Panchatantra Story व्यापारी का पुत्र की कहानी-2021

    व्यापारी का पुत्र

    Panchatantra Story व्यापारी का पुत्र की कहानी

    ख़ुशी नगर मैं एक बहुत ही सीधा व्यापारी रहता था जिसका एक बहुत ही समझदार बेटा था। व्यापारी जब भी कहीं व्यापर के लिए जाता उसका बेटा उसके साथ ही रहता।

    सीधे साधे व्यापारी को लोग ठगने की बहुत कोशिश करते किन्तु व्यापारी का पुत्र हर संकट से अपने पिता को निकल लेता था।

    व्यापारी का पुत्र

    व्यापारी का पुत्र

    एक समय की बात है। व्यापारी को दूर देश व्यापर के लिए जाना था किन्तु सामान बहुत हो गया था। जिसे हल्का करने के उद्देश्य से एक तराज़ू जो 20 किलो का ठोस लोहे का था।

    अपने एक परिचित को सौंप दिया और उसकी देखरेख करने को कहा। और कहा “मैं वापस आ कर ये तराजू जो मेरे पिता की निशानी है और मेरे लिए ये बहुत लकी है, ले लूंगा।”

    परिचित ने उसे भरोसा दिलाया के वो उसके कीमती तराजू की पूरी हिफाज़त करेगा। किन्तु उस तराज़ू पर उसकी नियत बहुत पहले से ही ख़राब थी। क्योंकि व्यापारी को सब कुछ उसी तराजू की बजह से मिला था जो बहुत लकी था।

    व्यापारी ख़ुशी ख़ुशी निश्चिन्त हो कर दूर देश व्यापारी का पुत्र के साथ व्यापर करने चला गया और खूब अच्छा व्यापर किया। 6 माह बाद वापस आया।

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    वापस आ कर वो अपने परिचित के पास अपना तराज़ू मांगने गया तो उसने कहा “तराज़ू तो चूहे खा गए अब मेरे पास नहीं हैं कहाँ से दूँ।”

    व्यापारी ने कहा “इतना बड़ा ठोस लोहे का तराजू चूहे कैसे खा सकते हैं तुम झूट बोल रहे हो मेरे तराज़ू वापस दो।”

    उसने जवाब दिया “चूहों के दन्त बहुत तेज़ होते हैं वो कुछ भी खा सकते हैं। मैंने तुम्हारा तराज़ू कमरे मैं रखा था अब वो वहां नहीं हैं ये कुछ लोहे के टुकड़े बचे हैं तराजू के ले लो।”

    तराजू व्यापारी के पिता की आखरी निशानी था और उसके लिए बहुत लकी था जिसके खो जाने से वो बहुत दुखी था।

    व्यापारी का पुत्र ने जब अपने पिता को उदास देखा तो पूछा “क्या हुआ पिता जी इतने उदास किस लिए हमने तो अच्छा व्यापर किया था?”

    पिता ने सारी बात बता दी तो व्यापारी का पुत्र समझ गया के उसकी नियत तराज़ू पर ख़राब हो गई है। सिर्फ तराजू मांगने से बात नहीं बनेगी कुछ बड़ा करना होगा।

    व्यापारी का पुत्र बोला “पिता जी आप उदास न हो मैं आपका तराज़ू वापस ले आऊंगा।”

    कुछ ही देर मैं व्यापारी का पुत्र उसके पास पहुंच गया। व्यापारी का पुत्र को देख वो घबरा गया और सोचने लगा “इसके पिता को तो मेने बेबकुफ़ बना दिया इसे कैसे समझाऊँ ये तो बहुत समझदार है।”

    व्यापारी का पुत्र बोला “ताऊ जी मैं नदी मैं नहाने जा रहा था तो सोचा आपके पुत्र को भी साथ ले लूँ अगर आपकी आज्ञा हो तो।”

    “अरे ये क्या इसने तो तराजू की बात ही नहीं की चलो अभी के लिए इससे पीछा छुड़ाते है।” ये सोच कर वो बोला ” हाँ ले जाओ नाहा कर आओ।”

    दोनों नदी किनारे चले गए और व्यापारी का पुत्र ने उसे एक गुफा मैं बंद कर दिया और बहार से गुफा का दरवाज़ा भी बंद कर दिया। और अकेला ही नदी मैं नाहा कर आ गया।

    व्यापारी का पुत्र को अकेला ही वापस आते देख उसने पूछा “मेरा बेटा कहा है?”

    बड़े दुःख की बात है ताऊ जी एक बड़ी सी चील उसे उड़ा कर ले गई जब हम नदी मैं नहा रहे थे तो” व्यापारी का पुत्र बोला।

    “तुम झूंठ बोल रहे हो एक चील इतने बड़े इंसान को कैसे ले जा सकती है।”

    “मैं सच बोल रहा हूँ हम नदी मैं नहा रहे थे तब ही एक बड़ी सी चील आई और उसे अपने पंजों मैं दबा कर उड़ गई और मैं देखता ही रह गया।” व्यापारी का पुत्र बोला।

    “मैं तुम्हारी बात पर विश्वास नहीं कर सकता तुम्हे अभी राजा के पास चलना होगा” उसने कहा।

    “ठीक है चलो” व्यापारी का पुत्र बोला।

    उसने राजा के दारबार मैं जा कर सारी बात बता दी और व्यापारी का पुत्र पर आरोप लगाया के उसने मेरे पुत्र को अगवा किया है।

    राजा ने व्यापारी के पुत्र सी कहा “कोई भी चील किसी इंसान को कैसे उड़ा कर ले जा सकती है? उसका पुत्र वापस कर दो।”

    व्यापारी का पुत्र बोला “राजा साहब कोई चील किसी इंसान को ठीक वैसे ही उड़ा कर ले जा सकती है जैसे ठोस लोहे का तराज़ू चूहे खा सकते हैं।”

    राजा ने कहा “ये क्या माजरा है कहना क्या चाहते तो?”

    व्यापारी का पुत्र बोला “मेरे पिता जी एक व्यापारी हैं जब हम 6 माह पहले व्यापर के लिए गए तो मेरे पिता ने एक ठोस लोहे का तराज़ू इनके पास रख दिया था। अब ये कहते हैं के तराज़ू चूहे खा गए।”

    “जब तराज़ू चूहे खा सकते हैं तो चील इंसान को क्यों नहीं उड़ा ले जा सकती।”

    अब राजा सारा माजरा समझ गए और उन्होंने आदेश दिया व्यापारी का तराजू तुरंत वापस किया जाए और इनका बेटा भी।

    व्यापारी के पुत्र की चतुराई देख राजा बहुत प्रभावित हुए और राजकुमारी का विवाह व्यापारी का पुत्र सी कर दी।

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