विद्यार्थियों के लिए प्रेरक प्रसंग-प्रेरक प्रसंग कहानी-2021

    विद्यार्थियों के लिए प्रेरक प्रसंग-प्रेरक प्रसंग कहानी

    विद्यार्थियों के लिए प्रेरक प्रसंग-प्रेरक प्रसंग कहानी

    हेलो दोस्तों आज हम आपके लिए ले कर आए हैं (विद्यार्थियों के लिए प्रेरक प्रसंग-प्रेरक प्रसंग कहानी) ये इतनी प्रेरक प्रसंग कहानियां है जो आपके जीवन मैं सफलता के कुछ मूल मन्त्र ले कर आएंगी।

    हमारे द्वारा लिखी ये प्रेरणादायक और प्रेरक प्रसंग कहानी आपके जीवन में एक नयी उमंग के साथ-साथ आपके सफलता के रास्ते में आने वाले सभी मुश्किलों को भी दूर कर देगा।

    विद्यार्थियों के लिए प्रेरक प्रसंग-प्रेरक प्रसंग कहानी

    विद्यार्थियों के लिए प्रेरक प्रसंग-प्रेरक प्रसंग कहानी

    हमारे समाज मैं हर तरह के लोग होते हैं जिनमे कई लोगो में सेल्फ मोटिवेशन की कोई कमी नहीं होती है। इसके बिपरीत कुछ लोग बाहरी प्रेरणा या प्रेरक प्रसंग कहानी से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते है। आज हम ऐसे ही कुछ प्रेरक प्रसंगों को आपके सामने लेकर आए है जो आपके जीवन मैं बदलाव लाने मैं आपकी मदद ज़रूर करेंगी मुझे आशा है।

    एक बिद्यार्थी जिसे Maths समझ नहीं अति थी।

    एक बालक जिसका नाम राजू था बहुत परेशान रहता था। अद्यापक जब Maths की Class देने आते तो वो कांपने लगता था। क्यों की उसे ये Subject कुछ भी समझ नहीं आता था। और हर Class मैं उसे मार पड़ती थी।

    धीरे धीरे गढ़ित का डर उसके दिमाग मैं घर बना चूका था और उसे लगने लगा था मैं गढ़ित कभी सीख नहीं सकता।

    एक बार स्कूल के प्रिंसिपल ने उसके पिता को बुलाया और उनसे कहा “यदि आपका बेटा इस बार भी गढ़ित मैं फ़ैल हुआ तो वो उसे स्कूल से निकल देंगे।”

    पिता ने कहा “बेटा मैं तुम्हे पढ़ाने के लिए कितनी मेहनत करता हूँ ताकि तुम्हारा भविष्य सुरक्षित हो सके और तुम ऐसी शिकायतें सुनते हो, गढ़ित पड़ते क्यों नहीं हो”

    बच्चे ने बड़ी ही मासूमियत से जवाब दिया “पिताजी मुझे गढ़ित समझ नहीं आती मुझे अब उससे डर लगने लगा है।”

    पिता समझ गए गढ़ित का डर उसके दिमाग मैं बैठ गया है उसे निकलना होगा।

    पिता ने प्रिंसिपल से आज्ञा ली और अपने पुत्र के साथ स्कूल से चल दिए। पिता ने कहा “आज लम्बे रस्ते से घूमते हुए और बातें करते हुए घर चलेंगे।

    पिता ने कहा “बेटा तुम्हे गढ़ित समझ क्यों नहीं आती ये तो बहुत अच्छा बिषय है।”

    बच्चे ने जवाब दिया “मैंने उसे सीखने की कोशिश की थी पर वो समझ ही नहीं आई तो अब मेने उसे पड़ना छोड़ दिया।”

    पिता समझ गए उसे प्रेरणा की आवश्यकता है तो रस्ते मैं उन्होंने अपने पुत्र को कुछ प्रेरक प्रसंग कहानी सुनाई जो उनके बेटे मैं आत्मविश्वास पैदा कर सके। लिंक पर क्लिक करके आप भी उन कहानियों को पड़ सकते हैं।

    बातों बातों मैं काफी लम्बा रास्ता वो चल लिए थे अब बच्चे ने कहा “पिता जी प्यास लगी है।”

    “चलो आगे एक कुआँ है वहां से पानी पीते है और प्यास बुझाते है” पिता ने कहा और कुछ ही देर मैं वो एक कुँए के पास पहुंच गए।

    बाल्टी कुँए मैं डाल कर पिता ने पानी निकला और पहले बच्चे को दिया फिर खुद पिया और बाल्टी एक पत्थर पर रख दी।

    तभी बच्चे ने ध्यान दिया जहाँ बाल्टी राखी गई है वहां पत्थर पर एक बड़ा सा निशान यानि एक गोल गड्ढा बना हुआ है जिसमे बाल्टी का थोड़ा हिस्सा समां जाता है।

    बच्चे ने पूछा “पिता जी पत्थर पर ये गड्ढा बाल्टी रखने के लिए बनाया है क्या?”

