कर दिए। इस डर से के कहीं ये कोबरा सांप राजकुमारी को कभी कोई नुकसान न पंहुचा दे। The Cobra and the Crows Panchatantra Story हमें सिखाती है के साहस, बुद्धिमता, धैर्य और विचार विमर्श से हर समस्या का समाधान हो सकता है।

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