गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां। परियों की Best अनूठी कहानी। 2021

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां।

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां। परियों की अनूठी कहानी।

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां। परियों की अनूठी कहानी। मेरे इस पोस्ट मै आप का स्वागत है आज हम ले कर आए हैं एक ऐसी गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां की कहानी जो आपको रोमांचित कर देगी। तो बिना देर किये शुरू करते है गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां, परियों की अनूठी कहानी।

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां।

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां।

    एक समय की बात है एक गाऊँ मै मोहन नाम का एक ईमानदार किसान रहता था। जो कभी झूट नहीं बोलता था। हमेशा लोगों की सहायता करता था। हालाकि वो बहुत गरीब था किन्तु लोगों की मदद मै वो सबसे आगे खड़ा होता था। गाऊँ के सभी लोग उसकी बड़ी इज़्ज़त किया करते थे।

    उसी गाऊँ का एक ज़मींदार ज़ालिम सिंह बड़ा ही कुरूर और निर्दई था जो लोगों की थोड़ी सहायता के बदले बड़ा ब्याज लेता था और खूब धनवान हो गया था। गाऊँ का प्रत्येक घर उसका कर्ज़दार था।

    अपने ब्याज को वसूल करने के लिए उसने चार पहलवानो को रखा था। यदि कोई उसका ब्याज समय पर नहीं देता तो वो पाने पहलबानो को भेज कर उनको मरता पीटता और जो कुछ उनके घर मै होता उसे उठवा लेता जिससे लोग उससे बहुत डरते थे।

    ये भी पड़ें।

    Ek Kahani Aisi Bhi/ दिल को झंझोर देने वाली कहानी।

    Purane dinon ki yaden- वो बचपन के प्यारे दिन।

    गाऊँ से बहुत दूर एक घना जंगल था जिसमे एक बहुत बड़ी नदी बहती थी। जहाँ कुछ रहस्मई परियां रहती थी। जिनमे तीन नौजवान परियों की बहुत गहरी दोस्ती थी वो जहाँ भी जातीं साथ ही जातीं थी। वो कभी भी उस जंगल से बाहर नहीं निकली थीं।

    एक दिन एक पारी ने कहा “हम कभी भी इस जंगल से बाहर नहीं गए हैं। मेने सुना है इस जंगल से बहुत दूर एक गाऊँ है जहाँ इंसान रहते है। किसी दिन चलते है और दूर से इंसानो को देखते है वो कैसे होते है क्या करते है।”

    दूसरी पारी ने कहा “हाँ मेरा भी बड़ा दिल है इंसानों को देखने का चल न किसी दिन चुपचाप से चलते है और देखते है।”

    तीसरी पारी ने कहा “ठीक है हम कल चलेंगे लेकिन हम उनके करीब नहीं जाएंगे हमारे बाबा को पता चला तो वो बहुत चिलाएँगे। हम आसमान मै उड़ कर बादलों मै छिप कर उन्हें देखेंगे।”

    तीनो परियां सहमत हो गई और बहुत खुश हुईं कल पहली बार वो किसी इंसानो की बस्ती को देखेंगी। अपनी इस ख़ुशी मै वो रात भर सो नहीं पा रहीं थीं। और बेसबरी से सुबह होने का इंतज़ार कर रहीं थीं।

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां

    इधर गाऊँ मै मोहन के पड़ोस मै रामू नाम का एक लकड़हारा रहता था। जो कुछ समय पहले लकड़ी काटते हुए एक ऊँचे पेड़ से गिर गया था। जिससे उसकी कमर टूट गई थी। रामु के तीन छोटे बच्चे थे। पत्नी तीसरे बच्चो को जन्म देते समय परलोक सिधार चुकी थी। तीनो बच्चों का आखरी सहारा अकेला रामु था।

    रात का समय था तीनो बच्चे रोते हुए मोहन के पास आए मोहन उस वक़्त सो रहा था। मोहन को उठाते हुए बोले “चाचा बाबा की तबियत बहुत ख़राब हे उन्होंने आपको बुलाया है।”

    मोहन को मालूम था रामू की तबियत ख़राब है वो तुरंत रामू के घर जा पंहुचा। रामू दर्द से तड़प रहा था ये देख मोहन बोला “बच्चों तुम अपने बाबा का ध्यान रखो में बैध जी को ले कर आता हूँ।”

    रामू ने मोहन को रोक लिया और पास आने का इशारा किया तो मोहन पास आया। रामू ने कहा “अब मेरा समय आ गया है मेरे दोस्त तुमने हमेशा मेरी मदद करी है एक एहसान और करना मेरे बाद मेरे बच्चों का ख्याल रखना।”

