मूर्ख साधू और ठग -मित्रभेद -पंचतंत्र की कहानियां 2021

    मूर्ख साधू और ठग -मित्रभेद -पंचतंत्र की कहानियां

    मूर्ख साधू और ठग -मित्रभेद -पंचतंत्र की कहानियां 2021

    मूर्ख साधू और ठग -मित्रभेद -पंचतंत्र की कहानियां

    मूर्ख साधू और ठग -मित्रभेद -पंचतंत्र की कहानियां

    एक समय की बात है एक साधु जिसका नाम देव शर्मा था किसी गॉव मै रहता था। गॉव के लोग उसे कुछ धन, पुराने कपडे वा पुरानी चीज़ें दे दिया करते थे।

    जिन्हे बेच कर उसने काफी धन इकठ्ठा कर लिया था। जिसे वो एक पोटली मै बाँध कर हमेशा अपने साथ रखता, अपने धन की बड़ी चिंता करता था। वो अपने इस धन मै से कुछ भी खर्च नहीं करता था। और अपने लिए भोजन भी मांग कर ही खाता था।

    उसी गॉव मै एक धूर्त ठग भी रहता था। जिसे किसी तरह पता चल गया था के साधु के पास बहुत धन है किन्तु वो हमेशा उसे अपने पास ही रखता है और किसी पर भी भरोसा नहीं करता।

    ठग ने एक योजना बनाई और एक शिष्य के भेष मै साधु के पास पहुंच गया और मिन्नत करने लगा के वो उसे अपना शिष्य बना ले वो साधु से ज्ञान प्राप्त करना चाहता है।

    पहले तो साधु ने ये सोच कर मना कर दिया के कहीं ये मेरा धन न चुरा ले। किन्तु उस ठग ने साधु का साथ न छोड़ा और ज़िद करता रहा। साधु जहाँ जाता वो उसके पीछे लग जाता।

    अंत मै साधु ने कुछ शर्तों के बाद उसे अपना शिष्य बना लिया।

    ये भी पड़ें पंचतंत्र की कहानियां।

    पंचतनता का सम्पूर्ण इतिहास

    बन्दर और लकड़ी का खूंटा Panchatantra Story

    Imaandar Lakadhara की दिल को छु लेने वाली कहानी।

    पंचतंत्र सियार और ढोल~Panchatantra the Jackal and the Drum

    The Cobra and the Crows Panchatantra Story In Hindi

    Panchatantra Cunning Hare Lion Hindi चतुर खरगोश और शेर ~ मित्रभेद ~ पंचतंत्र

    साधु की शर्तें।

    • कभी बिना मेरी आज्ञा के मेरी कुटिया मै प्रवेश नहीं करोगे।
    • मै हमेशा कुटिया मै ही सोऊंगा किन्तु तुम्हें कुटिया के बहार सोना होगा।
    • मेरे पास जा कुछ है उसे तुम कभी हाथ नहीं लगाओगे।
    • मेरी हर आज्ञा का पालन करोगे।
    • मेरा सारा काम भी तुम ही करोगे और कुटिया के आगे हमेशा सफाई रखोगे।
    • मेरे लिए भिक्षा भी तुम ही मांग कर लाओगे और मेरे खाने के बाद ही बचा हुआ खाओगे।

    ठग ने साधु की सारी बात मान ली। उसे किसी भी तरह से साधु का शिष्य बनना था। साधु का विश्वास जीतने के लिए ठग सारे नियमो का पालन करने लगा। और कई दिन गुज़र गए साधु भी खुश था अब उसे कुछ भी नहीं करना पड़ता उसका शिष्य ही सारे काम करता है।

    और इस तरह ठग ने साधु का विश्वास जीत लिया और साधु धरम के कामों मै अपने शिष्य को साथ रखने लगा। एक दिन साधु के पास दूर के एक गॉव से अनुष्ठान करने का निमंत्रण आया अधिक धन के लालच मै साधु ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया।

    और चतुर्दशी का महूरत निकाला गया। ठग ने समझ लिया अब यही मौका है साधु अपना धन हमेशा अपने पास ही रखता है और दूर के गॉव भी ये अपना धन साथ ले कर जाएगा।

    रस्ते मै जंगल भी पड़ता है जब ये थक कर जंगल मै सो जाएगा तो इसका धन आसानी से लुटा जा सकता है। अतः ठग ने ज़िद की के वो भी अनुष्ठान में साथ जाना चाहता है।

    अभी तक उसने देखा नहीं है के अनुष्ठान कैसे किया जाता है? साधु ने सोचा चलो इसे साथ ले चलते है शायद अच्छा माल मिला तो इसके ही कंधे पर रख दूंगा रास्ता भी लम्बा है। साधु ने ठग से कह दिया ठीक है समय पर तैयार हो जाना।

    अनुष्ठान का दिन आ गया और दोनों समय पर निकल गए। काफी दूर चलने के बाद साधु थक गया और एक नदी के किनारे रुक कर कुछ देर आराम करने के बाद अपने शिष्य से बोला “मै नदी मै स्नान करने जा रहा हूँ। तुम मेरे सामान की रक्छा करना”

    और साधु ने अपना धन एक कम्बल के नीचे छिपा दिया। और नदी मै छलांग लगा दी। ठग को तो इसी पल का इंतज़ार था जैसे ही साधु ने नदी मै दुपकी लगाई ठग सारा सामान उठा कर चम्पत हो गया।

    साधु चिल्ल्ता रह गया और उसका सारा धन चोरी हो गया। मूर्ख साधू और ठग -मित्रभेद –

    पंचतंत्र की कहानियां

    Vikram Betal Story in Hindi विक्रम बेताल की रहस्यमयी कहानियां।

    विक्रम बेताल प्रथम कहानी पापी कौन?

    Vikram Betal Stories Second Story, Who is Husband

    Best Story Vikram Betal Ki Kahani King and Servant

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *