सियार और ढोल~Panchatantra the Jackal and the Drum-मित्रभेद-2021

    Panchatantra the Jackal and the Drum

    सियार और ढोल Panchatantra the Jackal and the Drum

    Panchatantra the Jackal and the Drum

    Panchatantra the Jackal and the Drum

    ये कहानी पंचतंत्र की ही एक कहानी है। Panchatantra the Jackal and the Drum बहुत ही प्रेरणा दायक और मनोरंजन से भरपूर कहानी है। और बच्चों को बहुत ही पसंद आती है।

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    Panchatantra the Jackal and the Drum

    एक समय की बात है। दो राज्यों मै दो बड़े राजा रहते थे। दोनों मै हमेशा जंग होती रहती थी। कोई भी किसी से हार नहीं मानता था। जैसे ही कोई राजा जंग हारता तो वो दोबारा अपनी ताकत को इकट्ठी करता और जंग फिर से शुरू हो जाती थी।

    एक बार ये जंग एक जंगल मै हुई। बड़े ज़ोर की लड़ाई हुई और ये लड़ाई कई दिनों तक चली। दिन के समय ये अपनी तलवारों का ज़ोर दिखाते और रात को अपने सिपाहियों का हौसला बढ़ने के लिए कुछ भांड और महिलाऐं ढोल बजा कर उनकी वीरता के गीत गातीं।

    कुछ दिन ये लड़ाई चली फिर शांत हो गई। इस लड़ाई से जंगल के जानवर भी बहुत घबरा गए थे और वो अपने बिल या मांद में ही छिपे रहे। जब लड़ाई समाप्त हो गई और सिपाही वापस चले गए तो कुछ जानवर डरते हुए अपने बिल या मांद से बहार आए।

    ये इलाका एक सियार का था। सियार बहुत ही ख़ामोशी से अपने इलाके की देखभाल के लिए निकला और कई दिनों से शिकार न करने की वजह से भूखा भी था। वो अपने चरों तरफ देख ही रहा था के अचानक “डम दमादम डम” की आवाज़ ने उसे चौका दिया।

    सियार एकदम सेहम गया और एक पेड़ के पीछे चुप गया। कुछ देर के बाद ये “डम दमादम डम” की आवाज़ फिर से सुनाई देने लगी। उसने सोचा “सिपाही तो चले गए है फिर ये आवाज़ किसी आ रही है कही मेरे इलाके मै किसी और जानवर ने तो कब्ज़ा नहीं कर लिए।

    अगर ऐसा है तो ये बहुत खतरे की बात है।” सियार ने बड़ी हिम्मत करके उस आवाज़ के नज़दीक जाने का फैसला किया। उसने सोचा “अगर ये कोई जानवर हे तो केसा है? जा कर देखना चाहिए।” सियार डरते-डरते और छुपते हुए एक पेड़ के कुछ करीब पंहुचा और देखने लगा लेकिन वहां तो कोई भी नहीं था।

    सियार ने सोचा आवाज़ तो यहीं से आ रही थी। लेकिन कोई भी जानवर यहाँ नज़र नहीं आ रहा। अभी सियार ये सोच ही रहा था के तेज़ हवा का घोँका चला और “डम दमादम डम” की तेज़ आवाज़ आने लगी। अचानक आई इस आवाज़ ने सियार को चौंका दिया वो उछाल कर पीछे भगा।

    और झाडिओं में से छिप कर देखने लगा ये क्या चीज़ हे जो इतनी तेज़ आवाज़ करती है। सियार को अपना इलाका गवाने का डर सताने लगा। उसने फैसला किया के वो यहीं से छिप कर देखेगा। और वो पेड़ के नीचे पड़े ढोल को गौर से देखने लगा और सोचने लगा ये केसा जानवर है जो आवाज़ करता है और चलता नहीं है। सिपाहियों के जाने के बाद उनका एक ढोल वही रह गया था।

    और शायद तेज़ हवा की वजह से कुछ इस तरह से एक पेड़ के साथ चिपक गया था के तेज़ हवा चलती तो कुछ लकड़ी की टहनियां ढोल से टकरातीं और “डम दमादम डम” की तेज़ आवाज़ आने लगती थी। सियार इसी ढोल को कोई जनवाज़ समझ कर डर रहा था। सियार ख़ामोशी से उसे देखता रहा हवा चलती तो आवाज़ होने लगती। लेकिन कोई भी जानवर नज़र नहीं आता।

    सियार की समझ में आ गया “ये तो किसी जानवर का खोल है और जानवर तो इसके अंदर है जो आवाज़ करता है। ये ज़रूर बहुत ही स्वादिष्ट जानवर होगा इसे खा कर कई दिनों की भूख आसानी से मिट जाएगी।” सियार ने मन ही मन सोचा “उस जानवर से डरने की ज़रुरत नहीं हे ये मेरे इलाका नहीं छीन सकता।” सियार बड़ी ही सावधानी से ढोल के करीब पंहुचा और उसे देखने लगा।

    “ये तो बड़ा ही अच्छा खोल बनाया है इस जानवर ने। लकड़ी का गोल सा दिखने वाला खोल जिसके दोनों तरफ चमड़े का दरवाज़ा है अगर मै एक रतफ से दरवाज़ा तोडूंगा तो ये दूसरी तरफ से भाग जाएगा।” सियार मन ही मन सोचने लगा। “अकेले इसे काबू मै नहीं किया जा सकता वापस मांद मै जाता हूँ और अपनी सियारन को साथ लाता हूँ दोनों मिल कर हमला करेंगे तो ये शिकार मिल जाएगा।

    सियार दौड़ता हुआ अपने सियारन के पास पंहुचा और बोला जल्दी चल एक बहुत ही अच्छा शिकार ढूंढा है ऐसा शिकार तूने कभी खाया न होगा। सियारन भी कई दिनों की भूखी थी बिना सोचे समझे ही अपने सियार के साथ दौड़ लड़ा दी। दोनों जल्द ही ढोल के करीब पहुंचे सियार ने कहा “बोल देखा है ऐसा शिकार” सियारन ने कहा “पर शिकार कहाँ हे ये तो लकड़ी का टुकड़ा है।

    ” सियार ने जवाब दिया “अरि चुप कर इसके अंदर है शिकार कोई बहुत ही स्वादिष्ट जानवर है जो तेज़ आवाज़ करता है मेने खुद सुना है उसे।” सियार ने कहा “तू दूसरी तरफ जा में इधर से इसका दरवाज़ा तोड़ता हूँ अगर उधर से निकने तो पकड़ लेना।”

    सियारन ने फौरन मोर्चा सम्हाल लिया। सियार ने एक तरफ से ढोल का खोल फाड़ दिया और तेज़ी से ढोल मै जानवर को पकड़ने के लिए झपट्टा मारा। लेकिन ढोल तो अंदर से बिलकुल खली था वहाँ तो कोई भी जानवर नहीं था। सियार ये देख बहुत ही आश्चर्य में पड़ गया। ” ये कैसे हो सकता है ?” सियारन अपने सियार पर बहुत नाराज़ हुई।

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