Bhoot ki Kahaniyan-दिल दहला देने वाली डरावनी कहानियां।2021

Bhoot ki Kahaniyan-दिल दहला देने वाली डरावनी कहानियां।

Bhoot ki Kahaniyan-दिल दहला देने वाली डरावनी कहानियां। पृथ्वी पर इंसान सदियों से रह रहा है। अपनी बुद्धिमता साहस और मेहनत से मनुष्य ने बहुत तरक्की की है।

आज हम सभ्यता के चरम दौर मै है। जहाँ ज्ञान विज्ञानं और बुद्धिमता का दौर है। विज्ञानं के इस दौर मै धार्मिक शक्तियों का भी बोलबाला है। और साथ ही बुरी शक्तियों का एहसास भी किया जाता है।

आज इक्कीसवी सदी में हम इंसानो मै कुछ लोग आज भी भूत प्रेत – और अतृप्त आत्मा, के अपने आस-पास होने का आभास करते हैं। आज हम इक इसी ही कहानी Bhoot ki Kahaniyan-दिल दहला देने वाली डरावनी कहानियां का अध्यन करेंगे जो सत्य घटना पर आधारित है।

Bhoot ki Kahaniyan

Introduction Bhoot ki Kahaniyan

सच्ची घटना पर आधारित ये Bhoot ki Kahaniyan शुरू होती है एक छोटी सी दोस्ती से जो मेरे एक नए दोस्त के साथ घटित हो चुकी थी। जब उसने ये कहानी मुझे सुनाई तो मै दंग रह गया। मेरे रोंगटे खड़े हो गए। बहुत भयभीत हुआ आज भी जब वो कहानी याद अति है तो मै डर जाता हूँ।

और सोचने लगता हूँ जब ये Bhoot ki Kahaniyan याद करके मेरा ये हाल है तो उसका क्या हाल हुआ होगा? और ये बात मुझे बहुत डरा देती है।

चलिए आपको भी आज ये Bhoot ki Kahaniyan सुना देता हूँ।

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दोस्ती की शुरुआत।

मेरे घर से कुछ ही दुरी पर एक इलेक्ट्रॉनिक की दूकान थी दुकानदार का नाम था नूर भाई मै उनकी दुकान पर अक्सर जा कर बैठता था। ये लगभग रोज़ का काम था। उनकी शादी दिल्ली से हुई थी मै भी शादी मै गया था। उनकी पत्नी की आदत भी बहुत अच्छी थी।

जब भी टाइम मिलता मै उनके पास जा कर बैठ जाता और वो मुझे बहुत सारी नैतिकता की बातें बताते। उनसे बहुत कुछ सीखा। शादी के कुछ समय बाद उनकी पत्नी का भाई दिल्ली से उनके घर आया।

जिसका नाम अनवर था। अनवर बहुत ही शांत स्वाभाव का इंसान था। हमेशा घर मै ही रहता था कभी बहार नहीं आता था। एक ही बार मेरी उससे मुलाकात हुई थी। जबकि मै तो लगभग रोज़ ही उनकी दुकान पर जाता था और दुकान भी घर पर ही थी।

कुछ दिनों के बाद नूर भाई ने मेरी मुलाकात अनवर से कराई और अनवर से कहा “आपस मै थोड़ा वक़्त गुज़ारा करो, बात किया करो हमेशा घर मै ही रहोगे तो पुरानी बातें कैसे भूलोगे। अब यहाँ आए हो तो लोगों से मिलो जुलो पहचान बनाओ और पुरानी बातें भूल जाओ सब ठीक हो जाएगा।”

उनकी ये बात मुझे कुछ अजीब लगी फिर सोचा शायद घर की कुछ समस्या होगी इस लिए कह रहे है। ये सोच कर इस बात को मै भूल गया।

अब अनवर से भी लगभग रोज़ मुलाकात होने लगी हलाकि अनवर उम्र मै मुझसे बड़े थे फिर भी हमदोने के बीच हम उम्र जैसी दोस्ती हो गई।

साथ खाना, साथ घूमना ढेरों बातें करना लगभग रोज़ का नियम बन गया। किसी कारण अगर मै उनके पास नहीं जा पाता तो वो मेरे घर आ जाते और हम घंटों बैठे बातें करते रहते।

अनवर बहुत शांत स्वाभाव के सीधे साधे इंसान थे जो बहुत धीरे बोलते और थोड़े डरे सहमे रहते थे। कभी कभी मै उनका मज़ाक बनता “यार इतने डरे डरे कियों रहते हो?”

