Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी। 2021

Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी।

Ek Kahani Aisi Bhi रेशमा एक होनहार बच्ची थी। और वो हर चीज़ को बहुत ही जल्दी सीख लिया करती थी। जिसने अपने जीवन मै सिर्फ संघर्ष ही देखा हो वो दूसरों से अधिक तेज़ होता है। रेशमा का जीवन भी अजीब तरह के संघर्षों से भरा हुआ था। उसने जब होश सम्हाला तो अपने घर मै हमेशा कलह ही देखी, खुशियां तो जैसे वो जानती ही नहीं थी क्या होतीं हैं? पढ़िए “Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी।”

Ek Kahani Aisi Bhi

Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी।

रेशमा की माँ का नाम “आमना” था। जिसने शादी से पहले भी दुःख भरा जीवन बिताया था। आमना की एक बहन और दो छोटे भाई थे, जब वो छोटी थी तो आमना के पिता अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारी को निभा न सके और अपने परिवार को छोड़ कर भाग गए।

माँ की परेशानी।

जिसकी वजह से उसके परिवार पर एक गंभीर संकट आ गया। आमना परिवार मै सबसे बड़ी थी अतः उसने ही परिवार को सम्हाला और लोगो का काम करने लगी, सिलाई सीखी और इस तरह उसने अपने परिवार को सम्हाला। समय गुज़रा और आमना की भी शादी हो गई।

लेकिन शादी के बाद भी आमना को सुकून नहीं मिला जैसे उसकी किस्मत और परेशानी साथ साथ चलती थी। उसका शोहर अतहर शराबी और जुआरी था। और कुछ काम भी नहीं करता था जिससे उसके घर मै कई कई दिनों चूल्हा भी नहीं जलता था।

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अपने घर को चलाने के लिए आमना ने सिलाई का काम ससुराल में भी शुरू कर दिया। वो दिन तार सिलाई करती और कुछ टेलर से कपडे माँगा कर उनकी तुरपाई भी करती। जिससे उसको कुछ पैसे मिल जाते थे। लेकिन उसका शोहर जो कुछ भी काम नहीं किया करता था, अब वो उसके पोसे भी मांगने लगा और अगर आमना मना करती तो वो उसे मरता और पैसे छीन कर ले जाता और जुए और शराब मै सब ख़तम कर देता।

ख़ुशी के कुछ पल।

आमना का जीवन इसी तरह चल रहा था। कुछ दिनों बाद आमना के घर एक नन्नी सी पारी ने जन्म लिया। जिसका नाम आमना ने रेशमा रखा। रेशमा बहुत ही सुन्दर बच्ची थी। आमना ने सोचा मै अपनी बेटी का खूब ख्याल रखूंगी और उसे किसी तरह की कोई भी तकलीफ नहीं होने दूंगी।

आमना अपनी बेटी रेशमा के साथ बहुत खुश होती उसके दर्द भरे जीवन मै जैसे रेशमा एक दवा बन कर आई थी। जब भी आमना अपनी बेटी रेशमा को देखती उसका सारा दुःख दर्द काम हो जाते।

रेशमा अब चार साल की हो चुकी थी। लेकिन उसके बाप अतहर ने कभी अपनी बेटी को गले से लगा कर प्यार नहीं किया था। और वो तो अपनी ही बेटी से नफ़रत किया करता था। अगर उसकी बेटी उसके पास आती तो बुरी तरह से धुत्कार दिया करता था। क्योकि वो चाहता था उसके घर मै एक लड़का ही पैदा होना चाहिए था।

आमना ने अपनी प्यारी बेटी को पास ही के एक स्कूल मै दाखिल करवा दिया। आज उसका पहला ही दिन था। आज आमना उसे स्कूल छोड़ कर आई थी। पहली बार उसकी बेटी उससे अलग हुई थी। आमना अभी अपनी बेटी के बारे मै ही सोच रही थी। “वो स्कूल मै पहला दिन कैसे गुज़रेगी, कहीं रो न रही हो”।

