रियल लव स्टोरी इन हिंदी-स्कूल लव स्टोरी हिंदी 2021

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी-स्कूल लव स्टोरी हिंदी

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी के इस पोस्ट मै आप सभी का स्वागत है। आज मै ले कर आया हूँ रियल लव स्टोरी इन हिंदी स्कूल लव स्टोरी हिंदी जो एकदम रियल लव स्टोरी है जिसे पड़ कर आप डंग रह जाएंगे लगेगी ये कोई फ़िल्मी स्टोरी है।

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी-कहानी की शुरुआत।

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी ये मेरा कॉलेज मै पहला ही दिन था। और मै बहुत एक्साइटेड भी था। जैसे जैसे मै कॉलेज के करीब पहुंच रहा था मेरी उत्सुकता लगातार बढ़ती ही जा रही थी। मै जैसे ही कॉलेज मै पंहुचा तो हैरान ही रह गया हर तरफ अफरा तफती जैसा माहौल था। जितने भी new students थे परेशान इधर उधर भाग रहे थे।

    मुझे भी कुछ समझ नहीं आया तुरंत बहार आ गया। कुछ स्टुडेन्ट्स से “पूछा क्या हुआ है”?

    उन्होंने जवाब दिया “कॉलेज का एक गुंडा जिसका नाम हिमांशु है नए बिद्यार्थियों की रेग्गिंग कर रहा है।”

    रेग्गिंग ये शब्द सिर्फ सुना था। मन मै ख्याल आया अब भुझे भी रेग्गिंग देनी होगी, बहुत डर लगा आज पहला ही दिन, और ये सब तुरंत घर वापस आ गए।

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    जल्दी घर आने पर घर के सवाल शुरू “क्या हुआ कॉलेज नहीं गए या बंक मरना शुरू कर दिया”।

    घर पर बताया सारा माजरा “एक गुंडा हिमांशु नए स्टुडेन्ट्स की रेग्गिंग कर रहा था डर कर वापस आ गया”।

    बड़े भाई बहुत हसे कहने लगे “डरने की कोई बात नहीं है मै बात कर लूंगा उससे वो तुम्हे परेशान नहीं करेगा” बड़े भाई भी उसी कोलाज से पड़े थे अब बड़ी कंपनी मै नौकरी करते हैं।

    अगले दिन मै फिर से तैयार हो कर कॉलेज के लिए निकल गया। लेकिन अब उत्सुकता तो नहीं पर थोड़ा डर ज़रूर था।

    कॉलेज पंहुचा सब कुछ शांत था। अपनी सारी क्लास की और शाम को वापस आने लगा तो कुछ लड़के केंटीन के पास खड़े थे। मुझे इशारे से बुलाया मै डरते हुए पंहुचा। तो कहने लगे “कल तुम्हारे भाई से मुलाकात हुई थी मेरा नाम हिमांशु है किसी तरह की कोई परेशानी हो तो मुझे बताना तुम्हारे भाई के बहुत एहसान है मुझ पर”।

    मेने डरते हुए कहा “जी ठीक है भाई”। उन्होंने मुझे एक कोल्ड ड्रिंक और समोसे भी खिलाए।

    सारा कोलाज उससे डरता था लेकिन मेरा सारा डर निकल चूका था। पहले कभी कभी उससे मुलाकात होती थी फिर कब दोस्ती हो गई पता ही नहीं चला।

    अपने सीनियर से दोस्ती थोड़ा अजीब लगता है। अब लोग मुझसे भी थोड़ा डरने लगे थे किन्तु मै अपनी पढाई पर ही केंद्रित रहता था मुझे भी अपने भाई की तरह एक अच्छी नौकरी की तलाश थी।

    ये बात हिमांशु को बहुत अच्छी लगती थी जब भी हम मिलते तो अपने दोस्तों से कहता थोड़ा घूम आओ और हम दोनों ही साथ कैंटीन मै बैठते थे।

    एक दिन मेने उससे पूछ लिया “मेरे दोस्त एक बात पूछू बुरा तो नहीं मानोगे”

    वो बोला “क्या बात है बताओ ना मै क्यों बुरा मानूँगा?

    मेने बोलना शुरू किया “में देखता हूँ तुम लगभग हर रोज़ कॉलेज आते हो किन्तु एक भी क्लास नहीं जाते लोगों को मारते हो। क्या तुम्हे अपने भविष्य की कोई भी चिंता नहीं है?”