और वो है कर टाल देते थे।

Bhoot ki Kahaniyan की शुरुआत।

Bhoot ki Kahaniyan की शुरुआत कुछ इस तरह होती है। ये संडे यानि छुट्टी का दिन था सुबह ही नूर भाई मेरे घर आए और कहने लगे “मै और तुम्हारी भाभी कहीं काम से जा रहे हैं शाम तक आ जाएंगे। आज शाम तक तुम अनवर के साथ ही रहना उसे अकेला नहीं छोड़ना।”

उनकी बात पहले तो अजीब लगी फिर मेने कहा “ठीक है मै नहा कर घर आता हूँ शाम तक वहीँ उनके साथ रहूँगा।”

कुछ ही देर मे मैं पहुंच गया और वो चले गए अब हम दोनों अकेले घर पर थे। उन्हें देख कर मे सोच रहा था हट्टे कट्टे है और इतना डरते है अकेले घर पर रह नहीं सकते।

मेने अनवर से पूछा “अनवर तबियत तो ठीक है तुम्हारी”

“हाँ ठीक है” अनवर ने कहा

“तो इतना कियों डरते हो भाई के घर मे अकेले रह नहीं सकते।” मेने मज़ाक उड़ाते हुए पूछा।

वो कुछ देर खामोश रहे फिर बोले “मे भी कभी निडर हुआ करता था बिलकुल तुम्हारी तरह। तुम आज जैसा मुझे देख रहे हो मे वैसा बिलकुल भी नहीं था।”

उनके इस जवाब ने मुझे पूरी तरह हिला दिया और मेरी उत्सुकता उनके बारे मे बढ़ गई अब मैं चाहता था उनके बारे मैं और जानू।

मेने कहा “क्या मतलब है इस बात का क्या कहना कहते हो खुल कर बताओ।”

वो अपनी आँखों मैं आंसू भर कर बोले “दोस्त तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो मैं तुम्हे सब कुछ बताता हूँ।”

आज तुम मुझे जैसा देखते हो मैं बिलकुल भी वैसा नहीं था दुनिया भर की बुराइयां लिए बस जिए जा रहा था। शराब, जुआ और हर तरह की बुराई मेरे अंदर थी। घर पर कोई इज़्ज़त नहीं थी।

इसलिए कई कई दिनों तक घर आता ही नहीं था। और घर वाले भी समझा कर थक चुके थे। उन्होंने भी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया।

मेरी ज़िन्दगी इन्ही बुराइयों मैं गुज़र रही थी। दोस्त भी ऐसे ही थे दिन भर जुआ खेलते हार जाते तो लोगों को डरा धमका कर पैसे वसूल कर लेते फिर जुआ खेलते और रात को शराब पी कर कही पड़े रहते।

एक डरा सेहमा सा रहने वाला इंसान ये क्या बोल रहा है। कुछ समझ नहीं आ रहा था लग रहा था ये झूट बोल रहा है। कुछ भी हो उसकी कहानी थोड़ी अलग थी तो सुनने मैं मज़ा आने लगा था। वो आगे कहता रहा।

जब लगता आज घर जाना है तो घर आ जाता और घर मैं कोई बात भी नहीं करता। मेरा बिस्तर उप्पर वाले कमरे मैं ही रहता था ख़ामोशी से अपना बिस्तर उठता और तीसरी मंज़िल की छत पर बिछा कर सो जाता। अगले दिन खुद ही नाश्ता निकलता खाता और चला जाता। ऐसी थी मेरी लाइफ।

मैं ख़ामोशी से बस सुनता रहा।

Bhoot ki Kahaniyan वो भयानक रात।

हमेशा की तरह एक दिन जुआ खेलने के बाद खूब पैसा जीता तो शाम को पार्टी की और खूब शताब पी। सभी दोस्त शराब के नशे मैं थे। एक एक करके सारे दोस्त चले गए सिर्फ एक दोस्त रह गया। हम दोनों ने देर रात तक और शराब पी।

रात काफी हो चुकी थी। वो कहने लगा भाई अब चलना चाहिए मैं भी अपने घर जाता हूँ। मेने कहा तू बहुत नशे मैं हे अकेला नहीं जा पाएगा। चल मैं छोड़ आता हूँ। उसका घर रेलवे लाइन के दूसरी तरफ नई आबादी मैं था।

मैं उसे छोड़ने चला गया। उसे घर छोड़ने के बाद मैंने सोचा अब मुझे भी घर चलना चाहिए। रात को करीब दो बजे होंगे। मैं वापस घर की ओर चल दिया और रेलवे पटरिओं के करीब आ गया। तभी मुझे लघुशंका (पेशाब) लगा।

कच्चे रस्ते से उतर कर कुछ झाड़ियां थी मैं वही बैठ गया और करने लगा। ठीक तभी एक ज़ोरदार चीक की आवाज़ आई। ये आवाज़ उसी झाड़ियों मैं से आई थी। पर वहां कोई भी नहीं था।

मैं बहुत डर गया नशा भी उतर गया डर जी वजह से। मैं लगभग भागता हुआ वापस अपने दोस्त के घर पंहुचा। बहुत आवाज़ लगाई पर कोई निकल कर बहार नहीं आया। मुझे लग रहा था जैसे कोई मेरे करीब चल रहा है। कभी कभी हसने की भी आवाज़ आती।

मैं उस आवाज़ से पीछा छुड़ाने के लिए इधर उधर भागता। पर वो मेरे साथ ही चल रहा था। उसे मैं महसूस कर सकता था। पूरी रात मैं गलिओं मैं भागता रहा और सुबह हो गई।

सुबह वापस मैं अपनी जगह आया और दोस्तों को सारी बात बताई तो वो कहने लगे तेरा वहम होगा कल बहुत पी ली थी न शायद इस लिए।

मुझे भी ऐसा ही लगा पर डर का एहसास घर कर चूका था। दिन फिर उसी तरह गुज़रा और रात आ गई मेने अपने दोस्त से कहा आज मेरे साथ ही रहना मुझे थोड़ा डर लग रहा है।

वो तैयार हो गया उसके लिए मैं शराब भी लाया और दोनों ने पी। रात आसानी से गुज़र गई कुछ भी नहीं हुआ।

अब इस बात को पुरे पांच दिन गुज़र चुके थे और मेरे साथ कुछ भी नहीं हुआ था। अब मुझे समझ आ गया था वो शराब का नशा था जो मुझे डर लग रहा था। अब मैं सब भूल गया और नार्मल हो गया। सब कुछ वैसे ही चलने लगा।

पांच दिनों के बाद मैं खूब नशे मैं घर पर आया और अपना बिस्तर उठा कर उप्पर चला गया। आधी रात गुज़र चुकी थी और मैं सो रहा था। मुझे कोई उठाता है और मैं नींद मैं बड़बड़ाता हुआ सो जाता हूँ उसने बहुत कोशिश की मुझे उठाने की पर मेरी नींद नहीं टूटी और वो चली गई।

सुबह उठ कर मैंने घर पर पूछा कौन आया था मुझे उठाने सबने जवाब दिया तुम्हे कौन उठाएगा किसी ने नहीं उठाया तुम्हे, नशे मैं कुछ भी बोलते हो।

पड़ोसियों से भी पूछा शायद उनके यहाँ कोई मेहमान आया हो पर वहां से भी कोई नहीं था।

मैं बहुत हैरान परेशां था पर कोई भी जवाब नहीं था दिन भर मैं इसी बारे मैं सोचता रहा और किसी से कुछ नहीं कहा।

अगले दिन मैं बिना नशे मे रात घर गया और लेट गया देखने लगा वो कहाँ से आती है। सिगरेट पर सिगरेट पिता रहा और आधी रात गुज़र गई।

अचानक देखता हु वो पड़ोस के घर से उप्पर चढ़ कर आई और मेरे सामने बैठ गई। मे समझ गया ये मेरे पड़ोसियों की कोई शरारत है।

वो फिर बातें करने लगी मैंने पूछा “तो तुम मेरे पड़ोस मे आई हो उनकी रिश्तेदार हो शायद”

उसने कहा “नहीं मे तो तुम्हारे पड़ोसियों को जानती भी नहीं। मे लाइन पार से आई हूँ तुमसे मिलने और वही रहती हूँ।”

“कोई लड़की इतनी रात मे इतनी दूर से नहीं आ सकती वो भी छत पर मज़ाक बंद करो और सच बताओ कौन हो तुम” मैंने पूछा

“अरे कल ही तो बताया था भूल गए मेरा नाम कविता है लाइन पार रमेश ठेकेदार की इकलौती बेटी हूँ और दो भाई है मेरे और मे तुमसे बहुत प्यार करती हूँ इसी लिए मिलने आ गई” उसने जवाब दिया।

मेरे तो जैसे होश ही उड़ गए रमेश ठेकेदार को तो मे जनता था। लेकिन उसकी बात पर मुझे यकीन नहीं था। मुझमे हज़ार बुराइयां सही पर मे औरतों की इज़्ज़त करता था और अगर किसी को पता चला के इतनी रात मे कोई लड़की मुझसे मिलने आती है तो लोग क्या कहेंगे ये सोच मे डर गया।