आमना अभी सोच ही रहे थी के उसका शोहर चीखता और चिल्लाता हुआ घर मै दाखिल हुआ। उसके साथ उसकी बेटी भी थी जिसे वो स्कूल से वापस लेकर आया था। बेटी को ज़ोर का धक्का देते हुए कहने लगा “मेने पैसे मांगे तो कहती है नहीं है इसको स्कूल मै दाखिल करने के पैसे तेरे पास कहाँ से आए।”

रेशमा अपने बाप के इस धक्के से ज़मीन पर गिर गई और रोने लगी ये धक्का जैसे रेशमा के दिल को लगा हो, रेशमा की चीख निकल गई और उसने अपनी बेटी को उठा कर गले से लगा लिया।

माँ बेटी दोनों बिलख बिलख कर रोने लगे। लेकिन उनके रोने का ज़ालिम बाप पर कोई भी असर नहीं हुआ। और कहने लगा “आज के बाद उसे स्कूल मत भेजना मैंने इसका नाम कटवा दिया है और पैसे वापस ले आया हूँ।” इतना कह कर वो वापस शराब के ठेके पर पहुंच गया।

दुःख भरे दिन।

काफी देर तक रेशमा रोटी रही। और सोचती रही “हम औरतों का नसीब कैसा होता है? क्या हमें सुकून के दो पल भी नहीं मिल सालते। मैंने अपनी बेटी के लिए कितने सपने देखे थे। शायद वो कभी पुरे नहीं हो सकते।”

आमना न जाने क्या क्या सोचती रही “अगर मै इसी तरह प्यार से अपनी अपनी बेटी को पालूंगी तो ये कमज़ोर हो जाएगी। मुझे अपनी बेटी को मज़बूत बनाना होगा जो बड़े होकर इस पुरुष प्रधान समाज से लड़ सके। मुझे अपनी बेटी को प्यार से नहीं बल्कि कठोरता से पाल कर कठोर बनाना होगा।”

अगले दिन से आमना ने अपने दिल पर पत्थर रख कर अपने बेटी को ढेर सारे बर्तन दे दिए और कहा “इन्हे अच्छी तरह से साफ करो। तभी सुबह का नाश्ता मिलेगा।”

रेशमा की समझ मै नहीं आ रहा था आज माँ को क्या हुआ है? जो मुझसे कभी कोई काम नहीं करतीं थी वो आज इतने सारे बर्तन धोने को कह रही है। चार साल की बेटी ने बर्तन साफ करने शुरू कर दिए। कुछ देर बाद आमना वापस आई तो देख बर्तन अच्छी तरह से साफ नहीं है।

आमना अपनी बेटी पर चिल्लाने लगी “कैसे बर्तन साफ किए है सारे बर्तन गंदे है ठीक से साफ करो नाश्ता चाहिए या नहीं।” रेशम रोने लगी तो आमना ने कहा “रोने से कुछ भी नहीं होगा काम करो तो ही खाना मिलेगा”, इतना कह कर आमना कमरे मै चली गई और खूब रोई।

रेशमा अभी बहुत छोटी थी उसे पता ही नहीं था उसके लिए परेशानी के दिन शुरू हो चुके है एक तरफ उसका बाप जो बिलकुल जल्लाद था जो उसे पसंद भी नहीं करता था तो दूसरी तरफ उसकी माँ का मिजाज़ भी अब बदल चूका था।

सारे बर्तन साफ करने के बाद वो कमरे मै आई और कहने लगी “माँ मेने सारे बर्तन धो दिए है अब मुझे बहुत भूक लगी है थोड़ा खाना दे दो।”

ये सुन कर आमना का दिल भर आया लेकिन उसने खुद पर काबू रखते हुए अपने बेटी को खाना दे दिया। और कुछ देर बाद आमना ने उससे कहा “खाना खाने के बाद सारे घर की झाड़ू भी लगा देना। जब तक मै कुछ कपडे सी लेती हूँ।”

रेशमा घर की झाड़ू लगाने लगती है और आमना कपडे सीने बैठ जाती है। दुपहर के बाद जब आमना उठती है तो सिलेट और चौक ले कर रेशमा के साथ बैठ जाती है और उसे पढ़ाने लगती है। शर्त वही इतनी देर पढ़ाई करने के बाद ही दोपहर का खाना मिलेगा।

