Brahmand Ke Rahasya-ब्रह्माण्ड के अनसुलझे रहस्य New Post 2021

Brahmand Ke Rahasya-ब्रह्माण्ड के अनसुलझे रहस्य 

जब हम रात को आसमान की तरफ देखते हैं। कितने सारे तारे हमें नज़र आते हैं। दिल मैं प्रश्न आता है Brahmand Ke Rahasya क्या है? और Brahmand Ke Rahasya कितना बड़ा है। हम जितना अपने आकाश के बारे मे सोचते हैं। हमारे सवाल लगातार बढ़ते ही जाते हैं।

Brahmand Ke Rahasya

साइंस ने बहुत तरक्की की है और लगभग बहुत सारे Brahmand Ke Rahasya के बारे मे हमारे सवालों का जवाब हमे दे दिया हैं।

Brahmand Ke Rahasya के ये जवाब हमें बहुत चौकाते हैं। और हमारी जिज्ञासा को और बढ़ाते हैं के हम Brahmand Ke Rahasya के बारे मे और जाने।

हम जितना Brahmand Ke Rahasya जानते है उतनी ही जिज्ञासा अधिक बढ़ती जाती है इन रहस्यों के बारे मे और हमें पता चलता है के हमारे ईश्वर ने कितना सुन्दर ब्रह्माण्ड बनाया है। आज हम ऐसे ही कुछ Brahmand Ke Rahasya से भरे facts जानेगे।

Brahmand Ke Rahasya

Brahmand Ke Rahasya इतने सारे हैं के उन्हें केवल एक पोस्ट मे लिखना मुश्किल होगा। इसलिए मे कई सारे पोस्ट लिखूंगा तो ज़रूरी है के आप मेरा ये ब्लॉग सब्सक्राइबर कर लें ताकि आपको मेरे आने वाले पोस्ट की जानकारी आपके मेल बॉक्स मे मिल सके।

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ब्रह्माण्ड की रचना कैसे हुई?

ऐसा माना जाता है के ब्रह्मांड की उत्पत्ति 15 अरब साल पहले एक बड़े धमाके जिसे Big Bang के नाम से जाना जाता है से हुई थी।

इस बड़े धमाके से पहले ब्रह्मांड केवल हाइड्रोजन और हीलियम की एक बहुत ही छोटी राषि मे मौजूद था। जिसका कोई अस्तित्व नहीं था। यानि कोई तारा या कोई भी ग्रह हमारे आसमान मे नहीं था।

बिग बैंग थ्योरी ब्रह्माण्ड की रचना।

जार्ज लेमैत्रे (1927) जो एक महान साइंटिस्ट हैं। इन्होने ब्रह्माण्ड की रचना के बारे मे अध्यन किया और एक थेओरी दी जिसे बिग बैंग का नाम दिया गया। इस थेओरी के अनुसार एक छोटे से आकर के गोले जिसमे हैड्रोजेन और हीलियम का बहुत बड़ी मात्रा का इसमे संचार था।

जो हज़ारो सालों से शुन्य मे बहता रहता था। अचानक उसमे एक बड़ा धमाका हुआ और उसमे मौजूद गैस बहुत ही तेज़ बेग के साथ बहार निकलीं।

यही ब्रह्माण्ड का शुरुआती बिस्तार था। इसके बाद ब्रह्माण्ड मे बहुत गर्मी बढ़ गई क्यों की दोनों ही गैसें बहुत गरम होती हैं। समय गुज़रता गया और ब्रह्माण्ड ठंडा होने लगा।

इस प्रक्रिया के दौरान सब-एटोमिक कड़ों के बनने की प्रक्रिया शुरू हुई जिनमे इलेक्ट्रॉन, प्रोट्रोन और न्यूट्रॉन तीनो ही मौजूद थे।

ये कढ़ बहुत बड़ी तादाद मे बनने शुरू हो गए जिसके कारण हैड्रोजेन का बनना शुरू हुआ और हैड्रोजेन की सहायता से हीलियम और लिथियम गैस का बनना शुरू हुआ।

फिर यही कढ़ आपस मे मिलने लगे तेज़ दवाब के साथ और इसी के कारण तारों और ग्रहों का निर्माण हुआ। आज हम जितने भी तारे देखते हैं वो सब इसी तरीके से पैदा होते है। आज भी नए तारे ऐसे ही बनते रहते हैं।

ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्य

ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बाद भी ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्य की संख्या बहुत बड़ी है। आज हम इसी के बारे मे बात करेंगे। ये कुछ ऐसे रहस्य है जिन्हें जान कर आप भी चौक जाएंगे।

ब्रह्माण्ड के 5 अनसुलझे रहस्य

हम जितना भी ब्रह्माण्ड के बारे मे जानने की कोशिश करते हैं ये उतने ही आश्चर्चकित तथ्य ला कर हमारे सामने रख देता है। जितने सवाल हम सुलझाते है उतने ही रहस्य हमारे सामने आ जाते है।

हम कितने सवालों के जवाब ढूंढ पाएंगे ये तो बामय ही बताएगा लेकिन आज हम जिन सवालों की बात कर रहे है ये अभी तक अनसुलझे हैं।

    No.1:- Bootes void

किसी भी चीज़ की मौजूदगी से बड़ा रहस्य होता है किसी भी चीज़ का ना होना। अगर आप कहीं ऐसी जगह पहुंच जाएं जहाँ कुछ भी ना हो तो आप ना सिर्फ चकित रह जाएंगे बल्कि डर का एहसास भी होगा।

इसी ही एक जगह अंतरिच्छ मे मौजूद है जिसे Bootes void कहते हैं।

ये बहुत ही रहस्मई जगह है जहाँ कुछ भी नहीं हैं। यानि अंतरिच्छ का वो हिस्सा जिसमे कुछ भी नहीं है। वैसे तो अंतरिच्छ मे बहुत बड़ी जगह खाली ही रहती है लेकिन Bootes void अंतरिछ का एक विशालकाय रूप है जो बिलकुल खाली पड़ा है जिसमे कोई भी तारा नहीं है।

ये लगभग गोल हिस्सा है जिसमें 33 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी के बीच एक तारा भी नहीं है। इस जगह के खालीपन का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है के खगोल शास्त्री क्रेक एंड्रू ने कहा था।

“अगर हमारी आकाश गंगा इस Bootes void के बीच मे होती तो हम 1960 से पहले कभी जान ही नहीं पाते के आकाश मे और भी आकाशगंगाएं मौजूद हैं। और ऐसा इसलिए होता जहा प्रकाश पहुंचने मैं करोड़ों साल लग जाते।”

Bootes void की खोज 1981 मे की गई थी। ये इतना बड़ा छेत्र है जहाँ औसतन 2000 आकाशगंगाएं होनी चाहिए।

अब ये इतनी विशाल जगह खाली क्यों पड़ी है इसका जवाब अभी तक साइंस के पास नहीं है। एक अबधारणा के अनुसार यहाँ एक बहुत ही विशाल ब्लैक होल बना होगा जो सबकुछ निगल गया होगा।

NO.2:- Missing Matter

अगर आपका कुछ आपके घर मे खो जाता है तो आप उसे अपने घर के कोने कोने मे उसे ढूंढ सकते हैं। लेकिन ब्रह्माण्ड मे कुछ खो जाए तो आप उसे कहाँ ढूंढेंगे।

हमारे ब्रह्माण्ड का 95% हिस्सा डार्क मैटर और डार्क एनर्जी है। और ब्रह्माण्ड मे जो कुछ भी हम देख रहे हैं या छू सकते है वो सब केवल 5% से ही बना हुआ हैं।

लेकिन इस 5% का आधा हिस्सा जिसे हम नावेल मैटर कहते हैं वो गायब है। और 95% हिस्सा जिसे डार्क मैटर कहते हैं उसपर पहले से ही रहस्य बना हुआ हैं।

Dark Matter and dark Energy

डार्क मैटर को हम सीधे नहीं देख सकते। क्यों की ये प्रकाश या अन्य चीज़ से अंतक्रिया नहीं करता हैं। लेकिन इसका अस्तित्वा है और इसके अस्तित्वा का पता इसके द्वारा डाले गए दूसरी वस्तुओं पर प्रभाव से चलता है।

ठीक इसी प्रकार डार्क एनर्जी भी रहस्मय है। क्यों की इसके अस्तित्वा का कोई सीधा प्रमाण नहीं है।

पर कहा जाता है गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार हर बड़ी चीज़ एक दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करती है। जिसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं। यानि ये चाँद तारे सभी मे अपना गुरुत्वाकर्षण है।

अगर इस नियम को सही माना जाए तो आकाश मे हर चीज़ को आपस मे जुड़ जाना चाहिए। यानी सारे तारों को आपस मे जुड़ कर एक हो जाना चाहिए और सारी आकाशगंगाएं आपस मे जुड़ जानी चाहिए।

किन्तु इसके बिपरीत तमाम आकाशगंगाएं और तारे लगातार दूर जा रहे है यानी आकाशगंगाएं पास आने की जगह फेल रहीं हैं।

इसका मतलब ये है के कोई ऐसी ताकत है जो गुरुत्वाकर्षण से भी अधिक ताकतवर है जो हर चीज़ को फैला रही है। इसे ही डार्क एनर्जी कहते है। यानी डार्क एनर्जी का भी अस्तित्वा है।

अब सवाल उठता है के ब्रह्माण्ड मे मौजूद 5% का आधा हिस्सा कहाँ है? इस सवाल का भी जवाब अभी हमारे पास नहीं है। एक अबधारणा के अनुसार ये किसी बड़े ब्लैक होल मे समां गया होगा। क्योंकि प्रकाश भी इससे बहार नहीं आ सकता इसलिए हम इसे नहीं देख सकते।

एक दूसरी अबधारणा भी है जिसके अनुसार ये किसी दूसरे समानांतर ब्रह्माण्ड मे चला गया होगा जिसे भी हम नहीं देख सकते।

No.3:- Great attractor

हमारी आकाश गंगा से 22 करोड़ प्रकश वर्ष दूर कुछ ऐसा है जो हमारी आकाशगंगा को अपनी ओर खींच रहा है।

जबसे हमारा ब्रह्माण्ड अस्तित्व मे आया है तबसे ये लगातार फेल रहा है। और आंतरिकछ मे हर चीज़ गतिमान है। और हमारी आकाशगंगा भी गतिमान है।

लेकिन हमारी आकाशगंगा जिस तरफ जा रही है वो दिशा सही नहीं है। और इस दिशा परिवर्तन का कारण है एक गुरुत्वाकर्षण बल जो हमारी पूरी आकाशगंगा को अपनी ओर खींच रही है।

ये माना जाता है के एक ब्लैक होल मे बहुत ज्यादा गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है। और हमारी आकाशगंगा के मध्य मे भी एक ब्लैक होल मौजूद है।

पर ऐसी कोई चीज़ है जो इस ब्लैक होल के साथ हमारी आकाशगंगा को भी अपनी ओर खींच रहा है। इसी ताकत को Great Attractor के नाम से जाना जाता है।

माना जाता है इस ताकत के पास हमारी आकाशगंगा से 1000 गुना अधिक भार है। और हमारी आकाशगंगा 14 लाख किलोमीटर की रफ़्तार से उस ओर खींची चली जा रही है।

 

No.4:- 1991 VG.

1991 VG एक उपग्रह का नाम है जो हमारी धरती का पीछा कर रहा है। 1991 मे एक खगोलशात्री जिम स्कूटी एस्ट्रोइड को ढूंढ़ने के लिए आंतरिकछ का अध्यन कर रहे थे। उन्होंने एक ऐसी चीज़ देखी जो आश्चर्चकिर तरीके से घूम रही थी।

इस वस्तु का व्यास केवल 10 मीटर का था। और इसकी चमक भी बहुत असाधारण थी। उन्होंने इस वस्तु को लगातार 2 रातों तक अध्यन किया।

और इस अध्यन के बाद जो उन्होंने देखा वो बहुत चौकाने वाला था। उन्होंने पाया के ये वस्तु धरती के सामानांतर कक्छा मे परिक्रमा कर रहा है।

और ये वस्तु कुछ दिनों के बाद धरती के बहुत पास से गुज़रेगा। धरती के पास से एस्ट्रोनॉइड का गुज़ारना आम बात है।

पर धरती के इतने पास से कोई एस्ट्रोनॉइड या तो धरती पर गिर जाते है या पृथ्वी की कक्छा से बहार धकेल दिए जाते हैं। ऐसा धरती के गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है।

