Manoranjak Kahaniyan in Hindi दिलचस्प कहानियां 2021

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi दिलचस्प कहानियां

    हम सभी बच्चों को Manoranjak Kahaniyan in Hindi बहुत पसंद होती हैं। Manoranjak Kahaniyan in Hindi हमें बहुत सारी नैतिकता का पाठ पड़ने के साथ हमारा मनोरंजन भी करती हैं। हम अपने इस पोस्ट Manoranjak Kahaniyan in Hindi मै आप सभी के लिए कुछ बिलकुल नई Manoranjak Kahaniyan ले कर आए है जो आपको ज़रूर पसंद आएंगी तो चलिए शुरू करते है Manoranjak Kahaniyan in Hindi का सुहाना सफर।

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi

    वो बचपन के प्यारे दिन।

    आओ कुछ नया सीखे, अच्छे की शुरुआत खुद से करें।

    राजकुमारी की शर्त और जादूगर जंजाल।

    सोने के दाने देने वाली चिड़िया

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi

    बहुत समय की बात है एक एक चिड़ीमार जिसे बहेलिया भी कहते है एक जंगल मै जा रहा था। उसके हाथ मै एक जाल था जिसकी सहायता से वो जंगल की आज़ाद चिड़ियों को पकड़ता और बाजार में ले जाकर बेच देता था।

    उसने देखा एक पेड़ की ढाल पर एक बहुत ही ख़ूबसूरत चिड़िया बैठी हुई है और बहुत ही सुन्दर सा गीत जा रही है और उसकी चोंच से सोने के मोती (दाने) गिर रहे है। ये देख चिड़ीमार बहुत खुश हुआ उसने सोचा आज मेरी किस्मत ज़ोरों पर है। मै इसे पकड़ कर घर ले गाऊंगा और खूब सारा सोना इकठ्ठा कर लूंगा।

    उस चिड़ीमार ने बहुत ही उत्सुकता से पेड़ के नीचे अपना जाल बिछाया और उस पर कुछ अनाज के दाने दाल दिए और छिप कर देखने लगा। कुछ ही देर मै अनाज के दाने खाने की लालच मै चिड़िया जाल मै फस गई। और चिड़ीमार तुरंत भाग कर आया और चिड़िया को पकड़ कर अपने घर ले गया।

    घर ले जा कर उस चिड़ीमार ने एक पिंजरे मै उसे बंद कर दिया। चिड़िया रोज़ सुबह जीत गाती और सोने के मोती गिरा देती। चिड़ीमार उन्हें उठा कर बेच देता और धन इकठ्ठा कर लेता।

    इस तरह बहुत समय गुज़र गया और चिड़ीमार खूब धनवान हो गया। अब चिड़ीमार के पास धन की कोई कमी नहीं थी किन्तु उसके पास प्रसिद्धि और सम्मान नहीं था तो उसने सोचा अब उसे प्रसिद्धि और सम्मान भी मिलना चाहिए। प्रसिद्धि और सम्मान के लालच मै उसने चिड़िया के लिए सोने का एक पिंजरा बनवा लिया।

    और अपनी बड़ाई झूंठ और सच के साथ लोगो को बताने लगा। और अपने साथ सोने का पिंजरा और चिड़िया ले कर घूमने लगा। जल्द ही उसे प्रसिद्धि और सम्मान भी मिलने लगा। लोग उसका सम्मान करने लगे और पीठ पीछे उसकी बातें करने लगा।

    कुछ समय बाद ये बात वहां के राजा को पता चल गई के उसके राज्य में एक मामूली से चिड़ीमार के पास सोने के दाने देने वाली चिड़िया है। राजा ने सोचा इस तरह तो उसका धन बढ़ता ही जाएगा कहीं ऐसा नो हो वो विद्रोह कर दे और उसके राज्य के लिए खतरा बन जाए।

