Maa Bete Ki Kahani माँ का क़र्ज़ एक ममता की कहानी। 2021

Maa Bete Ki Kahani माँ का क़र्ज़ एक ममता की कहानी।

Maa Bete Ki Kahani

Maa Bete Ki Kahani में माँ एक ऐसा शब्द है जिसकी व्याख्या करना पूरी तरह से असंभव हैं। माँ के लिए एक शब्द तो क्या, उसके लिए शायद एक महाकाव्य अथवा एक महापुराण भी छोटा पड़ जाये।

फिर भी यदि एक कोशिश की जाए तो शायद इन तीन उत्तम शब्दों को चुन सकते है । ये तीन शब्द हैं : ममता, वात्सल्य, निःस्वार्थ

आज की Maa Bete Ki Kahani हम सभी को सोचने को मजबूर करती है के हम अपनी माँ के कितने कर्त्तव्य अदा करते है। और साथ ही एहसास कराएगी के एक माँ कितना कष्ट उठा कर अपने बच्चे को पालती है।

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Maa Bete Ki Kahani

Maa Bete Ki Kahani

आज के कलयुग की ही बात है जिसमे हम रहते है। एक महिला जिसका नाम पवित्रा था, अपने पति और एक 6 माह के बेटे के साथ एक शहर के छोटे से घर मै रहती थी। पति एक फैक्ट्री मै काम करता और घर का गुज़ारा चलता था।

जीवन बड़ा ही खुशहाल गुज़र रहा था। रोज़ की तरह पति सुबह घर से काम के लिए निकला और पवित्रा घर के काम में लग गई। अभी थोड़ा ही समय गुज़रा था के फैक्ट्री में एक दुर्घटना की खबर उसे मिली। और पता चला इस घटना में उसके पति की मिर्त्यु हो गई है।

हसता खेलता परिवार जैसे अचानक बिखर गया। पवित्रा का सबकुछ मानो लूट गया हो। पवित्रा का रो रो कर बुरा हाल था अब उसका और उसके बेटे का कोई भी सहारा नहीं था।

माँ का त्याग

पति की मिर्त्यु के बाद कुछ दिन तो गुज़र गए किन्तु अब घर का राशन भी ख़तम होने लगा था। कुछ रिश्तेदारों ने पवित्रा को समझाया के वो दूसरी शादी कर ले। ताकि उसका और उसके बेटे का जीवन चलता रहे।

उन्होंने समझाया के तुम अधिक पड़ी लिखी भी नहीं हो तुम्हे बहार का कोई काम भी नहीं आता, अपना और अपने बेटे का भरणपोषण कैसे करोगी? शादी ही तुम्हारे लिए एक बेहतर विकल्प है। पवित्रा ने जवाब दिया मै अपने बेटे का सौतेला बाप नहीं चाहती।

मेरी शादी करने से मेरा जीवन तो शायद सवर जाएगा किन्तु मेरे बेटे का जीवन बर्बाद हो जाएगा। मै अपने बेटे के लिए सारा जीवन ऐसे ही गुज़रूंगी और कभी शादी नहीं करुँगी।

माँ का संघर्ष

अपने इस अडिंग फेसले के बाद पवित्रा अगले दिन अपने ६ माह के बेटे के साथ काम की तलाश मै निकल गई। कुछ फ्लैटों मै लोगों से बात की तो उसे दो फ्लैट मै सफाई का काम मिल गया। वो दिन भर लोगों के यहाँ सफाई करती और अपना व अपने बेटे का पेट भर्ती।

उसकी कड़ी मेहनत और ईमानदारी की वजह से उसे और भी काम मिलने लगे। वो अपना काम मन लगा कर करती और अपने बेटे बा भी बहुत ख्याल रखती थी।

इसी तरह वक़्त गुज़रता गया पवित्रा की आखों का तारा धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। अब उसे किसी स्कूल में डालने का वक़्त आ गया। पवित्रा ने अपने बेटे के लिए शहर का सबसे बड़ा स्कूल चुना। किन्तु उसकी फीस बहुत अधिक थी।

पवित्रा अपने पड़ोस की महिला से मिली और उससे कहा बहन मुझे सिलाई सीखा दो, अगर आप मेरी मदद कर दोगी तो रात को सिलाई करके मै अपने बेटे की फीस भर सकती हूँ। महिला ने पवित्रा को कुछ ही दिनों मै सिलाई सीखा दी। अब पवित्रा दिन मै सफाई का काम करती और रात को कपडे सीती। उसकी इस मेहनत से उसके बेटे की फीस आसानी से भर जाती।

बेटे की ज़िद

धीरे-धीरे वक़्त गुज़रता गया और पविता का प्यारा लाल क्लासेज की सीडी चढ़ते-चढ़ते १२वी क्लास की अंतिम परीक्षा दे कर घर वापस आया। पवित्रा आज बहुत खुश थी आज उसके बेटे की १२वी क्लास की परीक्छा पूरी हुई थी। उसके बेटे की ख़ुशी का भी कोई ठिकाना नहीं था।

बेटे ने माँ से कहा “माँ आज मेरी १२वी क्लास की परीक्छा पूरी हुई है। चल आज किसी बड़े होटल मै खाना खाने चलते है और पार्टी करते है। मेरे स्कूल के सभी दोस्त अपने माता पिता के साथ ऐसे ही पार्टी करने जाते है।”

माँ ने बड़े ही प्यार से जवाब दिया “बेटे हमारी इतनी हैसियत नहीं है के हम बड़े होटल मै जाएं, मै तेरे लिए घर में ही अच्छा खाना बना दूंगी।” बेटे ने कहा “माँ तू हर साल ऐसे ही करती है”

“तूने कभी मेरी एक भी ख़ाहिश पूरी नहीं की न जाने भगवान ने मुझे ऐसे घर मै जन्म ही क्यों दिया है जहाँ मै खुश भी नहीं रह सकता।” हर बार पवित्र ये सुन कर बहुत दुखी होती और रोने लग जाती।

और कहती “बेटा मेने तेरे लिए बहुत त्याग किए है तेरे ऊपर मेरे बहुत क़र्ज़ है जो तुम चूका भी नहीं सकते।” माँ की ये बात उसे कभी समझ नहीं आती और वो हमेशा नाराज़ हो कर घर से बहार निकल जाता और पवित्रा घर मै ही रोटी रह जाती।

माँ का क़र्ज़

आज बेटे की परीक्षा का रिजल्ट का दिन था। पवित्रा को यकीन था के उसका बेटा हमेशा की तरह प्रथम स्थान लाएगा। और शायद आज भी बड़े होटल मै जाने की ज़िद करेगा। उसने बड़ी हिम्मत करके अपने पड़ोस की महिला से 500 रूपए उधार लिए इससे पहले उसने कभी किसी से उधार नहीं लिआ था।

आज वो अपने बेटे की ज़िद पूरी करना चाहती थी। शाम हो चुकी थी बेटा किसी भी वक़्त आ सकता था। पवित्रा दरवाज़े पर ही खड़ी थी। उसने दूर से जब अपने बेटे को आते देखा तो उसके चेहरे से ही समझ गई के उसका बेटे आज भी हमेशा की तरह प्रथम स्थान से पास हुआ है।

बेटे ने आ कर अपने प्रथम स्थान पाने की खबर सुनाई तो पवित्रा बहुत खुश हुई उसने अपने बेटे का माथा चुम लिआ। बेटे ने कहा “माँ आज मेरे सारे दोस्त मुझसे बड़े होटल मै पार्टी मांग रहे है। मै कई बार उनकी पार्टी मै हो आया हूँ लेकिन आज वो बहुत ज़िद कर रहे है मेने कभी उन्हें कोई पार्टी नहीं दी है।

आज मै बहुत खुश हूँ में भी उन्हें पार्टी देना चाहता हूँ। तू मुझे २००० रुपए दे दे में भी उनके साथ पार्टी कर लूंगा।” बेटे की ये बात सुन कर पवित्रा की आँख मै आंसू आ गए। उसने कहा “बेटा मेरे पास इतने पैसे नहीं है ये ५०० रूपए हैं अगर इनसे काम चल जाए तो ले जा”

बेटा नाराज़ हो गया “तू हमेशा यही करती है मेरी ख़ुशी तू चाहती ही नहीं है। तूने आज तक मेरे लिए कुछ भी नहीं किया।” इन शब्दों को सुन कर पवित्रा के दिल को एक धक्का लगा। और उसकी आँख मै आंसू आ गए। पविर्ता ने कहा “बेटा ऐसा न बोल मै हमेशा तेरी ही ख़ुशी चाहती हूँ। मेने जो किया तेरे ही लिए किया है।”

“नहीं तू झूटी है तूने मेरे लिए कुछ भी नहीं किया तू हमेशा कहती है न तेरा क़र्ज़ है मुझ पर बता क्या क़र्ज़ है उसे कैसे चुकाया जा सकता है मै तेरा ये क़र्ज़ चूका कर तुझे छोड़ कर चला जाऊंगा और कभी तेरे पास दोबारा लोट कर नहीं आऊंगा।” बेटे ने जैसे माँ पर कोई पहाड़ तोड़ दिया हो।

पवित्रा एक चीख के साथ रोने लगी और जैसे गिड़गिड़ाने लगी “नहीं बेटा ऐसा न करना मै मर जाउंगी”

उसका बेटा ज़िद करने लगा नहीं माँ मुझे ये बता तेरा क़र्ज़ कैसे चुकेगा। पवित्रा बहुत समझाती रही लेकिन बेटा अपनी ज़िद छोड़ने को तैयार ही नहीं था।

