जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व

जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व इस बात से समझा जा सकता है के जिसके जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन नहीं होता है वो व्यक्ति पशु के सामान होता है।

जीवन एक ऐसी चीज़ है जिसकी तुलना संसार की किसी भी बस्तु से नहीं की जा सकती है। इसी लिए कहा जाता है जीवन अनमोल है और परिश्रम और अनुशासन इसका गहना हैं।

जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व

जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व

आज के इस पोस्ट जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व मैं हम बात करने वाले हैं परिश्रम और उसके परिडाम, अनुशासन का महत्व व उसके परिडाम के बारे मैं तो चलिए शुरू करते है जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व।

परिश्रम का महत्व क्या है?

जहाँ ईश्वर ने हमें जीवन दिया है, और मनुष्य बनाया है, बुद्धिमता के शक्ति से सम्मानित किया है वहीँ उसी ईश्वर ने विवेक, आचरण, सही बुरे के पहचान करने के लिए कुछ प्राकर्तिक नियम भी बनाए है।

जो व्यक्ति अपना सम्पूर्ण जीवन ईश्वर द्वारा बनाए गए इन नियमों के अनुसार जीवन गुज़रता है वही सर्वगुण संपन्न व्यक्ति होता है।

ईश्वर द्वारा बनाए गए नियमो का आजीवन पालन व्यक्ति का परिश्रम दर्शाता है।

इसी परिश्रम को निरंतर प्रतिदिन निभाते हुए जीवन बिताना और पालन करने वाला व्यक्ति ही सफलता की सीडी चढ़ते हुए समाज मैं अपना स्थान बना पता है।

परिश्रम अनुशाशन के आभाव मैं कभी पूरा नहीं हो सकता तो व्यक्ति को पहले अनुशाषित होना पड़ेगा। इस बारे मैं बाद मैं बात करेंगे पहले परिश्रम को सही से समझते है।

Parishram Ka Mahatva Story in Hindi

परिश्रम क्या है?

परिश्रम क्या है इसको सही से समझने के लिए शब्दकोष का सहारा लेते है।

“परिश्रम” दो शब्दों से मिल कर बना एक शब्द है जिसमे पहला शब्द “प्रेम” “LOVE” है जिसका मतलब है प्यार जो दिल से आता है। जिसके लिए ज़ोर जबरजस्ती नहीं की जा सकती।

और दूसरा शब्द है “श्रम” जिसका मतलब है कार्य या कोशिश यानि कुछ हासिल करने के लिए किया गया प्रयास।

तो “परिश्रम” का मतलब हो जाता है अपनी खुद की लगन और प्यार से किया गया कार्य।

परिश्रम का अर्थ होता है कि जब हम किसी कार्य को शारीरिक व मानसिक रूप से प्यार के साथ करते है, यानि किसी भी तरह की कामयाबी तभी हासिल हो सकती है जब किसी कार्य को प्यार से मज़े लेते हुए किया जाए।

परिश्रम का जीवन मैं क्या महत्त्व है?

“परिश्रम” एक ऐसा शब्द जिसको सुनते ही कुछ लोगों को लगता है जैसे उनपर कोई पहाड़ टूटने वाला है। एक डर, भय उनके चेहरे पर साफ़ देखा जा सकता है।

शब्द के अनुसार प्रेम करने के बिपरीत वो डर जाते हैं और उससे पीछा छुड़ाना चाहते हैं।

इस तरह के व्यक्ति प्रेम से श्रम नहीं करते बल्कि बस उसे निपटना और पीछा छुड़ाना चाहते हैं। इस तरह के व्यक्तियों का किया गया कार्य कभी तारीफें नहीं बटोरता और न ही उसे अपने कार्य से संतुस्ती मिलती है।

जीवन निरंतर प्रयास करने से आगे बढ़ता है जबकि ऐसे लोगों का जीवन ठहर सा जाता है।

हम जब अपना कोई हीरो चुनते है और उसकी कामयाबी से प्रभावित होते हैं और हम भी ठीक बेसे ही बनना चाहते हैं तो असल मैं हम लालची बन रहे होते है।

क्यों की हम अपने ज्ञान को अधूरा रखते हैं। हम सिर्फ अपने हीरो की कामयाबी देखते हैं और बिना “परिश्रम” के उस जैसा बनना चाहते हैं। ये लालच नहीं तो और क्या हैं?