    ये सुन कर उसकी आँखे थोड़ा नम हो गईं। मुझे लगा शायद मेने कोई गलत सवाल पूछ लिया है।

    थोड़ी देर ख़ामोशी छाई रही लगा जैसे बहुत हिम्मत करके हिमांशु बोला “दोस्त तूने आज दिल के तार छेड़ दिए तुझे ये कहानी फिर कभी सुनाऊंगा”। इतना कह कर वो बहार चला गया और आज पहली बार समोसों के पैसे मुझे देने पड़े।

    कई दिन गुज़र गए पर मुझे मेरे सवालों का कोई भी जवाब नहीं मिला मै जब भी पूछता वो हस कर टाल देता और इसी तरह पूरा एक साल गुज़र गया।

    उसका राज़ मुझे पता ही नहीं चला।

    अपनी छुट्टी बिताने के बाद मै सेकन्ड ईयर मै आ गया और ये मेरा कॉलेज का पहला दिन था वही अफरा तफरी चल रही थी।

    मै अपनी क्लास मै पहुंच गया तो पता चला हिमांशु ने एक स्टूडेंट को बहुत ही बुरी तरह मारा है।

    शाम को कैंटीन मै हिमांशु से मुलाकात हुई पूछा “आज फिर लड़ाई की तुमने”

    वो कहने लगा “अरे यार सिर्फ इन्ट्रो ले रहा था कॉलेज से निकलवाने की धौस देने लगा तो हाथ उठा दिया”

    हम इसी तरह बातें कर रहे थे के एक लड़की की आवाज़ ने हमारा ध्यान बाट दिया वो चिल्ला रही थी। “कौन है हिमांशु उसकी हिम्मर कैसे हुई मेरे भाई को मरने की”

    एक लड़के ने हमारी टेबल की तरफ इशारा किया तो वो किसी शेरनी की तरह हमारी तरफ झपटी।

    “कौन ही हिमांशु गुंडा? ऐसे किसी को मारा जाता है।” वो बहुत गुस्से मै थी।

    हिमांशु खड़ा हो कर जैसे ही उसकी तरफ पलटा और दोनों ने एक दूसरे को देखा पूरी कैंटीन मै सन्नाटा छा गया।

    उसका गुस्सा जैसे काफूर हो गया कुछ देर के बाद उसके मुँह से निकला “हिमांशु तुम”

    “प्रियांशी” हिमांशु ने कहा और दोनों एक दूसरे को देखते रहे और कुछ देर बाद वो वापस चली गई।

    हिमांशु जैसे बूत बना उसे देखता ही रहा।

    मैंने गोर से जब हिमांशु को देखा तो उसकी आँखों मै आंसू और चेहरे पर मुस्कान थी। मुझे कुछ भी समझ नहीं आया ये हो क्या रहा है।

    मैंने हिमांशु को कंधे से पकड़ कर हिलाया और पूछा “कौन थी ये लड़की”?

    उसने मुस्कुराते हुए कहा “प्रियांशी” आँखों से आंसू अभी भी जारी थे।

    कौन प्रियांशी भाई बड़े ही गुस्से मै आई और ख़ामोशी से चली गई” मैंने पूछा।

    “तुम हमेशा मेरी कहानी जानना चाहते थे ना। ये लड़की प्रियांशी मेरा ही मेरी कहानी है।” उसने कहा

    रियल लव स्टोरी इन हिंदी कहानी की शुरुआत

    हम 8वी क्लास मै साथ पड़ते थे। मेरे पापा एक I.A .S. अधिकारी हैं और इसके पापा स्कूल मैं एक अध्यापक थे। मै एक टोपर था जो हमेशा क्लास मै टॉप ही रहता था और प्रियांशी एक एवरेज स्टुएंट थी।

    मुझे वो बहुत अच्छी लगती थी उसी के साथ खेलना मुझे अच्छा लगता था। मै अपने साथ उसका भी काम कर दिया करता था।

    वक़्त गुज़रता रहा हम साथ रहे। और हम दसवीं क्लास मै पहुंच गए। मेरे सारे दोस्त कहते तुझे उससे प्यार हो गया है उसे बता दे पर मै उसे कहने से डरता था।

    एक दिन मेरे कुछ दोस्तों ने एक प्लान बनाया और मुझसे कहा “विजय सविता से प्यार करता है एक लव लैटर लिखना है और तेरी ही राइटिंग सबसे अच्छी है तो तुझे लव लेटर लिखना होगा।”

    उनके कहने पर मैंने एक लव लैटर लिख दिया पर उसपर किसी का नाम नहीं लिखा। दोस्त तो पागल होते है उन्होंने वो लेटर प्रियांशी को दे दिया और कहा हिमांशु ने भेजा है वो तुमसे बहुत प्यार करता है पर कहने से डरता है। अपने दिल का हाल इस लेटर मै लिख कर भेजा है।

    प्रियांशी जैसे इसी पल का इंतज़ार कर रही थी उसने बड़ी ही ख़ुशी से वो लेटर ले लिया।

    दोस्तों ने सारी बात मुझे बताई तो मै घबरा गया अब क्या होगा कही उसने मना कर दिया तो।

    अगले दिन प्रियांशी मुझसे अकेले मै मिली और कहा “बहुत दिनों के बाद दिल की बात कही मै तो कबसे इसका इंतज़ार कर रहीं थीं”

    लगा जैसे सारे जहाँ की खुशियां मिल गईं। अब हमारा इश्क़ शुरू हो चूका था।

    लेकिन बचपन के दिन गलतियां तो होती ही हैं वो लेटर प्रियांशी के पिता के हाथ लग गया। और उन्होंने प्रिंसिपल से इसकी शिकायत कर दी।

    मेरे पापा को बुलाया गया और उन्हें सारी बात बताई गई। घर जा कर मेरी बहुत पिटाई हुई और मुझे प्रियांशी को भूलने को कहा गया। जिसका मेने इंकार कर दिया।

    मै रोज़ प्रियांशी से मिलता किसका पता उसके पिता को भी मिल गया और मेरे पापा को भी।

    घर मै खूब उधम होता पापा कहते “अभी तेरी उम्र नहीं है ये सब करने की तेरे मार्क्स पर इसका असर पड़ेगा और ये बोर्ड के पहले एग्जाम है अगर हमेशा की तरह टॉप नहीं किया तो देखना मै क्या करता हूँ”

    मुझे तो जैसे प्रियांशी का भुत ही सवार था। वो नहीं दिखती तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता था। पड़ने मै भी मन नहीं लगता था।

    पापा ने प्रियांशी के पिता के ऊपर दवाब बनाना शुरू किया के वो उसका एडमिशन किसी और स्कूल मै करा दें। पर इससे उसकी पढाई पर फरक पड़ता तो वो तैयार नहीं हुए। पापा ने उन्हें बहुत धमकियाँ दीं।

    प्रियांशी का स्कूल आना बंद हो गया मेरे पापा की वजह से और पढाई से मेरा मन हट गया मै जैसे पागल सा हो गया था जा खाना खता ना ही पढाई करता।

    बोर्ड के एग्जाम भी आ गए और बिना पड़े मैंने एग्जाम दे दिए। जब रिजल्ट आया तो मै साधारण नम्बरों से पास हुआ।

    घर मै जैसे कोहराम आ गया पापा बहुत गुस्से मै थे और गुस्से मै ही घर से बहार निकले। उस दिन मै थोड़ा घबराया हुआ था।

    पापा सीधे थाने पहुंचे और प्रियांशी के पुरे घर वालों को उठवा लिया और झूठे केस लगवा दिए।

    उन्होंने धमकाना शुरू किया “अब या तो जेल जाओगे या ये शहर छोड़ कर वो भी अभी”

    उन्होंने शहर छोड़ने का फैसला किया और उन्हें उसी वक़्त शहर से निकाल दिया गया।

    कुछ समय के बाद मुझे ये बात अपने दोस्तों से पता चली।

    तभी मेने फैसला किया मुझे अपने पापा से बदला लेने है। और मैने बस एवरेज स्टूडेंट बन कर एक गुंडा बनने का फैसला किया।

    मैंने हर वो कोशिश की जिससे मै जान सकूँ के प्रियांशी अब कहाँ है लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला और आज वो खुद मेरे सामने आ गई। में बहुत खुश हूँ मेरे दोस्त।

    हिमांशु की दर्द भरी रियल लव स्टोरी इन हिंदी सुन कर मै हैरान रह गया।

    कुछ समय के बाद दोनों ने कोर्ट मै शादी कर ली अब वो बहुत खुश हैं और उनके दो बच्चे भी हैं।

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