बन्दर और लकड़ी का खूंटा Panchatantra Story Monkey and Wedge-2021

बन्दर और लकड़ी का खूंटा Panchatantra Story in Hindi

Panchatantra Story Monkey and Wedge Story के इस भाग में आपका स्वागत है। पंचतंत्र के प्रथम भाग “मित्रभेद” की ये पहली कहानी है। इससे पहले लेख मै हमने पंचतंत्र के इतिहास के बारे मै बात की थी अब पचतंत्र की कहानियां शुरू की है। Panchatantra Story Monkey and Wedge आज से लगभग २००० साल पहले लिखी गई ये कहानिया बड़ी ही रोचक और लुहाबनी होने के साथ प्रेरणादायक भी है। ये कहानी Panchatantra Story Monkey and Wedge Story इतनी पुरानी होने के बाद भी अपनी छाप बनाए हुए है। आज की ये कहानी हम कुछ नए अंदाज़ मै पड़ेंगे।

Panchatantra Story Monkey and Wedge

पंडित विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीनो पुत्र बहुशक्ति, उग्रशक्ति और अनंतशक्ति को सबसे पहला ज्ञान आज्ञा पालन और कुछ भी करने से पूर्व सोचने के उदेश्य से एक स्टोरी बनाई और उन्हें सुनाई।

पंडित जी जानते थे के उन्होंने एक बड़ी चिनौती ली है और ऐसे मुर्ख बालकों को सिखाने के लिए उन्हें कुछ अलग करना होगा और सबसे पहले इन्हें आज्ञा पालन का पाठ पड़ना होगा।

अगर ये पहला पाठ उन्हें सही से समझ आ गया तो आगे की रह आसान हो जाएगी और इसी उद्देश्य से इन्होने Panchatantra Story Monkey and Wedge की पहली स्टोरी बना कर सुनाई। Panchatantra Story Monkey and Wedge में उन्होंने कुछ बंदरों के माध्यम से उन्हें आज्ञा पालन का पाठ पढ़ाया। Popular post

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Panchatantra Story Monkey and Wedge बन्दर और लकड़ी का खूंटा

एक समय की बात है एक गांव मै एक भव्य मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा था। मंदिर का ढांचा लगभग तैयार था। अब मंदिर मै लकड़ियों का कार्य हो रहा था दूर जंगल से लकड़ी कटी जाती और हांथी गाड़ी व घोडा गाड़ी से लकड़ियों के बड़े बड़े गट्ठर ला कर मंदिर परिसर के मैदान मै दाल दिए जाते।

वहां सैकड़ों मज़दूर काम किया करते। मज़दूर लकड़ी के तने को चीर कर आवश्यकता व माप अनुसार लकड़ी को काटते फिर उस पर भव्य कलाकृतियां उकेरी जातीं और मंदिर मै लगाई जातीं। कार्य प्रतिदिन की तरह ही चल रहा था।

एक दिन दोपर को जब भोजन का अवकाश हुआ तो एक मज़दूर जो एक लकड़ी के तने को चीर रहा था और अभी ये लकड़ी आधी ही चिरी थी। के दोपहर के खाने का अवकाश हो गया। मज़दूर ने सोचा के इस तने मै एक कील लगी ही रहने देता हूँ।

वापस आने पर लकड़ी की चिराई आसान हो जाएगी ये सोच कर वह मज़दूर लकड़ी के तने मै एक कील लगी ही छोड़ गया। अब वहां कोई भी मज़दूर नहीं था। सरे लोग गांव मै भोजन के लिए चले गए तभी एक बंदरों का झुण्ड वहां आ गया और बंदरों का ये झुण्ड वहां कोतुहल (शोर) मचाने लगा।

बन्दर यहाँ उछलने लगे और मस्ती करने लगे। उनके इस कोतुहल से लकड़ी का एक बण्डल सरक गया और लकड़ी बिखर गईं। किन्तु किसी बन्दर को कोई चोट नहीं लगी तभी झुण्ड के सरदार बन्दर ने सभी को वहां से वापस आने को कहा और चेतावनी दी के लकड़िओं से चोट लग सकती है।

सभी बन्दर अपने सरदार के बात का पालन करते हुए करीब के पेड़ों पर चढ़ गए। किन्तु एक बन्दर जो बड़ा ही शरारती था। उसने अपने सरदार की आज्ञा का पालन नहीं किया और वही उछलता कूदता रहा। सरदार बन्दर ने उसे फिर चेताया के तुम्हें चोट लग सकती है वपर आओ।

किन्तु उस बन्दर ने उसकी बार अनसुनी कर दी। वो शरारती बन्दर यहाँ वहां उछलता हुआ उसी लकड़ी के तने पर पहुंच गया जिसमे एक कील लगी थी। बन्दर ने सोच के इसमें कील कियों लगी है? जबकि बाकी लकड़िओं में तो कोई कील नहीं लगी। वो उस कील को निकलने की कोशिश करने लगा किन्तु कील को वो हिला भी न सका उसकी ये हरकत बाकी बन्दर देख रहे थे।

उसने सोचा अगर में ये कील न निकाल सका तो मेरा ये झुण्ड मेरी खिल्ली उड़ाएगा और मेरे बल पर शक करेगा अब तो मुझे ये कील निकालनी ही होगी ताकि मै अपना बल साबित कर सकूँ। उस कील को निकलने के उद्देश्य से और अपने पुरे बल का प्रयोग करने के लिए वो बन्दर उस लकड़ी के तने पर बैठ गया और कील को हिलने लगा।

वो अपने इस प्रयास में इतना खो गया के उसे ये भी ध्यान न रहा के उसकी पूंछ आधे कटे तने के बीच आ गई है और वो कील ही है किसके कारण वो बचा हुआ है। अपने बल को साबित करने में चूर वो बन्दर लगातार उस कील को हिलता रहा।

कुछ देर की मेहनत के बाद वो कील हिलने लगी। बन्दर बहुत खुश हुआ और इसी उत्साह से उसने अपना पूरा ज़ोर लगा कर उस कील को खींच लिया। जैसे ही कील बहार आई लकड़ी के तने के दोनों भाग आपस में मिल गए और बन्दर की पूंछ उसमे फस गई।

अचानक आई इस आफत से बन्दर घबरा गया और भागने की कोशिश करने लगा। वो जितनी कोशिश करता उसकी पूंछ उतनी ही घायल हो जाती। अब वो दर्द से करहाने लगा अपना पूरा बल लगाने के बाद भी वो अपनी पूंछ निकाल नहीं सकता था। और उसकी पूंछ लगातार अघिक ज़ख़्मी होती जा रही थी जिसके कारण खून भी अधिक बह रहा था।

लगातार खून बहने के कारण बन्दर धीरे धीरे पहले सुस्त हुआ फिर गिर गया। अब उसमे इतनी भी हिम्मत नहीं थी के खड़ा भी हो सके। खून लगरत बह रहा था और कोई बन्दर कुछ नहीं कर पा रहा था। कुछ देर के बाद वो बन्दर मर गया और वो निकाल न सका।

निष्कर्ष Morak of the Story

पंडित विष्णु शर्मा ने राजा अमरशक्ति के तीनो पुत्रों को ये कहानी Panchatantra Story Monkey and Wedge सुनाई और बताया की यदि अपने से बड़े लोगों की आज्ञा का पालन न किया जाए तो अहित ही होता है क्यों की आपके बड़े लोगों का ज्ञान आपसे अधिक होता है और वो आपके हित के लिए ही आपको आज्ञा देते है अतः उनकी आज्ञा का पालन सदैव करना चाहिए।

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