Fish Story in Hindi-The Three Fishes-Panchtantra 2021

    Fish Story in Hindi-The Three Fishes

    Fish Story in Hindi-The Three Fishes

    Hollo दोस्तों पंचतंत्र की नई कहानी Fish Story in Hindi-The Three Fishes मैं आपका स्वागत है। आज की स्टोरी Fish Story in Hindi-The Three Fishes मे हम सीखेंगे के कर्म, समझदारी और साहस हमारे जीवन मैं कितने काम आता हैं।

    Fish Story in Hindi-The Three Fishes

    Fish Story in Hindi-The Three Fishes

    एक नदी का किनारा लगातार कटते रहने की वजह से एक बड़ा सा गड्ढा हो गया था जो बहुत गहरा भी हो गया था। जो नदी का पानी भर जाने के कारण एक बड़े से जलाशय का रूप ले चूका था।

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    इस तरह के जलाशय मछलियों का स्वर्ग होते हैं। और ये तो कुछ ख़ास था। चरों तरफ बड़ी बड़ी झाड़ियों से घिरा हुआ जिसके अंदर खूब सारी घांस भी उगती थी जहाँ मछलियां आसानी से रह सकती थीं और उनके अण्डों को भी कोई बड़ा खतरा नहीं था।

    इसी जलाशय मैं तीन मछलियों का एक झुण्ड रहता था। और ये तीनो मछलियों के विचार आपस मैं भिन्न थे।

    उनमे से एक मछली किसी तरह के संकट के समय उसे टालने मैं विश्वास रखती थी और दूसरी संकट के समय उससे बचने का प्रयास करती थी जबकि तीसरी मछली अपने भाग्य पर भरोसा करती थी।

    उनका समय अच्छा गुज़र रहा था कोई बड़ा संकट अभी उनके करीब नहीं आया था और वो बहुत खुश थीं। किन्तु एक दिन कुछ मछुआरे नदी से मछलियां पकड़ कर घर वापस जा रहे थे और आज उनके जाल मैं बहुत ही कम मछलियां फांसी थीं जिसकी वजह से वो बड़े उदास थे।

    अचानक उन्होंने मछलिओं के शिकारी पक्षियों के एक झुण्ड को उड़ते हुआ देखा जिनके चोंच में एक एक मछली थी। ये देख वो हैरान हो गए उन्हें तो अधिक मछलियां मिली नहीं थी तो इनके पास इतनी मछलियां कहा से आईं?

    तभी एक शिकारी ने कहा “यहाँ इन झाड़ियों के पीछे ज़रूर कोई जलाशय होगा जहाँ बहुत सारी मछलियां हैं। अब तो रात होने वाली है हम कल आएँगे और सारी मछलियों को पकड़ लेंगे अभी चलो।”

    झाड़ियों के उस तरफ जलाशय मैं तीनो मछलियों ने शिकारिओं की सारी बात सुन ली और समझ गईं की एक बड़ा खतरा आने बाला है।

    तभी पहली मछली बोली “मेरी प्यारी बहनों एक बड़ा खतरा आने वाला है। इससे पहले के वो यहाँ आए हमें इस जलाशय से तुरंत निलक जाना चाहिए और नदी मैं दूर कहीं चले जाना चाहिए अब यहाँ रहना खतरे से खली नहीं है। मैं यहाँ अब नहीं रुक सकतीं समय रहते जान बचने का सबसे अच्छा उपाए है ये जलाशय खली कर दो।”

    तभी दूसरी बोली “तू तो बड़ी डरपोक है अभी खतरा आया नहीं है अगर आया तो कल आएगा अभी से क्यों परेशां होना? हो सकता है कोई खतरा आए ही नहीं, हो सकता है उनका विचार ही बदल जाए, शायद वो इन बड़ी झाड़ियों से डर जाएं”

    उसने आगे कहा “मैं आशावादी हूँ और खतरों से निपटना भी जानती हूँ हो सकता है उनका जाल रात को चूहे की क़तर जाएं, उनकी बस्ती मैं आग भी तो लग सकती है, या वो किसी तरह की समस्या मैं आ सकते हैं तो शायद वो आ ही न सकें और कोई संकट ही नहीं आए। तो तुम जाना चाहो तो जा सकती हो मैं तो यहीं रहूंगी।”

    तभी तीसरी मछली ने कहा “मैं तो हमेशा भाग्य पर निर्भर करती हूँ अगर भाग्य मैं लिखा है मरना तो नदी मैं भी हम बच नहीं सकते और अगर जीवन है तो यहाँ हमारा कोई भी कुछ बिगड़ नहीं सकता तो मैं भी यही रहूंगी तुम जा सकती हो।”

    पहली मछली उनसे विदा ले कर नदी मैं चली गई और संकट से बच गई।

    अगली सुबह शिकारी आ गए और जाल डालने की तैयारी करने लगे। जब दूसरी मछली ने ये देखा तो वो बचने की उपाए करने लगी और दिमाग लगाने लगी। तभी उसे याद आया कुछ दिन पहले एक सियार जलाशय मैं डूबने से मर गया था उसकी फूली हुई लाश जलाशय मैं कही होगी।

    वो जल्दी से उस लाश की पास गई और उसकी फटे हुए पेट मैं घुस कर बैठ गई और अपनी जान बचा ली।

    जबकि तीसरी मछली ने अपने भाग्य क़े भरोसे कोई प्रयास ही नहीं किया और वो शिकारी क़े जाल मैं फस गई और जाल से निकलने क़े लिए यहाँ वहां भागने लगी। वो जिधर भी जाती आगे उसे जाल ही मिलता। वो समझ गई अब उसका समय आ चूका है अब वो अपने निर्दय पर पछता रही थी और सोच रही थी काश एक प्रयास ही किया होता।

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