अंत मै माँ ने कहा ठीक है आज की रात तू मेरे साथ ही सो जा तेरा क़र्ज़ उतर जाएगा। बेटा राज़ी हो गया। रात को दोनों एक साथ ही लेट गए। रात को कुछ देर बाद जैसे ही बेटे की आँख लगी माँ ने बेटे को उठा दिया और एक गिलास पानी लाने को कहा।

बेटा एक गिलास में पानी ले कर आया, माँ ने आधा गिलास पानी पिया और बाकि जहाँ वो लेटा था फेक दिया। इस पर बेटा नाराज़ होने लगा और कहा “माँ अब में कैसे लेटूँगा?” माँ ने जवाब दिया “लेट जा कुछ देर मै सुख जाएगा।”

बेटा गीले बिस्तर मै लेट गया कुछ देर मै बिस्तर सुख गया और बेटे की आँख लग गई तभी माँ ने बेटे को फिर से उठा दिया और पानी लाने को कहा। इस बार बेटा बड़बड़ाता हुआ उठा और पानी ले आया। माँ ने पहले की तरह आधा गिलास पानी पिया और आधा गिलास पानी उसके बिस्तर पर फेक दिया।

ये देख बेटा दुस्से से पागल हो गया “माँ क्या तू पागल हो गई है मेरे बिस्तर पर पानी क्यों फेकती है?”

माँ ने बहुत ही धैर्य से कहा बेटा सो जा कुछ देर मै सुख जाएगा। बेटा फिर से लेट गया कुछ देर बाद माँ ने उसे उठाया और पानी लाने को कहा।

बेटा इस बार जैसे फट पड़ा “ये क्या चल रहा है जैसे ही में सोने लगता हूँ तू पानी मांगा कर मेरा बिस्तर गीला कर देती है कोनसा बदला ले रही है तू मुझसे, नहीं लेटना मुझे तेरे साथ खुद ही उठ कर पानी लेले।”

पवित्र ने कोई जवाब नहीं दिया बेटा अलग जा कर सो गया। अगले दिन बेटा अपने सरे कपडे और ज़रूरी सामान एक बेग मै रखने लगा। पवित्र ने कहा “बेटा मुझे छोड़ कर जा रहे हो।” बेटे ने गुस्से मै कहा “हाँ मुझे नहीं रहना तेरे साथ”

लेकिन तुमने तो मेरा क़र्ज़ उतारा ही नहीं बिना क़र्ज़ उतारे ही जाओगे। बेटा माँ की तरफ देखने लगा। “बस दो बार साफ पानी फेकने पर तुम इतना नाराज़ हो गए। जब तू छोटा था तो मै तुझे सूखे बिस्तर पर सुलाती थी और खुद तेरे पेशाब से गीले बिस्तर पर सोती थीं”

“रात को जितनी बार भी तुझे भूक लगती मै उठ कर तुझे दूध पिलाती थी पर कभी नाराज़ नहीं हुई।” पवित्रा ने रोते हुए आगे कहा “तेरे पिता की मिर्त्यु के बाद सबने कहा मुझे दूसरी शादी कर लेना चाहिए किन्तु तेरे भविष्य की चिंता ने मिझे दूसरी शादी करने से रोक दिया।”

“तेरे अच्छे भविष्य के लिए मेने लोगों के घर जा कर सफाई का काम किया और रात को कपडे की सिलाई की ताकि तुझे शहर के सबसे अच्छे स्कूल मै पड़ा सकूं।” उसने आगे कहा “ये मेरी ही मेहनत का नतीजा के तू हर बार प्रथम स्थान लाता है।

“आज तू केवल इस लिए मुझे छोड़ कर जाना चाहता है क्यों की तेरी माँ गरीब है और वो तुझे अच्छे होटल मै खाना नहीं खिला सकती। मेने हमेशा तेरी ही ख़ुशी चाही है अगर मुझे छोड़ने से तुझे ख़ुशी मिलती है तो चला जा मै तुझे दुआ देती हूँ हमेशा खुश रहना।”

बेटे का पछतावा

माँ की बात सुन कर बेटे का गुस्सा एकदम शांत हो गया। अब उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा था। वो दौड़ कर आया और अपनी माँ के पैरों पर गिर गया और माफी मांगने लगा “माँ मुझे माफ कर दो, दुनिया की चकाचौंद मै तेरी स्तिथि और तेरे त्याग को मै भूल गया था। मै तो क्या दुनिया का बोई भी बेटा अपनी माँ का क़र्ज़ अदा नहीं कर सकता।”

माँ ने अपने बेटे को गले से लगा लिआ।

कुछ बहुत ही अच्छी बातें जो आपके काम आएंगी

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