अगर आप भी किसी तरह की कामयाबी चाहते हो तो आपको भी एक प्रेरणा बनानी चाहिए यानि अपना कोई एक हीरो। पर बगैर लालच के।

अगर आप भी उसके जैसा या उससे अच्छा बनना चाहते हो तो सिर्फ उसकी कामयाबी ही नहीं बल्कि अपने ज्ञान को बढ़ाते हुए उसके परिश्रम को भी अध्यन करने की आवश्यकता है।

उसके द्वारा किया गया “परिश्रम” और गलियां आपको सीखनी होंगी और वो गलतिओं को दोहराने से बचना होगा। उसके द्वारा किया गया परिश्रम से अधिक परिश्रम करने के लिए खुद को तैयार करना होगा।

अगर आप ऐसा कर पाते हो तो आपको जीवन मैं सफल होने से कोई भी रोक नहीं सकता। अब अपनी कामयाबी का आनंद लो।

अनुशासन का महत्व

आपको पहले ही बता दिया गया है के अनुशासन के बिना परीश्रम का महत्त्व नहीं होता और परिश्रम के बिना सफलता नहीं मिलती और असफल व्यक्ति की समाज मैं कोई इज़्ज़त नहीं होती।

अनुशासन का अर्थ

“परिश्रम” के तरह “अनुशासन” भी दो शब्दों से मिल कर बना है अनु और शासन।

जिसमे “अनु” का अर्थ है “पालन” और “शासन” का अर्थ है “नियम”।

यानि अनुशासन का मतलब हो जाता है नियमों का पालन। जिस व्यक्ति के जीवन मैं नियमों का महत्त्व नहीं होता वो व्यक्ति इज़्ज़त का पात्र नहीं होता।

अनुशासन का महत्त्व क्या है?

मनुष्य के जीवन मैं अनुशासन ही वो गुड़ है जो उसके व्यक्तित्व मैं नज़र आता है और उसे महान बनता है।

यदि कोई व्यक्ति जीवन के किसी भी छेत्र मैं सफल होना चाहता है। तो उसे उससे सम्बन्थिद नियमो का पालन करना ही पड़ेगा इसके आभाव मैं कोई भी वियक्ति सफल हो ही नहीं सकता।

हमारे चरों ओर की वस्तुओं पर नज़र डालो सूरज समय पर निकलता है और समय पर ही ढल जाता है। अपने नियम का पालन कर रहा है।

रात समय पर होती है और सुबह भी समय पर होती है अपने नियम का पालन करते हुए।

हवा स्वतः ही बहती रहती है जो जीवन का स्रोत है। नदियां भी नियमों के अनुसार बहती हैं। धरती भी अपनी छाती पर नियमानुसार सबको लिए खड़ी है।

यदि ये सारी वस्तुएं अपने नियमों का पालन करती रहें तो सबकुछ सही चलता है। लेकिन ये सारी चीज़े अपने नियम के बिरुद्ध काम करने लगें जीवन समाप्त हो जाएगा।

इससे पता चलता है के नियमो का पालन हमारे जीवन मैं बहुत ही महत्वपूर्ण है।

अनुशासन से क्या लाभ है?

यदि अनुशासन के लाभ को बिस्तर से बताया जाए तो ये पोस्ट बहुत ही बड़ा हो जाएगा और यदि आप चाहते हो के इस बारे है बात की जाए तो कमेंट करें मैं एक बिसार से पोस्ट बना दूंगा। लेकिन संदर्भ मैं तो बात की ही सा सकती है।

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज के नियमों के साथ प्रत्येक मनुष्य के अपने बनाए हुए नियम भी होते है जो उसे दूसरे से भिन्न दिखते हैं।

यदि एक व्यक्ति समाज के नियमो के साथ खुद के बनाए नियमों का भी पालन करता है। तो उसके कामयाबी के कई सारे दरवाज़े खुल जाते हैं।

उदाहरण के लिए कोई बिद्यार्थी समय पर उठने, खाने, खेलने, और पड़ने का नियम बनता है और उस पर निरंतर लगा रहते है तो उसे सफल होने से कौन रोक सकता है।

निष्कर्ष

प्रत्येक जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व बहुत बड़ा होता है। जो व्यक्ति जीवन मैं परिश्रम और अनुशासन का महत्व को नहीं समझ पता वो विफल ही रह जाता है।

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