    पिता ने हस्ते हुए जवाब दिया “नहीं बेटा सभी लोग कुँए से पानी निकालने के बाद बाल्टी यही रख देते है। लगातार बाल्टी रखने और उसके रगड़ने से पत्थर घिस गया है और जगह हो गई है।”

    पिता द्वारा सुनाई गई प्रेरक कथाओं ने उसमे विश्वास पहले ही पैदा कर दिया था। अब घिसा हुआ पत्थर देख कर वो कुछ देर सोचने लगा फिर बोला।

    “यदि लगातार बाल्टी रखने से एक बड़े से पत्थर मैं गड्ढा हो सकता है तो लगातार अभ्यास करने से मैं भी तो गढ़ित सीख सकता हूँ। पिता जी क्या आप मेरी मदद करेंगे गढ़ित सीखने मैं।”

    पिता ने कहा “हाँ ज़रूर और मुझे आशा है तुम इस बार की परीक्षा मैं प्रथम स्थान प्राप्त करोगे।”

    बच्चे ने खूब मेहनत की और इस बार चमत्कार हो गया राजू प्रथम स्थान लाया था।

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    दो दोस्तों की प्रेरक प्रसंग कहानी।

    एक छोटे से गाऊँ मैं दो दोस्त रहते थे। गाऊँ पहाड़ी इलाके यानि लद्दाख मैं था। दोनों दोस्त गाऊँ मैं ही छोटा मोटा काम करके अपनी जीविका चला रहे थे।

    एक दिन राजेश ने एक विचार बनाया और सुमन से कहा, “लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है और गाऊँ मैं जीवन चलाना कठिन होता जा रहा है, बेहतर होगा हमें शहर जाना चाहिए और नए अवसर की खोज करनी चाहिए।”

    सुमन को ये विचार बहुत पसंद आया और वो भी शहर जाने के लिए सहमत हो गया।

    एक दिन दोनों ने अपना सामान बंधा और शहर की ओर निकल दिए ये सर्दियों का समय था। रस्ते मैं उन्हें एक नदी मिली जो पूरी तरह जमी हुई थी।

    नदी को पार करने के लिए कोई पुल भी नहीं था। तभी सुमन ने कहा “अब क्या करेंगे नदी कैसे पार करेंगे? ये तो जमी हुई है अगर इस पर चले तो फिसल जाने का खतरा है और गहरी चोट भी लग सकती है। और कहीं बर्फ कमज़ोर हुई तो हम नदी मैं चले जाएंगे जिससे हमारी मोत भी हो सकती है।”

    उसने आगे कहा “बेहतर होगा हम वापस चलें और गर्मिओं मैं आएं।”

    राजेश ने कहा “वापस नहीं जा सकते हमें ये खतरा उठाना ही होगा शहर नदी के उस पार है और हम कई दिनों का सफर करके आए हैं वापस कैसे जाएं?” इतना कह कर राजेश नदी की तरफ चल दिया।

    सुमन ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की पर वो नहीं रुका और जैसे ही पहला कदम नदी पर रखा राजेश फिसल गया।

    “देखा कहा था ना नदी मैं बहुत फिसलन है पार नहीं कर सकते वापस आ जा अपनी जान गवा देगा।”

    पर उसने सुमन की बात पर ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ने लगा। चार पांच कदम सम्हाल कर चला के धड़ाम वो फिर गिर गया।

    “हाथ पैर टूट जाएंगे, नदी मैं बहुत फिसलन है मान जा वापस आ जा” सुमन अपनी धुंद मैं बोलता रहा और वो उठ कर आगे बढ़ गया।

    राजेश कुछ कदम चलता और फिसल कर गिर जाता। 6-7 बार गिरते गिरते वो आधी रस्ते पर पहुंच गया।

    अब वो समझ चूका था के बर्फ की फिसलन भरी नदी मैं किस तरह चलना है। अब वो समझ कर चलना शुरू करता है और जल्द ही पूरी नदी पार करके उस तरफ पहुंच जाता है।

    अब वो सुमन को आवाज़ देता है के वो भी नदी पार करके आ जाए लेकिन सुमन डर की वजह से मना कर देता है और वापस गाऊँ की ओर चला जाता है और राजेश शहर की ओर।

    प्रेरक प्रसंग कहानी का सारांश।

    इस कहानी का प्रेरक प्रसंग ये है के वही लोग कामयाब होते हैं जो खतरा उठाने को तैयार रहते हैं।

    दोस्तों आपको हमारी ये प्रेरक प्रसंग कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना धन्यवाद।

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