    “ये घर मेने बड़ी मेहनत करके अपने बच्चों के लिए बनाया था किन्तु मेरे इलाज की वजह से ज़ालिम सिंह से पैसे ब्याज पर लिए और अब उसका ब्याज नहीं मिला तो वो ये घर छीन लेगा और मेरे बच्चे बेघर हो जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो मेरे बच्चों को अपने घर मै जगह दे देना। उन्हें दर दर भटकने के लिए मत छोड़ना इतना एहसार और कर देना मेरे दोस्त।”

    मोहन ने कहा “ऐसा कभी नहीं होंगे मै तुमसे वादा करता हूँ और तुम भी ठीक हो जाओगे। तुम हिम्मत मत हारो तुम रुको मै बैध जी को ले कर आता हूँ।” इतना कह कर मोहन तीर की तरह निकला।

    बैध जी एक दूसरे गाऊँ मै रहते थे जो कुछ दुरी पर था। मोहन बहुत तेज़ लगभग दौड़ता हुआ जा रहा था ये सोच कर के कहीं देर न हो जाए। मोहन बैध जी के घर जाता है उन्हें सारी बात बताता है। बैध जी अपनी कुछ ज़रूरी जड़ीबूटी उठाते है और मोहन के साथ निकल पड़ते हैं। और तब तक सूरज भी निकल आता है यानि सुबह होने लगती है।

    गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां

    सुबह के पहली किरण के साथ ही तीनो परिया भी समय पर नदी के किनारे इकठ्ठी हो जती है। और एक दूसरे को इशारा करतीं है जैसे चले क्या इंसानो को देखने? तीनो परियां बहुत उत्साहित थीं। तीनो सीधे आसमानो में उड़ जातीं है और फिर उस गाऊँ की तरफ सफर करतीं है और कुछ हे देर मै गौओं के ऊपर एक बड़े से बादल मै छिप कर गाऊँ का नज़ारा देखतीं है।

    वो देखतीं है गाऊँ के बाहर से दो आदमी बड़ी ही तेज़ी से गाऊँ की तरफ आ रहे हैं। एक पारी कहती है। “पुरे गाऊँ मै तो सभी आराम से घूम तहे है ये दो इंसान इतनी तेज़ कियों दौड़े जा रहे है।” दूसरी पारी कहती है “चलो इन्हे ही देखते है ये क्या करते हैं।” तीनो परियां उन्हें देखने लगतीं हैं।

    मोहन और बैध जी दोनों रामू के घर मै दाखिल होते है बच्चे रो रहे थे। बड़ा बच्चा दोड़तेहुए मोहन के पास आया और बोला “चाचा बाबा बोल नहीं रहे उन्हें क्या हुआ है?”

    बैध जी ने रामू की नब्ज़ देखी तो उन्होंने बताया रामू अब इस दुनिया मै नहीं रहे वो परलोक सिधार चुके हैं। मोहन को ज़ोर का धक्का लगा और रामू के कहे शब्द उसके कानो मै गूंजने लगे।

    बहुत जल्द ही पुरे गाऊँ को खबर मिल गई की रामू मर चूका है। रामू के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए सामग्री जुताई गई सारा इंतेज़ाम मोहन ने किया। उसे लगा रामू उसका दोस्त था इस कारण ये उसका कर्त्तव्य है। जैसे ही अर्थी उठाने का समय आया। ज़ालिम सिंह अपने पहलवानों को ले कर वहाँ पहुंच गया चारों पहलवानों ने अर्थी को घेर लिया।

    “ये अर्थी नहीं उठ सकती” ज़ालिम सिंह ज़ोर से दहाड़ा।

    बड़ी हिम्मत करके मोहन आगे आया और कहा “ज़ालिम सिंह रामू अब मर गया है कुछ तो रेहम करो इसकी अर्थी को क्यों रोकते हो।”

    “और मेरे पैसों का क्या ये तो मर गया बतलाब मेरा पैसा डूब गया। ये अर्थी तब तक नहीं उठेगी जब तक मेरा पैसा नहीं मिल जाता।” ज़ालिम सिंह ने जवाब दिया।

    मोहन की हिम्मत को देख गाऊँ के कुछ और लोग भी आगे आए और कहा ” ज़ालिम सिंह रामू का कोई भी नहीं है इसके बच्चे भी बहुत छोटे है तुम्हारे पैसे अब कौन देगा। तुम सारे गाऊँ वालों से खूब कमाते हो इसके पैसे माफ कर दो तुम्हारी बड़ी मेहरबानी होगी और भगवन तुम्हे बहुत पुंन देगा।”