    राजा ने तुरंत आदेश दिया उस चिड़ीमार को गिरफ्तार करके जेल मै डाल दिया जाए और उसकी चिड़िया मेरे पास लाइ जाए। राजा के हुक्म का सिपाहीओं ने पालन किया और चिड़ीमार को जेल भेज दिया और सोने के मोती देने वाली चिड़िया को राजा के हवाले कर दिया।

    राजा ने उस चिड़िया को अपनी रानी को दे दिया। रानी को परिंदे बिलकुल भी पसंद नहीं थे तो रानी ने उस चिडया को उड़ा दिया और सोने के पिंजरे को सुनार को दे दिया और कहा मेरे लिए इसे पिघला कर ज़ेवर बना दो।

    चिड़िया उड़ते हुए वापस उसी पेड़ की डाल पर बैठ कर गीत गाने लगी। अब वो रोज़ चार मूर्खों का गीत गाती।

    पहली मूर्ख मैं थी। जो चिड़ीमार के जाल में अनाज की लालच मै फंसी।
    दूसरा मूर्ख चिड़ीमार था। जिसने मेरा राज़ प्रसिद्धि के लालच मै खोल दिया दिया।
    तीसरा मूर्ख राजा था। जिसने मेरा सम्मान न किया और मुझे रानी को दे दिया।
    चौथी मूर्ख रानी थी। जिसने मुझे आजाद कर दिया।

    निष्कर्ष

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi की इस कहानी से हमें नैतिक शिक्षा मिलती है के हमें कभी भी अपनी बढ़ाई बयान करते हुए अपने या अपने घर के राज़ नहीं खोलने चाहिए।

    सीधा साधा आदमी और ठग

    एक गाऊँ मै एक सीधा साधा आदमी रहता था जो आसानी से किसी पर भी भरोसा कर लेता था। लोग उसे ठग लिया करते और वो बेचारा कुछ भी नहीं कर पता था।

    एक दिन वो शहर के बाजार अपनी एक बकरी और एक घोडा बेचने जा रहा था। उसने अपना दिमाग लगाया और घोड़े की रस्सी को हाथ में ले कर खुद घोड़े पर बैठ गया और अपनी बकरी की रस्सी को घोड़े की पूंछ से बांध दिया और बकरी के गले मै घंटी बांध दी।

    अब जब भी घोडा चलता तो बकरी भी चलने लगती और बकरी के गले मै बंधी घंटी भी बजने लगती। घंटी की आवाज़ से उसे तसल्ली रहती के बकरी साथ चल रही है और वो पलट कर अपनी बकरी को नहीं देखता था।

    उसकी इस हरकत हो एक ठग देख रहा था। उसने तुरंत बकरी के गले से घंटी उतार कर घोड़े की पूंछ मै बांध दी और बकरी ले कर चम्पत हो गया। वो आदमी यही समझता रहा के बकरी साथ चल रही है क्यों की घंटी की आवाज़ तो आ रही थी।

    कुछ ही दुरी तय करने के बाद किसी ने उससे पूछा “भाई लोग तो घोड़े के गले मै घंटी बांधते है तुमने उसकी पूंछ मै घंटी क्यों बंधी है”?

    उसने पीछे मुड़ कर देखा तो बकरी नदारत थी। तभी दूसरा ठग आया और कहने लगा “मेने देखा है एक आदमी तुम्हारी बकरी ले कर जा रहा था। अभी वो अधिक दुरी पर नहीं गया होगा तुम मुझे अपना घोडा दे दो मै तुम्हारी बकरी पकड़ कर ला दूंगा।”

    आदमी सीधा साधा था उसने उस आदमी पर भी भरोसा कर लिया और अपने घोड़े से उतर कर घोडा ठग को थमा दिया और उसके इंतज़ार मै बैठ गया। पूरा दिन गुज़र गया पर वो नहीं नहीं आया। तब उसे समझ आया उस आदमी ने भी उसे ठग लिया है। अपनी बकरी की तलाश मै उसे खुद जाना चाहिए था।

    निष्कर्ष

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi की इस कहानी से हमें नैतिक शिक्षा मिलती है के हमें कभी भी अनजान लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए।

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