आमना ने बहुत सोच कर अपने पैसों को तीन जगह पर रखना शुरू कर दिया। अगर उसका शोहर अतहर आता और पैसे मांगता तो वो पहले तो मना करती अपने शोहर से कुछ बुरा सुनती कभी कभी मार भी खाती। घर की तलाशी मै उसे कुछ पैसे मिल जाते तो वो वापस शराब के अड्डे पर चला जाता। इससे उसे कुछ मार तो पड़ती पर कुछ पैसे बच जाते जिससे वो घर का खर्च भी चलाती और अपनी बेटी के लिए ज़रूरी किताबें भी ले आती और खुद ही पढ़ाती।

रेशमा का जीवन इसी तरह से चलता रहा, उसकी माँ उससे घर का सारा काम कराती और अब वो जब थोड़ी बड़ी हुई तो कपडे भी सिलवाना शुरू कर दिए।

रेशमा अब 11 साल की हो चुकी थी और अब वो सोचने लगी थी। “मै कैसा जीवन गुज़र रही हूँ? क्या मै इस दुनिया की सबसे बदनसीब लड़की हूँ? खेल क्या होता है मुझे पता ही नहीं, बाप का प्यार किसे कहते है जानती नहीं, माँ काम करने के बदले मै खाना देती है माँ भी कभी प्यार नहीं करती तो मै इस घर मै पैदा ही क्यों हुई हूँ?” ये सोच वो बहुत रोटी थी।

पर उसे नहीं पता था उसकी माँ उसे बहुत प्यार करती थी। घर का सारा काम करने के बाद जब रेशमा सो जाती तो उसकी माँ आमना उसके सरहाने आ कर बैठ जाती और रोते हुए उसके सर पर हाथ फेरती और अपना प्यार दिखती थी। रेशमा तो उस वक़्त थक कर सो चुकी होती थी तो उसे पता ही नहीं चलता था।

एक दिन रेशमा को उसकी माँ ने बर्तन धोने के लिए दिए तो रेशमा ने कहा “माँ मुझसे बर्तन नहीं धुलाया करो मेरे हाथ ख़राब हो जाते है। मै घर का बाकि सारा काम कर दिया करुँगी। सब लोग कहते है मै इतनी ख़ूबसूरत हूँ पर मेरे हाथ कैसे है?”

रेशमा के मुँह से बस इतना ही निकला था के एक ज़ोर का थप्पड़ उसके गाल पर लगा। एक चीख ने जैसे पिघला हुआ ताम्बा उसके कान मै डाल दिया हो “बर्तन धोने से तेरे हाथ ख़राब हो जाते है। ससुराल मै जा कर यही बोलेगी। तुझे अभी तक समघ नहीं आया औरतों की ज़िन्दगी कैसी होती है। तुझे पता नहीं मेरा बाप मुझे छोड़ कर भाग गया। तेरा बाप भी शराबी है जो हम दोनों को मरता पीटता है।”

आमना जैसे फट पड़ी “किसी के कह्देने से तेरे हाथ ख़राब हो जाते है। किसे पता है तेरी नसीब मै क्या लिखा है क्या पता तेरा शोहर भी तेरे बाप जैसा हुआ तब क्या करेगी किस्से धुलवाएगी घर के बर्तन?”

रेशमा ने रोते हुए ही घर का सारा काम किया। और इसी तरह वक़्त गुज़रता रहा और रेशमा बीस साल की हो गई। अब रेशमा ने अपने बाप से छिप कर इंटर भी डिस्टेंस से कर लिया था।

सब कुछ बदल गया।

एक दिन रेशमा की चाची जो उसके बाप की खला ज़ात बहन थी आई और आमना से रेशमा का हाथ मांगने लगीं अपने बेटे रिहान के लिए। रिहान एक बहुत ही होनहार और गबरू जवान लड़का था जो एक बड़ी फैक्टरी में मैनेजर था। एक शादी मै उसने रेशमा को देखा था। उसे रेशमा बहुत अच्छी लगी तो उसने अपनी माँ को रिश्ता ले कर भेज दिया।