लेकिन स्कूटी के द्वारा किये गए अध्यन मे उन्होंने पाया के ये वस्तु पहले भी कई बार धरती के पास से गुज़र चूका है। और आगे भी गुज़रता रहेगा।

इसी वजह से वो बहुत हैरान थे के ये वस्तु धरती के गुरुत्वाकर्षण से कैसे बच गया। इसी वजह से ये अटकलें लगाई जाने लगी ये वस्तु प्राकृतिक नहीं है। ये ज़रूर किसी के द्वारा बनाया गया है।

क्यों की ऐसा एक कृतिम उपग्रह ही कर सकता है। इसके पास अपनी कक्छा बनाने के लिए ऊर्जा मौजूद हो।

कुछ लोगों का मानना है ये वस्तु किसी एलियन के द्वारा बनाया गया होगा जो धरती का अध्यन के लिए भेजा गया होगा।

आपका क्या मानना है? कमेंट करके ज़रूर बताना।

No5:- Black Hole and White Hole

Black Hole ब्रह्माण्ड को वो धागोलिय छेत्र है जहाँ गुरुत्वाकर्षण बल बहुत अधिक होता है। इतना अधिक के अगर कोई भी चीज़ अगर Black Hole मे गिर जाए तो वो कभी उससे बहार नहीं निकल सकती।

यहाँ तक के प्रकाश भी इसके बहार नहीं निकल सकता। और इसी वजह से इसे सीधे देखना लगभग असंभव है।

ब्लैक होल की खोज एक विशेष प्रकार के टेलस्कोप से की जाती है। या फिर इसके द्वारा दूसरे पिंडों पर इसके असर से इसकी खोज की जाती है।

ब्लैक होल एक आंख जितना छोटा भी हो सकता है और हमारे सूरज से हज़ारों गुना बड़ा भी हो सकता है।

छोटे ब्लैक होल बिग बैंग के समय बने होंगे और बड़े ब्लैक होल तब बनते हैं जब हमारे सूरज से हज़ारों गुना बड़े सूरज का ईंधन ख़तम हो जाता है और वो अपने ही गुरुत्वाकर्षण से सिकुड़ने लगता है।

जब ऐसा होता है तो एक बहुत बड़ा बिस्फोट होता है जिसे Supper Nova कहा जाता है।

इसके बाद जो कुछ बच जाता है तो इसका गुरुत्वाकर्षक बल बढ़ जाता है और यही Black Hole बन जाता है।

Black Hole के बारे मे सबसे पहले एल्बर्ट एंस्टिन ने 1916 मे बताया था। और उनकी इसी थेओरी ने एक और खगोलीय छेत्र के बारे मे बताया था।

इसे White Hole कहते हैं। ये होल ब्लैक होल का बिलकुल उल्टा है। जिस तरह ब्लैक होल मे सब कुछ समां जाता है। उसके बिपरीत वाइट होल से भारी मात्रा मे पदार्थ बहार निकलता है।

और इसके अंदर कोई भी पदार्थ नहीं जा सकता। जब इन्होने ये बात बताई थी तब लोग उनकी बात को नहीं मानते थे।

लेकिन जब 1971 मे पहला ब्लाक होल खोजा गया तो बैज्ञानिक चकित रह गए और उनकी थेओरी सही साबित हुई।

लेकिन White Hole इतना भाग्यशाली नहीं है क्योंकि अभी तक कोई भी वाइट होल नहीं मिला है।

और इसलिए ये अभी तक एक काल्पनिक वस्तु है।

कुछ लोगों का मानना है के white Hole का अस्तित्वा होता है। क्यों की ये मानते है के हमारे ब्रह्माण्ड के अलावा भी समानान्तरण ब्राह्मण हो सकते है।

और Black Hole एक ब्रह्माण्ड से दूसरे ब्रह्माण्ड तक जाने का जरिया हो सकता है।

उनका मानना है के अगर एक Black Hole सब कुछ निगल जाता है तो वो जाता कहाँ है? ज़रूर उसके दूसरी तरफ white Hole होगा जो बसकुछ बहार निकाल देता होगा।

आपका क्या मानना है हमें ज़रूर बताएं। और आपको हमारा ये पोस्ट Brahmand Ke Rahasya कैसा लगा कमेंट करके ज़रूर बताएं। धन्यवाद

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