मेने उससे कहा “अच्छा ठीक है मुझे सोचने का थोड़ा टाइम दो अभी जाओ यहाँ से”

“इतनी जल्दी नहीं अभी तो पूरी रात बाकि है पहले ये बताओ मुझसे शादी कब करोगे” उसने पूछा

मे उससे पीछा छुड़ाना चाहता था कह दिया “ठीक है कल करेंगे अभी जाओ कोई देख लेगा तो मेरी बेइज़्ज़ती हो जाएगी।”

“इतना डरते हो ठीक है जाती हूँ कल फिर आउंगी शादी का जोड़ा पहन कर”

इतना कह कर वो वापस पड़ोस वाली छत पर उतर गई। मे उसे ज़ीने से उतरता हुआ देखता रहा और समझ गया ये मेरी पड़ोसियों की ही शरारत है।

सुबह होते ही मेने गली मे खूब उधम काटा और पड़ोस पर इलज़ाम लगा दिया के वो इक लड़की को मेरे पास भेजते है और शादी का दवाब बना रहे है।

गली के कई लोग इकट्ठे हुए और उसके घर मे गए तो वहां कोई भी लड़की नहीं थी। सभी ने मुझे बुरा भला कहा अब मेरी समझ मे नहीं आ रहा था ये मेरे साथ क्या हो रहा है?

मैंने अपने दोस्तों से सारी बात बताई तो उन्होंने भी मेरा मज़ाक बनाया और कहा अब तुझे शादी करलेनी चाहिए।

Bhoot ki Kahaniyan का भयानक अंत।

कुछ दिन तक मे घर ही नहीं गया और सब कुछ सही से रहा और कोई भी मुझसे मिलने नहीं आया।

कई दिनों के बाद एक दिन मैं थोड़े नशे मे देर रात घर पंहुचा और जैसे ही लेटा वो आ गई। मैं उसे देख कर बहुत डर गया। वो बहुत गुस्से मैं थी।

“तुमने मुझे धोखा दिया मैं रोज़ तुम्हारा यहाँ इंतज़ार करती हूँ और तुम आए ही नहीं क्या तुम चाहते हो मैं एक बार फिर से मर जाऊं” उसने कहा

“एक बार फिर से मर जाऊं” उसकी ये बात मुझे समझ ही नहीं आई।

“मैं तुमसे शादी करने के बारे मैं सोच ही रहा था। प्लान बना रहा था हम कहाँ रहेंगे। मुझे कुछ काम भी तो करना होगा। थोड़ा टाइम चाहिए सोचने के लिए। परेशान था इसलिए नहीं आया माफ़ कर दो” मैंने डरते हुए कहा।

वो एकदम से नार्मल हो गई और कहने लगी “जहाँ मैं रहती हूँ तुम भी वही रहोगे, जो मैं खाती हूँ तुम भी वही खाओगे, इसमें परेशान होने की क्या बात है चलो शादी कर लेते है” उसने कहा

“शादी कोई गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है। मेरे घर पर मेरी माँ है बहने है उनसे पूछना पड़ेगा उन्हें मानना पड़ेगा तब शादी करेंगे।” मैंने कहा

“तो कब करोगे शादी। मुझे नहीं पता तुम कैसे मनाओगे उन्हें मुझे टाइम बताओ और इस बार कोई बहाना नहीं वरना मैं दुल्हन बन कर वही आ जाउंगी जहाँ तुम्हारी पूरी मंडली बैठती है” उसने गुस्से से कहा।

मैं एकदम डर गया और कहा “बस दो दिन और दे दो फिर कर लेंगे अभी जाओ कोई देख लेगा मुझे डर लग रहा है”

वो चली गई मैं उसे जाते देखता रह और एक जासूस की तरह उसका पीछा किया और पड़ोस के घर मैं उतर गया। सीढ़ियों से उतरते ही तो एक कमरे की तरफ मुड़ी और अँधेरे मैं गायब हो गई।

मैंने अपने पडोसी को आवाज़ दी वो कमरा खोल कर बहार आया।

“यार मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो वो लड़की अभी इसी कमरे मैं गई है मेने उसे जाते देखा है।” मैं उससे लड़ने लगा।

वो मुझे कमरे मैं ले गया और कहा “मैं इसमें अकेला ही सो रहा हूँ बताओ वो कहाँ है शराब पीने से तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है।” कमरा पूरा खली था बस इक तखत पड़ा था जिसपर वो सो रहा था। मेरे पैरों से ज़मीन निकल गई।

सुबह मैं अपने दोस्तों के पास आया और उन्हें पूरा माजरा बताया। दोस्त भी सुन कर हैरान थे। उनमेसे एक नै कहा “चल रमेश ठेकेदार के घर चलते है और बताते है के उसकी लड़की रोज़ तुझे परेशान करती है।”

ये बात मुझे भी पसंद आई और हम सभी रमेश ठेकेदार के पास पहुंच गए और उससे उसकी बेटी के बारे मैं शिकायत करने लगे।

अपनी बेटी के बारे मैं सुन कर पहले तो उसके चेहरे पर थोड़ा गुस्सा आया फिर उसकी आँखों मैं आँसू आ गए और कहने लगा “तुम्हे शर्म नहीं आती मेरी मरी हुई बेटी के बारे मैं ऐसी बात करते हो”

“मेरी बेटी को मरे हुए पुरे दो साल हो चुके है और तुम उसके बारे मैं ये वकवास कर रहे हो।” वो रोते हुए बोला।

उसकी बात सुन कर मैं लगभग बेहोश हो गया। दोस्तों ने मुझे सम्हाला।

उसकी बेटी की शादी होने वाली थी एक ही हफ्ता बचा था। अपनी एक सहेली को शादी का कार्ड देने जा रही थी। रेलवे लाइन पर ट्रैन से हुए एक हादसे मैं उसकी मौत हो गई थी।

मेरे दोस्त मुझे वापस ले आए। मैं लगभग अवाक् सा था और सोच रहा था एक मरी हुई लड़की मुझसे शादी करना चाहती है। इससे कैसे पीछा चढ़ाया जाए कुछ समझ नहीं आ रहा था। और दो दिन गुज़र गए।

आज वही दिन था। शादी का अगर मैं घर पर नहीं गया तो वो यहाँ आ जाएगी उसने कहा था अब क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा था।

मैं डरते डरते शाम को ही घर पर आ गया। और छत पर गया ही नहीं बल्कि कमरे मैं सभी के साथ एक तखत पर लेत गया।

जब सब आ कर लेट गए तो मैंने कमरा बंद कर दिया डर बहुत लग रहा था और नींद नहीं आ रही थी। आधी से अधिक रात गुज़र गई।

मैं आँखे बंद किए लेटा था कुछ देर बार एक हाथ मेरे सीने के पास आया आँख खोल कर देखा तो वो सामने थी। दरवाज़े की तरफ देखा वो बंद था।

“आज उप्पर नहीं लेते चलो शादी करते है।” उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे उठाया।

मैं बहुत डर गया और अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा “चली जाओ यहाँ से मुझे तुमसे शादी नहीं करनी तुम एक चुड़ैल हो।”

मेरा इतना कहना था। वो जो बहुत ही खूबसूरत लड़की थी शादी के जोड़े मैं और खूबसूरत लग रही थी के अचानक उसका चेहरा ही बदल गया वो उतना भयानक था के उसके बारे मैं सोचता हूँ तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते है।

“एक ज़ोर की आवाज़ आई तुझे चलना ही होगा और शादी करनी ही होगी” इस आवाज़ ने सभी को जगा दिया और कमरे मैं सभी चीखने लगे।

उसने मुझे खीचना शुरू कर दिया। घर बाले मुझे अपने तरफ खेचते और वो मुझे बहार की तरफ खींचती दरवाज़ा भी अचानक खुल गया। हर कोई बस चीक ही रहा था।

उसने मुझे हवा में उछाला मैं छत पर लगे पंखे से टकरा गया फिर मुझे होश ही नहीं था पुरे दो दिन बाद मुझे होश आया।

एक मौलाना ने मेरा इलाज किया उन्होंने बताया रात को मैंने उस चुड़ैल के उप्पर ही पेशाब किया था। मुझे याद आयी वो रात जब लाइन के करीब मैंने पेशाब किया था और चीखने की आवाज़ आई थी।

चालीस दिन तक इलाज करने के बाद उन्होंने मुझे पुरे 6 माह के लिए दिल्ली से बहार रहने की लिए बोला है। इसलिए मैं यहाँ हूँ।

निष्कर्ष।

अनवर द्वारा बताई गई ये Bhoot ki Kahaniyan बिलकुल ही सच्ची थी। मैंने पुरे तीन लोगों से इसके बारे मैं पूछा सभी ने कहा हाँ ऐसा ही हुआ है। अनवर ने सारी बुराइओं को छोड़ दिया है अब वो एक बहुत ही अच्छा इंसान है और लोगों की मदद करता है।

दोस्तों आपको ये Bhoot ki Kahaniyan कैसी लगी मुझे कमेंट करके ज़रूर बताना। धन्यबाद

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