इतना अच्छा रिश्ता आया था आमना की समझ में नहीं आ रहा था क्या करे उसने तुरंत हाँ कर दी। कुछ वक़्त के बाद शादी की तारिख रख दी गई, जो बहुत तेज़ी से करीब आने लगी अब आमना उससे कुछ भी काम नहीं कराती थी। रेशमा सोचती ये माँ को क्या हुआ अब काम ही नहीं कराती है।

एक दिन रेशमा घर के सारे बर्तन इकट्ठे कर धोने चली तो माँ ने रोक दिया और कहने लगी “बेटा ला मै धो देती हूँ तेरे हाथ ख़राब हो जाएंगे।” रेशमा को कुछ समझ नहीं आ रहा था एक बार उसने भी ऐसा ही कहा था तो एक ज़ोर का थप्पड़ पड़ा था।

“माँ तुझे क्या हुआ है अब तू मुझसे काम नहीं कराती क्या मै इतनी बुरी हूँ जो तू मुझे भूल जाना चाहती है शादी से पहले ही” रेशमा ने आखों मै आँसू भर कर कहा।

आमना का जैसे दिल ही तड़प गया सालों से जो दिल मै छिपा था बहार आ गया। आमना में अपनी बेटी को गले से लगा लिया “मुझे माफ़ कर दे बेटा, जैसे मैंने अपनी ज़िन्दगी गुज़री मै नहीं चाहती थी तू भी गुज़ारे इसलिए मैंने तुघे इस तरह पाला ताकि तुझे एहसास न हो अपने घर मै तो अच्छी ज़िंदगी गुज़री पर ससुराल मै मेरे साथ ये क्या हो रहा है। मेने तुझे ससुराल मै जीने के लिए तैयार किया पर मै गलत थी तेरी किस्मत बहुत अच्छी है मुझे माफ़ कर दे बेटा। मै तुझसे बहुत प्यार करती हूँ बस कभी इज़हार नहीं किया।”

वो दिन भी आ गया जब रेशमा का दूल्हा सज कर घोड़े पर बैठ अपनी रानी को लेने आ गया। और लाल जोड़े मै सजी रेशमा बिदा हो गई। आमना अपना सूना घर और दीवारे ही देखती रही और पछताती रही काश मने अपनी बेटी को लाढ और प्यार से पाला होता तो कितना अच्छा होता।

कई दिन गुज़र गए आज आमना को अपनी प्यारी बेटी की बहुत याद आ रही थी तो उसने सोचा चलो आज उसकी ससुराल चलते है अपनी बेटी से मिल आएं।

आमना घर का सारा काम जल्दी निपटा कर रेशमा की ससुराल चली गई। रेशमा की सास ने बहुत ही अच्छी तरह से उनका स्वागत किया कुछ देर बैठने के बाद आमना ने पूछा “मेरी बेटी कहाँ है मै उससे मिलना चाहती हूँ आज उसकी बहुत याद आ रही है?”

आपकी बेटी अपने कमरे मै आराम कर रहीं हैं और उनका कमरा उप्पर है चली जाइए और मिल आईए।” सास ने बताया।

आमना जल्दी से उप्पर गई और जैसे ही कमरे के करीब पहुंची रिहान की रेशमा पर चिल्लाने की आवाज़ आई। आमना का दिल धक् से रह गया। रिहान आमना पर चिल्ला रहा था। आमना ने कान लगा कर सुनने की कशिश की के रिहान क्या कह रहे हैं?

“रेशमा तुम कभी नहीं सुधर सकती तुम्हें मेरा कोई ख्याल नहीं है। तुम बस सारे घरवालों को खुश करने मै लगी रहती हो। क्या ज़रूतात है तुम्हे घर का काम करने की घर मै दो नौकर हैं। और कितनी बार कहा है घर के बर्तन नहीं धोया करो तुम्हारे हाथ ख़राब हो जाते हैं। पर तुम्हे समझ नहीं आता। मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता जब तुम काम करती हो”

ये सुन कर आमना की आँखों मै आँसू आ गए माँ की ममता आँखों से झलक आई और एक बार फिर आमना को अपने किए पर पछतावा होने लगा।

दोस्तों Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी। ये कहानी आपको कैसी लगी कमेंट सेक्शन मै ज़रूर बताना।

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