Short Motivational Stories with Moral in Hindi-2021

    Short Motivational Stories with Moral

    Short Motivational Stories with Moral in Hindi

    Short Motivational Stories with Moral in Hindi पोस्ट मै आपका बहुत स्वागत है। आज की ये पोस्ट Short Motivational Stories with Moral in Hindi बहुत ही भावुक और प्रेरणादायक है।

    Short Motivational Stories with Moral

    Short Motivational Stories with Moral

    आज का ये पोस्ट Short Motivational Stories with Moral न केवल वयस्क बल्कि बच्चों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। तो चलिए शुरू करते हैं Short Motivational Stories with Moral

    Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी।

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    केरल का ईमानदार वियक्ति।

    45 वर्षीय के सुधाकरन उत्तरी केरल के एक कस्बे कान्हांगड के एक बाजार में मिठाई, जूस, कोल्ड-ड्रिंक और लॉटरी टिकट बेचकर एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। परिवार मै कुल 6 सदस्य है माता-पिता, पत्नी-सुधाकरन, और दो बच्चे।

    इनके परिवार की ईमानदारी पुरे गाऊँ मै मशहूर थी किन्तु सुधाकरन ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल कायम की के पुरे देश मै ये मशहूर हो गए।

    सुधाकरन बहुत ही महेनती वियक्ति हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए प्रतिदिन काम करते हैं। रोज़ सुबह 4 :30 बजे उठते है और रोज़ २ घंटे का सफर करके कुछ पार्सल दूसरी जगह पंहुचा कर सुबह 8 :30 पर अपनी दुकान खोलते है और शाम तक दुकान पर बैठते हैं।

    इतनी मेहनत के बाद भी उन्हें मात्र 10000 रूपए बहुत ही मुश्किल से मिलपाते हैं। जिससे वो अपने परिवार को चलाते हैं।

    एक बार जब वो पार्सल ले कर ट्रैन मै सफर कर रहे थे तब उन्हें एक सोने की चैन मिली। उन्होंने सोचा जिसकी ये चैन है वो बहुत परेशान हो रहा होगा।

    कितनी मेहनत करके उसने ये चैन अपनी पत्नी को दी होगी। इसे इसके मालिक तक अवश्य पहुंचना चाहिए।

    अपनी इस सोच के साथ वो स्टेशन पर उतरे और वो सोने की चैन पुलिस को दी और कुछ ही समय मै पुलिस ने वो चैन उसके मालिक तक पंहुचा दी क्यों की उस चैन की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी जा चुकी थी।

    अगले ही दिन एक स्थानीय अखवार ने उनकी ये स्टोरी अपने अखवार मै छाप दी। और आस पास के इलाके मै उनकी ईमानदारी के चर्चे होने लगे लेकिन सफर तो अभी शुरू हुआ था।

    एक दिन रोज़ की ही तरह वो अपनी दुकान पर बैठे थे के उनके एक परिचित का एक फ़ोन कॉल उनके पास आया और लॉटरी के दस टिकट अलग करने को कहा और कहा कल आ कर पैसे उन्हें दे देंगे।

    परिचित के निर्देशों के अनुसार उन्होंने दस टिकट अलग कर लिए और रख लिए।

    अगले ही दिन वो ये देख़ चौक गए के जो दस टिकट उन्होंने रखे थे उसमेसे एक टिकट का जैकपॉट नंबर लग गया था जिसकी राशि एक करोड़ रूपए थी।

    उन्होंने तुरंत ये खबर अपने पिता जी को दी और सारी बात बता दी। पिता जी ने आदेश दिया

    “ये टिकट तुम्हारे परिचित अशोक के हैं और उसके ही भाग्य से ऐसा हुआ हैं अतः इस पर उसका ही हक़ है उसे तुरंत सन्देश पहुचाओ और ये पैसे उसे ही दे दो इस पर तुम्हारा कोई भी हक़ नहीं हैं।”

    सुधाकरन ने ऐसा ही किया अगर वो चाहता तो टिकट को बदल भी सकता था। अभी तक टिकट के नंबर उसे बताए नहीं थे और न ही सुधाकरन के टिकट के पैसे ही उसे मिले थे।

    किन्तु एक ईमानदार वियक्ति अपनी आत्मा पर बोझ नहीं रख सकता अतः उसने पिता जी की आदेश का पालन किया और अशोक को इसकी खबर दी तो अशोक को यकीन ही नहीं हुआ।

    ये खबर जंगल मै आग की तरह फैल गई और इस बार एक बड़े अखबार ने उनका इंटरव्यू लिया। एक सवाल के जवाब मै उन्होंने कहा था।

    “मेरे पिता ने हमेशा मुझसे कहा कि अगर आपको जरूरत है, तो आप भीख मांग सकते हैं, लेकिन आपको कभी भी दूसरे लोगों के अधिकार नहीं छीनने चाहिए,”

    उनका जवाब सुन कर वो रिपोर्टर भी हैरान था उसने अगला सवाल किया “क्या अपने पिता के फैसले पर आपको कुछ पछतावा है। अगर आप चाहते तो वो सारे पैसे खुद भी रख सकते थे ये अवैध भी नहीं होता।”

    उन्होंने मुस्कुरा कर जवाब दिया “”नहीं, कदापि नहीं! मुझे पता था कि मेरे पिता ने जो कहा था वह बिल्कुल सही था”

    “मैंने जो किया उससे मेरी माँ और मेरे अन्य सभी रिश्तेदार बहुत खुश थे। उन सभी ने कहा कि मैंने सही काम किया है।”

    यह आदमी अगर चाहता तो करोड़पति हो सकता था अगर उसने अपने दिल और अपने पिता की कही बात को नहीं सुनी होता और इनाम जीतने वाली लॉटरी का टिकट अपने पास रख लिया होता।

    लेकिन उन्हें अपने फैसले पर जरा भी पछतावा नहीं है। “मुझे पता है कि मैंने जो किया वह वही था जो मुझे होना चाहिए था,” वह बिना किसी हिचकिचाहट के कहता है।

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