Facts in Hindi – Unknown Facts About Earth in Hindi

Facts in Hindi पोस्ट मैं आप सभी का बहुत स्वागत है। Facts in Hindi के इस पोस्ट मैं हम आज बात करने वाले हैं अपनी धरती माता की।

मनुष्य एक बहुत ही जागरूक प्राणी है। मनुष्य की जानने की जिज्ञासा कभी शांत नहीं होती। आज हम टेक्नोलॉजी के स्वर्ण युग मैं जी रहे हैं। हमने इसके सहारे ब्रह्माण्ड के बहुत सारे रहस्यों पर से पर्दा उठा लिया है। और नितन्तर सफल होते जा रहे हैं।

किन्तु आपको ये जान कर आश्चर्य होगा के लाखों सालों से पृथ्वी पर रहने के बाद और इतनी सारी टेक्नोलॉजी के बाबजूद मनुष्य अपनी पृथ्वी के Facts in Hindi को 5% से भी कम जनता है।

आज हम कुछ ऐसे ही Facts in Hindi पृथ्वी के बारे मैं ले कर आए है जो बहुत ही रोचक है। और इन Facts in Hindi को जानना आपके लिए बहुत ही आवश्यक हैं। तो चलिए शुरू करते हैं।

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पृथ्वी, एक नीला गृह, मनुष्यों का घर, इस असीमित ब्रह्माण्ड मैं हमारा एक मात्र पता “पृथ्वी” अपने अंदर कितने Facts in Hindi छिपाए हुए है ये कोई नहीं जनता।

हम इंसान इस नीले गृह के Facts in Hindi के बारे मैं जानने मैं लगे हुए है और हम जितना अपनी धरती को जानने की कोशिश करते हैं ये उतना ही हमें चौंका देती है और इसके कुछ Facts in Hindi तो ऐसे है जिसका जवाब आज साइंस के पास भी नहीं है।

Facts in Hindi No. 1

दोस्तों क्या आप जानते हैं आसमान मैं चमकने वाली बिजली हमारी धरती पर एक दिन मैं 80,00,000 (अस्सी लाख) से भी अधिक बार गिरती है। और अगर बात करें एक सेकेंड की तो ये लगभग १०० (सो) बार एक सेकेण्ड मैं आकाशीय बिजली गिरती है।

इस हिसाब से जितने समय मैं आप ये पोस्ट पूरा पड़लेँगे उतने समय मैं आकाशीय बिजली हज़ारों बार हमारी धरती पर गिर चुकी होगी।

Facts in Hindi No. 2

यदि आपसे पूछा जाए के धरती के कितने प्राकर्तिक उपग्रह है तो आप बोलेंगे “एक” जिसका नाम आप बताएंगे चाँद। दोस्तों आप यहाँ थोड़ा गलत हैं। सिर्फ चाँद ही हमारी धरती के चक्कर नहीं लगता बल्कि कुछ और भी है।

बैज्ञानिकों के अनुसार चाँद के आलावा दो “ऑर्बिटर छुद्र गृह” यानि एस्ट्रोइड हमारी धरती के चक्कर चाँद की ही तरह लगाते हैं।

इसमें से पहले को 3753 CRUITHNE और दूसरे को 2002 AA29 कहा जाता है। इनमे से पहले को 1986 मै खोजा गया था। इसे सूरज का एक चक्कर लगाने मै पृथ्वी जितना ही समय लगता है।

इसी लिए कहा जाता है ये पृथ्वी का पीछा कर रहा है। और इसे हमारी पृथ्वी का दूसरा चाँद भी कहा जाता है। ये अकार मैं बहुत ही छोटा है जिस कारण हम इसे पृथ्वी से नहीं देख सकते।

और दूसरा एस्ट्रोइड 2002 AA29 भी पृथ्वी के साथ ही साल मैं एक बार सूरज का चक्कर लगता है। ये एस्ट्रोइड हर 95 साल मैं पृथ्वी के बेहद करीब से गुज़रता है।

Facts in Hindi No. 3

हमने अपने जीवन मैं धरती पर बहुत सारे गड्ढे देखे होंगे। आपने अपने जीवन मैं कितना गहरा गड्ढा देखा है हमें कमेंट करके ज़रूर बताएँ।