    ज़ालिम सिंह ने उन्हें ज़ोर का धक्का देते हुए कहा “पैसा माफ कर दो अगर ऐसे ही मै तुम्हारे पैसे माफ करता रहा तो मै भी तुम्हारी तरह भिकारी हो जाऊंगा मुझे अपना पैसा पूरा चाहिए वो भी सूद के साथ।”

    मोहन ने कहा “ज़ालिम सिंह तुम्हे तुम्हारा पैसा रामू के मरने के बाद अब अब कौन देगा जबकि उसके बच्चे अभी बहुत छोटे है। कुछ तो रेहम करो।”

    “रेहम करने के लिए मेने अपने पैसे नहीं दिए थे मै पैसे देना जनता हूँ तो वसूल करना भी जनता हूँ। मै इसके घर पर कब्ज़ा कर लेता हूँ जब इसके बच्चे बड़े होंगे तो मुझे मेरा पैसा ब्याज के साथ लोटा देंगे और अपना घर छुड़ा लेंगे।” इतना कह कर ज़ालिम सिंह रामू के घर पर अपना ताला लगाने लगता है।

    तभी मोहन को रामू के कहे शब्द याद एते हैं “ये घर मेने बड़ी मेहनत करके अपने बच्चों के लिए बनाया था उसका ब्याज नहीं मिला तो वो ये घर छीन लेगा और मेरे बच्चे बेघर हो जाएंगे।”

    और उसे अपना वादा भी याद आया है जो उसने मरते हुए रामू से किया था। तभी मोहन जोर से चिल्लाता है। “ज़ालिम सिंह रुक जाओ तुम्हे अपना पैसा चाहिए, रामू का सारा पैसा में अपने ज़िम्मे लेता हूँ और अपना आखरी बचा हुआ खेत भी तुम्हे देता हूँ। पैसे दे कर छुड़ा लूंगा इन बच्चों को बेघर मत करो।”

    तभी गाऊँ के कुछ लोग मोहन के पास आते है और कहते हैं “ये क्या कर रहे हो मोहन गाऊँ वालों की मदद करते हुए पहले ही तुमने अपने पांच खेत इसके पास गिरवीं रखे हुए है अब आखरी बचा खेत भी इसे दे दोगे तो खेती कहाँ करोगे और खाओगे क्या?”

    कोई बात नहीं ताऊ मै मज़दूरी कर लूंगा लेकिन मरते हुए अपने दोस्त से किया वादा ज़रूर निभाउंगा। मोहन अपना आखरी बचा खेत भी ज़ालिम सिंह को दे देता है। और ज़ालिम सिंह चला जाता है। सारे गाऊँ वाले रामू का अंतिम संस्कार कर के वापस आ जाते है।

    पहली पारी कहती है “इंसान या तो बड़ा लालची और निर्दई होता है या बहुत दयावान होता है। पर कुछ भी हो इंसानो की दुनिया बड़ी दिलचस्प होती है। अब शाम होने वाली है इससे पहले के बाबा आ जाएं वापस चलते हैं।” तीनो परिया वापस चली जातीं है।

    अगले दिन तीनो परियां वापस नदी के किनारे मिलती है। एक परी कहती है “मुझे इन बच्चों और मोहन के बारे मै बहुत ही बुरा लग रहा है मेरा दिल चाहता है वहाँ जाऊं और उनकी मदद करूँ।”

    दूसरी परी उसे रोक देती है “ऐसा कभी मत सोचना हम परियां कभी इंसानो के सामने नहीं आते, अगर ऐसा किया तो बाबा बहुत नाराज़ होंगे हो सकता है वो हमारा घर से निकलना ही बंद कर दें तब क्या होगा हम आपस में भी नहीं मिल पाएंगे, उनके बारे मै अब मत सोचो।” तीनो परियां डर जातीं है।

    वक़्त गुज़रता रहता है ज़ालिम सिंह का ज़ुल्म और बढ़ जाता है। सारा गाऊँ उससे परेशान हो जाता है। मोहन अब मज़दूरी करता है। रामू के बच्चों को भी पालता है और ज़ालिम सिंह का ब्याज भी टाइम पर अदा करता है।

    काफी समय गुज़र गया तो तीनो परियों ने सोचा आज चल कर एक बार और उस गाऊँ को देखते है आखिर उन बच्चों का और मोहन का क्या हुआ? तीनो परियां आसमान मै उड़ कर एक बादल मै छिप कर गाऊँ का नज़ारा देखने लगतीं है। मोहन मज़दूरी कर रहा होता है और तीनो बच्चे घर पर पड़ रहे होते हैं।

    मोहन अपने वादे को निभा रहा था। दोपहर का समय था मोहन बच्चों के लिए खाना बनाने वापस घर पर आ गया। ये देख तीनो परियां बहुत खुश हो जातीं है। तभी एक परी की तबियत अचानक ख़राब हो जती है और वो बेहोश हो जती है। दोनों परियां परेशान हो जाति है अब क्या करें?

