मेहनत का फल छोटी कहानी-Inspirational Story Hard Work 2021

    मेहनत का फल छोटी कहानी

    मेहनत का फल छोटी कहानी-Inspirational Stories About Hard Work

    मेहनत का फल छोटी कहानी-(inspirational stories about hard work) हमने अक्सर सुना होगा के मेहनत का फल (inspirational stories about hard work) मीठा होता है। आज की स्टोरी (मेहनत का फल छोटी कहानी) मै हम पड़ेंगे ये कितनी सच्ची बात है तो चलिए शुरू करते हैं मेहनत का फल छोटी कहानी (inspirational stories about hard work)।

    मेहनत का फल छोटी कहानी

    मेहनत का फल छोटी कहानी

    यहाँ हम कुछ कहानिओं (Inspirational Stories About Hard Work) का संग्रह कर रहे है जो आपको मेहनत करने के लिए मोटिवेट करेंगी।

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    Inspirational Stories About Hard Work

    कहानी नंबर 1 दो भाइयों की कहानी। मेहनत का फल छोटी कहानी

    राजा और मोहन दो भाई थे। राजा बड़ा भाई था और मोहन छोटा भाई था। दोनों ही हमेशा लड़ते रहते थे। राजा पढ़ाई मै बहुत कमज़ोर था। जबकि मोहन पढ़ाई मै थोड़ा होशयार था। राजा और मोहन मै हमेशा मोहन के नंबर अच्छे आते जबकि राजा बस प्रमोट हो कर अगली क्लास मै जाता।

    जिसकी वजह से राजा मोहन से जलने लगा क्योंकि सभी लोग मोहन को पसंद करते थे और राजा को लोग पसंद नहीं करते थे। दोनों ने दसवीं क्लास की परीक्षा दी तो राजा फ़ैल हो गया और मोहन फस्ट क्लास पास हुआ। मोहन तो बहुत खुश था जबकि राजा बहुत उदास था।

    राजा ने अपनी पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया और एक फैक्टरी मै नौकरी करने लगा। जबकि मोहन ने अपनी पढ़ाई जारी राखी। अब राजा काम करता और पैसे कमा कर लाता और घर मै देता जबकि मोहन अपनी पढ़ाई के लिए घर से पैसे मांगता। तो राजा मोहन का मज़ाक उडाता। “कुछ नहीं रखा है पढ़ाई मै मेरी तरह काम कर कुछ तो पैसे कमाएगा, पड़ने के बाद भी तुझे नौकरी ही तो करनी है”।

    मोहन कुछ भी नहीं कह पता और चुप ही रहता था। अब घर मै भी राजा की इज़्ज़त बाद गई थी। राजा घर के बहार भी अच्छे कपडे पहन कर घूमता और पैसे खर्च करता तो बहार भी उसका नाम होता। राजा अपने भाई मोहन को रोज़ ताने मारता। “पढ़ाई का बहाना लगा कर खूब मस्ती करता है ताकि काम न करना पड़े, हराम का खता है कुछ भी नहीं करता मुझे देख खूब कमाता हूँ, तू भिखारी ही रहेगा”।

    मोहन ने अपने दिल ही दिल मै सोचा अपने बड़े भाई को अभी जवाब देने से बेहतर है मै अपनी पढ़ाई मै कड़ी मेहनत करता रहूं और जब कुछ बन जाऊंगा तो जवाब दूंगा।

    अपनी इस सोच के साथ मोहन अपनी पढ़ाई मै मेहनत से लग गया। मोहन को कभी कभी लगता था मेरा भाई मुझसे अधिक कामयाब है। उसने तो अपने लिए एक साईकिल भी खरीद ली है जबकि वो अभी भी पैदल ही चलता है।

    जैसे ही कुछ ऐसे ख्याल उसके दिल मै आते वो अपनी पढ़ाई में और मेहनत से लग जाता और अपने दिल को समझाता अगर अभी मेरे भाई ने एक साईकिल खरीदी है तो मै एक मोटरसिकिल खरीदूंगा इसके लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी और वो पढ़ाई मै लग जाता।

    हमेशा की तरह वो हर क्लास मै फस्ट आता रहा और अपनी मास्टर तक की शिक्छा पूरी कर ली। अब वो एक नौकरी की तलाश मै था। वो रोज़ नौकरी की तलाश मै जाता और खली हाथ ही वापस आ जाता।

    राजा इसपर उसका हमेशा की तरह ही मज़ाक बनता “ये लो पढ़ाई लिखाई की महान मूरत अपना मुँह लटका कर वापस आ गए है, हराम खाने की आदत लग चुकी है अब मेहनत का काम तो होगा नहीं, कोई कुछ कहे न बस दिखावे के लिए निकल जाते हैं और शाम को खाने के टाइम पर आ जाते है”।

    कई दिन ऐसे ही गुज़र गए किन्तु कुछ भी न हुआ तो मोहन ने अपना एक स्कूल ही खोल लिया। जिस तरह उसने अपनी पढ़ाई में मेहनत की थी वैसे ही वो बच्चों को पड़ने मै मेहनत करने लगा। पुरे शहर के लोग जानते थे मोहन पढ़ाई मै बहुत होशयार था और हमेशा फस्ट आता रहा और उसकी फोटो भी अखवार मै छपती थी।

    मोहन के नाम की वजह से कुछ ही दिनों मै स्कूल बच्चों से भर गया। अब मोहन राजा से कई गुना पैसा कमाने लगा।

    कुछ समय बाद जिस फैक्टरी मै राजा काम करता था वो फैक्टरी बंद हो गई तो राजा बेकार हो गया। अब वो कही काम के लिए जाता तो उसे ये कहकर भगा दिया जाता तुम पड़े लिखे नहीं हो इसलिए नौकरी नहीं मिल सकती। राजा बहुत परेशान रहने लगा।

    अपने भाई राजा को परेशान देख मोहन ने राजा को अपने ही स्कूल मै एक क्लर्क की नौकरी दे दी। राजा अब अपने किये पर बहुत शर्मिंन्दा था और वो समझ गया मेहनत का फल(मेहनत का फल छोटी कहानी) मीठा होता है। मोहन राजा से अधिक कामयाब था।

    मोरल

    कोई कुछ भी कहता रहे बस पूरी लगन और ईमानदारी से लगे रहो फल ज़रूर मिलेगा।

    कहानी नंबर 2 मंद बुद्धी बालक। मेहनत का फल छोटी कहानी

    एक समृध्या गाऊँ मै एक परिवार रहता था। परिवार के मुखिया का नाम राकेश था। राकेश के एक ही पुत्र था जो बड़ा ही मंद बुद्धी था। माता पिता हर संभव प्रयास करते किन्तु उसकी समझ मै कुछ भी नहीं आता। पिता ने अपने पुत्र को पड़ने के लिए कई स्कूलों मै भेजा किन्तु अंत मै उसे स्कूल से ये कह कर निकाल दिया जाता ये मंद बुद्धी बालक है इसकी समझ मै कुछ भी नहीं आता हम इसे नहीं पड़ा सकते।

    पिता ने सोचा कोई भी मेरे पुत्र को पड़ना नहीं चाहता तो चलो मै ही कुछ समय निकाल कर इसे पड़ता हूँ। अतः शाम को पिता ने अपना समय निकला और अपने पुत्र को ले कर बैठे और एक से दस तक गिनती पड़ना शुरू कर दिया। पिता गिनती बोलते तो वो दोहरा देता किन्तु उसे याद नहीं होती।

    पिता लगातार एक महीने तक मेहनत करते रहे किन्तु उसे एक से दस तक की गिनती भी याद न हुईं। तो पिता ने नाराज़ हो कर अपने पुत्र के गाल पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा और कहा “ईश्वर ने एक ही पुत्र दिया वो भी इतना मंद बुद्धि बालक इससे अच्छा होता वो मुझे औलाद ही नहीं देता”।

    बालक को ये बात बहुत बुरी लगी वो रात भर रोटा रहा और सोचने लगा मै अपने मारा पिता पर बोझ हूँ मेरा जीवन बेकार है मुझे आत्महत्या कर लेना चाइए ताकि मेरे माता पिता का बोझ हल्का हो सके।

    अगले दिन वो आत्महत्या के लिए निकाल पड़ा। और अपने गाऊँ से बहुत दूर निकाल आया एक जगह पंहुचा तो देखा कुछ औरतें कुए से पानी निकाल रही थीं उसने सोचा थड़ा पानी पी लिया जाए फिर सोचेंगे कैसे आत्महत्या की जाए।

    वो उनके पास गया और पानी माँगा तो एक औरत ने उसे पानी पीला दिया। पानी पी कर उसने देखा जिस पत्थर पर उनकी बाल्टी राखी थी उसपर काफी गहरा निशान पड़ा हुआ है। उसने सोचा शायद उनकी बाल्टी गिरे नहीं इसलिए उन्होंने ये निशान बनाया होगा।

    मंद बुद्धि बालक ने उनसे पूछा “इतना गहरा निशान क्यों बना दिया पत्थर पर”।

    उनमे से एक ने जवाब दिया “ये निशान हमने नहीं बनाया है हम रोज़ यहाँ अपनी बाल्टी रखते हैं इसकी वजह से बन गया है। अगर रोज़ एक जैसा ही काम किया जाए तो पत्थर पर भी निशान पड़ जाता है।”

    मंद बुद्धी बालक ने कहा “मुझे लोग मंद बुद्धी बालक कहते है अगर मै भी रोज़ कड़ी मेहनत करूँ तो क्या मै भी होशयार बन सकता हूँ”।