दोस्तों बचपन मैं हम सभी ने एक कहानी ज़रूर सुनी होगी के अगर हम भारत से एक गड्ढा धरती के आरपार खोदें तो दूसरी तरफ से हम अमेरिका पहुंच जाएंगे।

अब ये कहानी आपको ज़रूर बेतुकी लगती होगी अगर सच मैं ऐसा हो सकता तो जगह जगह लोग ऐसी सुरंग खोद लेते और हमारे परिवहन का नक्शा ही बदल जाता।

क्यों की अब हम समझ चुके हैं के धरती को एक हद से अधिक खोदना नामुमकिन है। आज के इस पोस्ट Facts in Hindi को पड़ने के बाद आप समझ जाएंगे ये क्यों नामुमकिन है?

अब सवाल ये भी उठता है के धरती को कितना गहरा खोदा जा सकता है या साइंटिस्ट ने कितना गहरा गड्ढा खोदा है और वहां उन्हें क्या मिला?

दुनियां के सबसे गहरे गड्ढे की खुदाई रशिया ने की थी जिसका नाम “कोला सुपरडीप बोरहोल” था। इस गड्ढे को साइंटिस्ट्स ने 1970 में एक प्रयोग के तहत खोदा था।

इसकी खुदाई का मुख्या उद्देश्य ये जानना था के धरती की बाहरी सतह के पीछे क्या रहस्य छिपा है। और धरती को कितना गहरा खोदा जा सकता है।

“कोला सुपरडीप बोरहोल” को खोदने मैं रशिया को 20 साल का समय लगा। जैसे जैसे इसे खोदते जा रहे थे रहस्य और गहरे होते जा रहे थे जिसका कोई भी जवाब नहीं था।

खुदाई की शुरुआत से पहले बैज्ञानिक नहीं जानते थे के धरती की कोर उनकी कल्पना से भी कई अधिक गहरी है और उस तक पंहुचा बिलकुल नामुमकिन है।

लगातार 20 सालों की खुदाई के बाद 12.24 k. m. गहरा गड्ढा खोद कर तैयार कर लिया गया। लेकिन ये धरती के कोर का 1% भी नहीं था और यहाँ से आगे बढ़ना अब नामुमकिन होता जा रहा था।

1994 मैं बैज्ञानिकों को इसकी खुदाई रोकनी पड़ गई। क्योंकि इसके आगे बोरहोल को खोदना मुमकिन नहीं था। इतनी गहरी खुदाई की जा चुकी थी के 240 फिट के 167 क़ुतुब मीनार को इसमें आसानी से डाला जा सकता था।

इतनी गहराई पर गर्मी भी बढ़ती जा रही थी जिसमे मशीने काम नहीं कर पा रही थी। जिससे पता चला के गहराई पर खोदने से टेम्प्रेचर बढ़ता ही जाएगा। और साथ ही कुछ गैस भी हाथ लगीं जिससे पता चला धरती के अंदर कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण गैस मौजूद है।

गड्ढे की खुदाई बंद करने का सबसे मुख्या कारण जो बताया जाता है वो है गड्ढे के अंदर से लोगों के चीखने की आवाज़ें आना। जिसका साइंस के पास भी कोई जवाब नहीं है।

गड्ढे की जिस तरह खुदाई बढ़ती जा रही थी लोगों के चीखने की आवाज़ भी बढ़ती जा रही थी ये आवाज़ बिलकुल ऐसी थी जैसे बहुत सारे लोगों को यातनाए दी जा रही हों।

जिसकी वजह से लोगों को लगने लगा के धरती की गर्भ मैं नर्क है। और अधिक खोदने पर नर्क मैं छेद हो जाएगा और बुरी आत्माएं धरती पर आ जाएंगी।

लेकिन कुछ लोग गड्ढे की खुदाई को बंद करने का मुख्या कारण सिर्फ बढ़ता तापमान ही बताते हैं आपको क्या लगता हैं हमें कमेंट करके ज़रूर बताएँ।

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