असली वर कौन? Who Should be Husband

    असली वर कौन Who Should be Husband

    असली वर कौन? Who Should be Husband

    असली वर कौन? Who Should be Husband विक्रम बेताल सीरीज की ये कहानी मै आप सभी का स्वागत है। ये कहानी “असली वर कौन?” विक्रम बेताल सीरीज की चौथी कहानी है। पिछली कहानिया पड़ने के लिए मेनू मै स्टोरी सेक्शन के विक्रम बेताल पर क्लिक करें।

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    असली वर कौन?

    एक समय की बात है उज्जैन राज्य मै महाबल नाम का एक राजा राज करता था। जिसके पास बहुत सारे बुद्धिमान दूत थे जिनमे एक दूत का नाम हरिदास था जो बहुत चतुर था और राजा महाबल उस पर बहुत भरोसा करता था।

    हरिदास की एक पुत्री थी जिसका नाम महादेवी था जो बहुत सुन्दर थी और उसकी सुंदरता के चर्चे कई देशों में थे। हरिदास अपनी बेटी के विवाह के लिए बहुत चिंतित रहता था और चाहता था जिस तरह उसकी बेटी सबगुण संपन्न है।

    उसी तरह उसका वर भी सबगुण संपन्न होना चाहिए। वो और उसका परिवार अपनी बेटी के वर की तलाश मै लगा हुआ था। तभी राजा महावल ने उसे एक दूसरे राजा के पास राजकाज के कुछ काम से भेज दिया। कई दिनों का सफर करके हरिदास राजा के पास पंहुचा और अपने राजा का सन्देश पहुंचाया।

    वहां के राजा ने उसका बहुत स्वागत किया और अपने ही महल में कुछ दिन रहने का आग्रह किया। कुछ दिन गुज़र गए तो उसके पास एक ब्राह्मण आया और कहने लगा मेने सुना है आप अपनी पुत्री के लिए एक वर की तलाश मै है।

    मै एक ब्राह्मण हूँ और विवाह के लायक हूँ और एक योग्य स्त्री की तलाश कर रहा हूँ। आप चाहें तो अपनी पुत्री का विवाह मेरे साथ करा सकते है। हरिदास ने कहा “मेरी बेटी सबगुण संपन्न है मुझे उसका वॉर भी सबगुण संपन्न चाहिए”

    ब्राह्मण ने कहा “मै भी हास्टपूस्ट और सुन्दर हूँ वेदों का जानकर हूँ और मेरे पास एक ऐसा रथ है जिसपर बेथ कर पलक झपकते ही महीने भर का सफर किया जा सकता है।”

    हरिसस ये सुन कर कुछ सोचने लगा और बोला “ठीक है कल आ जाना अपना रथ ले कर साथ उज्जैन चलेंगे और मुझे अपनी बेटी व परिवार के लोगों से बात करनी है उसके बाद ही कुछ जवाब दूंगा।”

    वो राज़ी हो गया और अगले दिन वो अपना रथ ले कर आ गया, दोनों उस पर बैठे और पलक झपकते ही दोनों उज्जैन पहुंच गए।

    जैसे ही हरिदास अपने घर पंहुचा तो देखता है के वहां दो ब्राह्मण पहले से ही मौजूद है जो उसकी बेटी से विवाह करना चाहते है जिनमें से एक उसके बेटे की वजह से आया था और एक उसकी पत्नी के कहने पर आया था।

    समस्या विकत हो गई बेटी एक और वर तीन किससे विवाह कराया जाए। अभी सभी ये विचार कर ही रहे थे। के एक राक्षस आया और उसके बेटी को उठा कर विंध्याचल पहाड़ पर ले गया।

    हरिदास बहुत घबराने लगा अब क्या किया जाए अपने बेटी को कैसे ढूंढा जाए? वो राक्षस उसे कहाँ ले गया होगा?

    तीनो ब्राह्मणो मै एक परम ज्ञानी था उसने अपनी आँखें बंद की और बताया “वो राक्षस उसे तुम्हारी बेटी को विंध्याचल पहाड़ पर ले गया है। अगर जल्दी न किया गया तो वो उसे खा लेगा।”

    तीसरा ब्राह्मण बोला “मेरे पास एक ऐसा शब्द भेदी वाण है जिससे मै उसका वध कर सकता हूँ।”

    तीनों ब्राह्मण और हरिदास तुरंत उस रथ पर बैठे और पालक झपकते ही पर्वत पर पहुंच गए।

    तीसरे ब्राह्मण ने अपना वाण चलाया तो वो राक्षस मारा गया और हरिदास अपनी बेटी को ले कर तीनो ब्राह्मणों के साथ वापस आ गया। अब तीनो व्राह्मण उसकी बेटी से अपना विवाह का दवा करने लगे और अपने योगदान के बारे मै बताने लगे।

    जिससे हरिदास बहुत चिंता मै पड़ गया। पूरी कहानी सुनाने के बाद बेताल बोला “बराओ राजन योग्य वर कौन है जिससे हरिदास को अपनी पुत्री का विवाह करना चाहिए।”

    विक्रम कुछ देर चुप रहा तो बेताल नाराज़ हो कर बोला “जल्दी बराओ राजन वरना शर्त के मुताबिक में तुम्हारा सर फोड़ दूंगा और तुम मारे जाओगे।”

    विक्रम ने जवाब दिया “जिसने साहस दिखाया और राक्षस का वध किया वही विवाह के योग्य है बाकि सभी ने तो मदद की।”

    बेताल हसता हुआ विक्रम के कंधे से हवा मै उड़ने लगा और कहने लगा “राजन तूने बिलकुल सच कहा। क्यों की तू बोला तो मै वापस चला। और बेताल वापस जा कर शमशान के उसी पेड़ पर उल्टा लटक गया।

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