    उन्होंने जवाब दिया “हाँ क्यों नहीं जब एक पत्थर पर निशान बन सकता है तो तुम सबकुछ क्यों नहीं सीख सकते हो जाओ खूब मेहनत करो और बन जाओ सबसे होशयार।”

    उसने आत्महत्या का अपना विचार त्याग दिया और घर आ कर खूब मेहनत से पढ़ाई करने लगा और बिना किसी की मदद से ही एक से दस तक गिनती याद करके अपने पिता को सुना दीं और अपने पिता से कहा “पिता जी जब एक पत्थर अपर निशान बन सकता है तो लगातार अभ्यास करने से मै भी पढ़ाई कर सकता हूँ आप मुझे पढ़ाते रहिए मै आपको निराशा नहीं करूँगा।”

    पिता ने अपने पुत्र को सीने से लगा लिया और उसकी पढ़ाई शुरू कर दी। लगातार मेहनत करते रहने से वो मंद बुद्धी बालक बहुत बड़ा प्रोफ़ेसर बन गया जिसके लेक्चर अब बिदेशों में होने लगे।

    मोरल।

    अगर किसी काम मै सफलता नहीं मिल रही है तो लगातार मेहनत करते रहने से वो आसान हो जाती है और सफलता मिल जाती है।

    कहानी नंबर 2 पिता की समस्या। मेहनत का फल छोटी कहानी

    एक आदमी के चार पुत्र थे वो बड़े ही कामचोर और अलसी थे। कभी काम भी नहीं करते थे। पिता उनके भविष्य के लिए हमेशा चिंतित रहते थे। हर संभव प्रयास के बाद भी को किसी काम को पूरा नहीं करते थे।

    एक दिन उसने बीमार होने का ड्रामा किया और अपने चरों बेटों को बुलाया और कहा “बेटा में बहुत बीमार हूँ शायद मेरे मरने का टाइम आ गया है। मै तुम्हें एक राज़ की बात बताता हूँ मेने तुम्हारे लिए अपने खेत मै सोना छिपा कर रखा है।”

    उसने आगे कहा “जल्दी से खेतों मै जाओ और उसकी एक फिट खुदाई करने के बाद निकाल लेना और आपस मै बाट लेना।”

    चरों भाई सोने की लालच मै खेत मै पहुंच गए और खुदाई शुरू कर दी। पूरा खेत खोद डाला किन्तु कुछ भी नहीं मिला। थक हार कर वापस आए और कहा “पिताजी वहां तो कोई भी सोना नहीं है।” पिता ने कोई जवाब नहीं दिया।

    तब माता ही ने कहा “तुम्हारे पिता की तबियत बहुत ख़राब है आवाज़ निकाल नहीं रही है। तुम एक काम करो जल्दी से जा कर ये बीज खेत मै वो आओ कहीं ऐसा न हो वो सोना कोई और निकाल ले जाए। सोना तो उसी मै है किन्तु कहाँ है ये तो बस यही जानते है। जब ये ठीक हो जाएं तो निकाल लेना।

    सभी तुरंत खेतों मै गए और बीज खेतों में बो दिए और उनकी रखवाली भी करने लगे। कुछ ही दिनों मै फसल पक कर तैयार हो गई। तो माँ ने कहा बेटा फसल पक गई है। इसे काट लो जब तक तुम्हारे पिता ठीक होंगे और तुम्हे सोने का पता बताएंगे, तुम्हे अपनी मेहनत का कुछ तो फल भी मिल जाएगा इस फसल से।”

    सभी ने फसल को काट लिया खूब गल्ला पैदा हुआ। सभी खुश हो गए आज उन्हें अपनी मेहनत का पहली बार फल मिला था। तभी उनके पिता भी खेतों मै आ गए। सभी दौड़ कर पिता के पास आए और एक सुर मै बोले “पिता जी सोना कहाँ है हमने सब जगह देख लिया कहीं भी सोना नहीं मिला।”

    पिता ने मुस्कुरा कर कहा “बेटा गौर से देखो तुम्हारा सोना तुम्हारे सामने पड़ा है। तुम कोई भी काम नहीं करते थे मेने हर तरह की कौशिक की तुम्हे समझने की अंत मै मेने ये ड्रामा किया और देखो तुमने अपनी कड़ी मेहनत से धरती का सीना चीर कर सोना निकाला है।”

    अब उसके बच्चों को समझ आ गया के मेहनत का फल मीठा होता है। अब चोरों मिल कर खेत मै काम करते और खूब सोना निकालते थे।

    मोरल।

    मेहनत करने से हर मुश्किल आसान हो जाती है।

    मेहनत का फल छोटी कहानी-Inspirational Stories About Hard Work बहुत ही मेहनत से लिखी गई कुछ कहानियां है आपको कैसी लगी अपनी विचार कमेंट करके हमें ज़रूर बताएं। धन्यबाद

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