    पहली परी “वापस जाने मै तो समय लगेगा हमें किसी की मदद चाहिए ये भूक से निढाल हो कर बेहोश हो गई है। हमें खाना चाहिए। वरना इसकी ताबियार और अधिक ख़राब हो सकती है।”

    दूसरी परी “मुझे लगता है अब हमें इंसानो की ही मदद लेनी होगी लेकिन हमें इंसानो के बीच जाने की ईजाज़र नहीं है।”

    पहली परी “हमें मोहन के घर ही जाना चाहिए वो सबकी मदद करता है। उससे वादा करा लेंगे वो इस बात को राज़ रखेंगे और वो अपना वादा भी नहीं तोड़ता है।” दोनों परियां सहमत हो जातीं हैं और मोहन के घर मै उतर आतीं हैं।

    आसमान से तीन औरतों को उतारते देख जिनके कंधे पर बड़े से पर थे, मोहन डर जाता है और भाग कर कमरे मै छिप जाता है और कमरा अंदर से बंद कर लेता है।

    “मोहन तुम बहुत अच्छे इंसान हो तुम हमसे डरो नहीं हमें तुम्हारी मदद चाहिए। दरवाज़ा खोलो हम वादा करते है तुम्हे नुक्सान नहीं पहुचाएंगे।” एक परी ने कहा।

    मोहन डरते हुए दरवाज़ा खोल देता है। और देखता है एक परी बेहोश हुई है तो वो पूछता है “इसे क्या हुआ है और तुम कौन हो मेने परों वाली उड़ती हुई औरतें पहले कभी नहीं देखीं।”

    हम परियां हैं दूर जंगल मै नदी किनारे रहती है आज हम तुम्हे ही देखने आए थे और हमारी दोस्त परी बेहोश हो गई, थोड़ा खाना पानी और आराम की ज़रूरत है कुछ देर बाद इसे होश आ जाएगा तो हम चले जाएंगे।” एक परी ने कहा।

    “हाँ हाँ क्यों नहीं तुम इसे मेरे कमरे मै ले आओ कहीं ऐसा न हो कोई देख ले। मै इसके लिए कुछ खाना और पानी लता हूँ” मोहन ने जवाब दिया।

    मोहन पानी और खाना ले कर आ गया एक परी ने पानी के कुछ चीते उसके मुँह पर मारे तो उसे होश आ गया और वो उठ कर बेथ गई थोड़ा पानी पिया और खाना खाया तो वो ठीक भी हो गई।

    परियों ने मोहन का आभार प्रकट किया और एक जादू की थैली दी और कहा “मोहन तुम बहुत दयावान हो ये जादू की थैली रखो इसमें से जितना चाहो पैसे निकाल सकते हो। बस एक बात का ध्यान रखना लालच कभी न करना और जितना भी निकालो उससे आधे को लोगों मै बाट देना और लोगों की मदद करना वरना वे जादू की थैली गायब हो जाएगी और तुमसे सबकुछ छिन जाएगा।”

    मोहन ने परियों से वादा किया वो ये बात भी किसी को नहीं बताएगा और लोगों की मदद करता रहेगा। परियां चली गई तो मोहन ने जादू के थैले मै हाथ डाला तो ढेर सारा पैसा निकल आया। मोहन ने उसकी मदद से सारे गाऊँ वालों का क़र्ज़ ज़ालिम सिंह को दे दिया और उनकी ज़मीने छुड़वा ली और अपने खेत भी छुड़वा लिए अब सारा गाऊँ बहुत खुश रहता है। और मोहन उनकी हर मदद करता है।

    दोस्तों गरीब मज़दूर और रहस्मई परियां। परियों की अनूठी कहानी। आपको कैसी लगी कमेंट करके ज़रूर बताना। आपका धन्यवाद।

    ये भी पड़ें।

    Manoranjak Kahaniyan in Hindi दिलचस्प कहानियां

    JADU KI KAHANI राजकुमारी की शर्त और जादूगर जंजाल।

    Maa Bete Ki Kahani माँ का क़र्ज़ एक ममता की कहानी।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *