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Bedtime Stories for Kids-बच्चों की बेडटाइम स्टोरीज।

पुराने समय मे दादी नानी प्रत्येक दिन रात को सोते समय अपने बच्चों को Bedtime Stories for Kids सुनाया करती थीं। ये कहानियां (Bedtime Stories for Kids) इतनी मधुर, सरल, नैतिक और ज्ञान से भरी होती थीं के सुनने वाले के पूरी जीवन मे इसका असर देखा जा सकता था।

उस समय परिवार सयुक्त हुआ करते थे यानि सभी एक साथ रहा करते थे। जीवन आसान था किन्तु आज समय बदल गया है। एक बेहतर जीवन की तलाश ने हमें बिखेर दिया है। अक्सर परिवार बिछड़ गए हैं। अब दादी नानी की मज़ेदार कहानियां सभी को सुनने को कम ही मिलती हैं।

Bedtime Stories for Kids

आज हम इसी बात को नज़र मे रख कर कुछ बहुत प्रचलित दादी नानी की कहानी ले कर आए हैं। ये कहानियां (Bedtime Stories for Kids) हमारे अच्छे विचारों को बनाने मे मदद तो करती ही हैं साथ ही मनोरंजन और शब्द ज्ञान भी बढ़ातीं हैं। हमारी कोई कहानी यदि आपको पसंद आए तो इसे शेयर करना न भूले। शुरू करते हैं Bedtime Stories for Kids

Bedtime Stories for Kids

Bedtime Stories for Kids मैं हमने कई सारी छोटी कहानिओं का संग्रह किया है। जो अक्सर पुराने समय मे हमारी दादी नानी की कहानी हुआ करतीं थीं।

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रामदास की बैलगाड़ी। Bedtime Stories for Kids

Bedtime Stories for Kids belgadi

रामदास एक किसान था जो सारा दिन अपने खेत मे गुज़ारता और खेतों की रखवाली करता था। उसके पास एक बेल और एक बैलगाड़ी थी। बेल से वो खेत जोतता और जब फसल पक जाती तो बैलगाड़ी की सहायता से अपनी फसल शहर ले जा कर बेच आता था।

गेहूं की फसल काफी अच्छी हुई थी सारी फसल काट कर अनाज बोरी मे भरने के बाद बैलगाड़ी लाद ली गई अब रामदास शहर जाने को तैयार था। उसके गांव से शहर आधे दिन की दुरी पर था। सुबह जल्दी ही रामदास सफर पर निकल गया ताकि जल्दी से अनाज बेच कर वो रात वापस आ सके।

रामदास जल्दी वापस आने के चक्कर मे बैलगाड़ी तेज़ चला रहा था। रस्ते मे एक गड्डा था और बैलगाड़ी तेज़ थी। रामदास बैलगाड़ी सम्हाल न सका और बैलगाड़ी पलट गई। उसने बेल को अलग किया और बैलगाड़ी को सीधा करने लगा। किन्तु बैलगाड़ी तो बहुत भरी थी वो तो हिल भी नहीं रही थी।

वही पास एक चाय का ढाबा था जहाँ एक आदमी चाय की चुस्की लेते हुए ये नज़ारा देख रहा था। उसने रामदास को आवाज़ लगाई “भाई तुम्हारी बैलगाड़ी लदी हुई है इसे अकेले नहीं सीधा कर सालते यहाँ आओ मेरे साथ एक चाय पी लो फिर दोनों मिल कर सीधा कर लेंगे”

रामदास ने कहा “नहीं मेरा छोटा भाई बुरा मान जाएगा” और रामदास कोशिश मे लग गया।

“अरे थोड़ा ही तो टाइम लगेगा मेरी चाय ठंडी हो जाएगी अगर आया तो तुम भी थक गए हो आराम के लिए थोड़ा समय भी मिल जाएगा, चाय पीओ फिर दोनों मिल कर बैलगाड़ी सीधी कर लेंगे” आदमी ने कहा।

“नहीं मेरा छोटा भाई बुरा मान जाएगा” रामदास ने फिर वही जवाब दिया।

आदमी ने कहा “कोई बुरा नहीं मानेगा आ जाओ”

“ठीक है तुम इतना कहते हो तो चाय पी लेता हूँ किन्तु मेरा भाई बुरा मान जाएगा” रामदास भी चाय पिने बेथ गया और दोनों ने आराम से चाय पी।

चाय पीने के बाद रामदास ने कहा “जल्दी चलो बैलगाड़ी सीधी करते है वरना मेरा भाई बुरा मान जाएगा”

आदमी ने कहा “चलो चलते हैं किन्तु तुम्हारा भाई बुरा कियों मानेगा, है कहाँ तुम्हारा भाई?”

रामदास ने कहा “मेरा भाई बैलगाड़ी के नीचे दबा है, उसे छोड़ कर आ गया अब तो वो बुरा मान ही जाएगा”

आदमी ये सुन कर हैरान था। Bedtime Stories for Kids

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बुरी संगत का असर। Bedtime Stories for Kids

रोहित किशोर का इकलौता बीटा था। किशोर अपने बेटे को बहुत प्यार किया करता था और उसकी हर ज़िद को पूरा करता था।

रोहित पिता के लाड़प्यार मे बहुत बिगड़ गया था। रोहित ने कुछ बुरे लड़कों से दोस्ती कर ली थी और उनकी संगती मे जुआ और शराब पिने लगा था।

रोहित के माता को रोहित की बहुत फिकर होने लगी थी उन्हें लगता था अगर रोहित उन लड़कों की सांगत मे रहा तो रोहित का भविष्य ख़राब हो जाएगा।

रोहित की माँ अक्सर अपने पति से कहतीं “रोहित गलत संगती मे पढ़ गया है उसे समझाने की आवस्यकता हैं”

“रोहित अभी बच्चा है उसके खेलने कूदने की दिन हैं दोस्त बनाने की दिन है तुम बेकार की चिंता करती हो, मेरा बेटा कोई भी गलत काम नहीं करेगा” किशोर अक्सर यही कहा करते।

एक दिन किशोर अपने आम के बाग़ के काम से जल्दी फ्री हुए और निकल कर अपने दोस्त से मिलने जा रहे थे। रस्ते मे देखा उनका बेटा कुछ लड़कों के साथ जुआ खेल रहा है और हाथ मे शराब का गिलास है।

ये देख उन्हें बहुत दुःख हुआ पत्नी के शब्द याद आए और समझ आया उसके लाड़प्यार ने उसके बेटे को बिगड़ दिया है। वो वापस घर आए सारा माजरा पत्नी को बताया। दोनों चिंता मे डूब गए।

कुछ समय बाद रोहित भी आ गया दोनों ने रोहित को बहुत समझाने की कोशिश की किन्तु रोहित को कुछ भी समझ नहीं आया और उसने अपने दोस्तों को छोड़ने से इंकार कर दिया।

माता पिता की चिंता और बड़ गई कोई भी युक्ति नहीं सूझ रही थी अपने इकलौते बेटे को कैसे समझाएं। सारे प्रयास बिफल रहे। फिर माँ को एक युक्ति सूझी।

माँ ने रोहित को बुलाया और कहा “तीन दिन बाद तुम्हारी मौसी तुमसे मिलने आ रहीं हैं तुम आम के बाग़ जाओ और एक बोरी अच्छे आम तोड़ कर ले आओ। उनके साथ आम का स्वाद चखेंगे”

मौसी के आने की ख़ुशी मे रोहित तुरंत अपने आम के बाग़ गया और सबसे अच्छे बड़े और मीठे आम तोड़ कर एक बोरी मे भर कर घर ले आया।

माँ ने कहा “ये आम कमरे मे रख दो तीन दिन बाद निकालेंगे और तुम्हारी मौसी के साथ खाएंगे”

वो आम की बोरी कमरे मे रख आया और बहार जाने लगा तो माँ ने आवाज़ लगाई “रुको ये एक आम और उसी बोरी मे रख दो” एक आम देते माँ ने कहा।

रोहित ने आम हाथ मे लिया तो देखा “ये तो सड़ा हुआ और ख़राब है” उसने कहा।

“हाँ ये बिलकुल तुम्हारे दोस्तों जैसा ही है।” माँ ने कहा तो रहित को लगा माँ फिर से ज्ञान देने लगेगी वो चुपचाप गया और सड़ा हुआ आम बोरी मे रख आया।

तीन दिन बाद मौसी घर आ गईं सबने मिल कर खाना खाया, अब बरी थी आम खाने की तो माँ ने कहा “रोहित आम ले आ जो तुमने अपनी मौसी के लिए निकले थे”

रोहित कमरे मे गया और कुछ देर बाद खली हाथ वापस आ गया। ये देख माँ ने कहा “क्या हुआ?”

“माँ सारे आम ख़राब हो गए और बुरी तरह सड़ गए और ये उस एक आम की वजह से हुआ जो आपने रखवाया था।” रोहिर ने गुस्से से कहा।

“यानि तुम्हारे एक दोस्त ने सारे अच्छे आम ख़राब कर दिए।” माँ ने जवाब दिया।

“बेटा जब एक ख़राब आम एक बोरी आम को ख़राब कर सकता है तो तुम्हारे इतने सारे ख़राब दोस्त तुम्हे सही कैसे छोड़ सकते हैं एक दिन तुम्हारा भविष्य भी ऐसे ही ख़राब हो जाएगा” माँ ने जवाब दिया।

रोहित की आँखों मे आंसू आ गए उसने कहा” माँ आप सही कहती हो अब मे अपने ख़राब दोस्तों के पास कभी नहीं जाऊंगा मे समझ गया ख़राब संगति का असर भी ख़राब ही होता हैं।” Bedtime Stories for Kids

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कैंची और सुई से जीवन की सीख। Bedtime Stories for Kids

मदन एक दर्ज़ी का बेटा था। उसके पिता का नाम रतन था। आठवीं की परीक्छा के बाद रतन ने अपने बेटे मदन से कहा “गर्मियों की छुट्टी है और स्कूल बंद हैं अब तुम यहाँ वहां घूमोगे इससे बेहतर है तुम मेरे साथ दुकान पर चलो मेरी निगरानी मै रहोगे। दस दिन का काम है पूरा करके हम तुम्हारी नानी के यहाँ चलेंगे।”

नानी के यहाँ जाने की ख़ुशी मै मदन दुकान पर जाने को तैयार हो गया। अगली सुबह दोनों दुकान पहुंच गए रतन ने दुकान लगाई और सिलाई करने लगा।

मदन अपने पिता को काम करते देखने लगा। उसने देखा उसके पिता कैंची से कपडा काटते है और कैची को अपने पैर के नीचे दबा लेते हैं और जब सुई से कपडा सी लेते हैं तो सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं।

उसने अपने पिता को कई बार यही करते हुए देखा। तो वो बोला “पिताजी आप कैंची और सुई को कही और भी तो रख सकते हो। मै देख रहा हूँ आप कैंची को पैर मै दबाते हो और सुई को अपने सर पर लगी टोपी मै लगाते हो ऐसा क्यों करते हो?”

पिता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया “बेटा सुई कैंची से अधिक महान होती है”

“वो कैसे पिताजी सुई तो बहुत छोटी होती है और कैंची बड़ी होती है तो कैंची को महान होना चाहिए” बेटे ने सवाल किया।

पिता ने बड़े ही प्यार से बेटे को अपनी गोद मै बैठाया और समझाया “बेटा कैंची का काम काटना होता है और सुई का काम जोड़ना होता है हमेशा जोड़ने वाली चीज़ काटने वाली चीज़ से महान होती है चाहें वो कितनी ही छोटी क्यों न हो।”

इसी लिए काटने वाली चीज़ यानि कैंची को मै पैर मै दवा कर रखता हूँ और जोड़ने वाली महान चीज़ यानि सुई को मै अपने सर पर लगी टोपी पर लगता हूँ। तुम भी जोड़ने वाली हर चीज़ की इज़्ज़त करना चाहे वो छोटी ही क्यों न हो और काटने वाली हर चीज़ को अपने पैरों के नीचे ही रखना चाहे वो बड़ी ही क्यों न हो।” पिता ने बेटे को जीवन की बड़ी सीख दी। Bedtime Stories for Kids

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